July 13, 2024 |

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भारतीय राजनयिक को कनाडा छोड़ने के आदेश के बाद कनाडाई राजनयिक को भी भारत छोड़कर जाने का आदेश : जानें तनाव की इनसाइड स्टोरी

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*भारतीय राजनयिक को कनाडा छोड़ने के आदेश के बाद कनाडाई राजनयिक को भी भारत छोड़कर जाने का आदेश : जानें कनाडा और भारत के बीच रिश्तों में चरम तनाव की इनसाइड स्टोरी*

नई दिल्‍ली : भारत के विदेश मंत्रालय ने आज कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के इस आरोप को “बेतुका और बेबुनियाद” बताते हुए खारिज कर दिया कि उसने जून में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भूमिका निभाई थी. इस मुद्दे पर कनाडा में वरिष्ठ भारतीय राजनयिक को निष्कासित किए जाने के बाद भारत ने भी करारा जवाब देते हुए एक वरिष्ठ कनाडाई राजनयिक सीनियर ओलिवियर सिलवेस्टर को पांच दिन में भारत छोड़कर जानें का आदेश दिया है.

इसके बाद कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो (Justin Trudeau)डैमेज कंट्रोल मोड में आ गए हैं. जस्टिन ट्रूडो ने मंगलवार को कनाडाई संसद में दिए गए अपने बयान पर सफाई दी. उन्होंने कहा, “कनाडा खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जुड़े होने वाले ‘एजेंटों’ को लेकर भारत को उकसाने की कोशिश नहीं कर रहा है, लेकिन हम चाहते हैं कि नई दिल्ली इस मुद्दे को ठीक से हैंडल करे.”
इस मामले की इनसाइड स्टोरी के तथ्य तनावपूर्ण तथा उलझे हुए है.

विस्तृत जानकारी अनुसार खालिस्तानी टाइगर फोर्स और सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) की कनाडाई शाखा का नेतृत्व करनेवाले 45 वर्षीय हरदीप सिंह निज्जर की इस साल जून में कनाडा के सरे में एक गुरुद्वारे के पास अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. निज्जर, जो पंजाब के जालंधर का रहने वाला था, 1997 में कनाडा चला गया था. वह भारत में एक नामित आतंकवादी समूह, खालिस्तानी टाइगर फोर्स का “मास्टरमाइंड” होने के कारण भारत में वांछित था
भारत का कनाडा को विभिन्न प्लेटफॉर्म पर इस मुद्दे पर स्पष्ट खुलासा रहा हैं कि खालिस्तानी आतंकवादियों और चरमपंथियों से ध्यान हटाने की कोशिश करते हैं, जिन्हें कनाडा में आश्रय दिया गया है. वे भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए खतरा बने हुए हैं. इस मामले पर कनाडाई सरकार की निष्क्रियता लंबे समय से और निरंतर चिंता का विषय रही है.
भारत की ओर से दिए गए बयान में कहा गया है कि कनाडा में हत्या, मानव तस्करी और संगठित अपराध सहित कई अवैध गतिविधियों को दी गई जगह कोई नई बात नहीं है, और कनाडा से संचालित होने वाले सभी “भारत विरोधी तत्वों” के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह बार-बार किया गया है.

उल्लेखनीय हैं कि जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर आरोप लगाते हुए कनाडा की संसद में कहा था कि इस हत्या के पीछे भारत के होने की संभावना है.
उन्होंने कहा था, “बीते कुछ हफ़्तों से कनाडा की सुरक्षा एजेंसियां, भारत सरकार के एजेंट और कनाडाई नागरिक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बीच संभावित रिश्ता होने से जुड़े आरोपों की जांच कर रही थीं.”
ट्रूडो ने कहा हैं, “कनाडाई सिक्योरिटी एजेंसियां भारत सरकार और कनाडाई नागरिक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बीच संबंधों के आरोप की जाँच में जुटी है.”
“कनाडा की धरती पर उसके किसी नागरिक की हत्या में विदेशी भूमिका हमारी संप्रभुता का अस्वीकार्य उल्लंघन है.”

इसी बयान के 24 घंटों के भीतर पहले कनाडा ने भारतीय राजनियक को निष्काषित किया और फिर भारत ने कनाडा के राजनयिक को निष्कासित किया है

ज्ञातव्य है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले सप्ताह जी-20 सम्मेलन में द्विपक्षीय बातचीत के दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिस ट्रूडो के सामने इस बात पर नाराजगी जाहिर की थी कि उनके देश में खालिस्तानी समर्थक तत्वों की गतिविधियों पर नकेल नहीं कसी जा रही है.
मीडिया में इस ख़बर के आते ही इस बात के संकेत मिलने लगे थे कि दोनों देशों के रिश्तों पर तनाव किस कदर हावी है.
ट्रूडो निजी विमान खराब होने की वजह से जी-20 सम्मेलन खत्म होने के दो दिन बाद तक भारत में रहे लेकिन कनाडा लौटते ही जस्टिन ट्रूडो ने संसद में सिख नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार की संलिप्तता की आशंका ज़ाहिर की है

भारत और कनाडा के रिश्तों पर एक नज़र

भारत की आजादी के साथ ही कनाडा ने इसे एशिया में शक्ति संतुलन के लिहाज से एक अहम खिलाड़ी मानना शुरू कर दिया था.
शीत युद्ध के दौरान भारत कनाडा की आर्थिक मदद पाने वाला सबसे बड़े देशों में शामिल था. कनाडा ने कोलंबो प्लान के तहत भारत के सिविल न्यूक्लियर कार्यक्रम को अनुदान दिया था.
हालांकि नेटो के संस्थापकों सदस्यों में शामिल रहे कनाडा और भारत के बीच संतुलन बनाने में थोड़ी दिक्कतें आईं क्योंकि भारत गुटनिरपेक्ष आंदोलन का अगुआ था
दोनों देशों के रिश्तों में तनाव तब भी दिखा जब कनाडा ने 1948 ने कश्मीर में जनमत सर्वेक्षण की मांग का समर्थन किया.
1974 में जब भारत ने परमाणु परीक्षण किया तो कनाडा ने बेहद नाराजगी दिखाई
भारत की ओर से 1998 में किए गए परमाणु परीक्षण के दौरान भी दोनों देशों के रिश्तों में तनाव दिखा. हालाकि 2001 में कनाडा ने भारत पर लगे अपने सभी आर्थिक प्रतिबंध हटा लिए. ये प्रतिबंध परमाणु परीक्षणों की वजह से लगाए गए थे
इस तरह कनाडा की सरकार ने भारत के साथ रिश्तों को सुधारने का फैसला किया, और कालांतर में ये रिश्ते सुधरते रहें. लेकिन कनाडा में निज्जर की हत्या के साथ खालिस्तान कनेक्शन फिर सतह पर हैं और दोनों देशों के रिश्ते फिलहाल तल्खी के नए दौर में हैं.

हरदीप सिंह निज्जर को जाने

निज्जर सरे के गुरु नानक सिख गुरुद्वारा साहिब के अध्यक्ष थे और भारत सरकार की ‘वांटेड’ लिस्ट में शामिल थे हरदीप सिंह निज्जर का ताल्लुक पंजाब के जालंधर में भार सिंह पुरा गाँव से था.
भारत सरकार के मुताबिक़, निज्जर खालिस्तान टाइगर फ़ोर्स के सदस्य थे
वे खालिस्तान टाइगर फ़ोर्स के संचालन, नेटवर्किंग, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान करने में सक्रिय रूप से शामिल थे.
पिछले साल जुलाई में भारतीय आतंकवाद विरोधी एजेंसी ने पंजाब के जालंधर में एक हिंदू पुजारी की हत्या के मामले में निज्जर पर 10 लाख रुपये का नकद इनाम घोषित किया था. निज्जर पर 2007 में पंजाब के एक सिनेमाघर में हुए बम विस्फोट का भी आरोप था

कनाडा और भारत की ओर से एक दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित करने के मामले में संतोषपूर्ण तथ्य यह भी हैं की देश की विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने कहा है कि देशहित को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए. यानि इस मामले में कांग्रेस केन्द्र सरकार के साथ खड़ी हैं.


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