July 23, 2024 |

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अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर पर सैनिक संघर्ष के बाद अमेरिका का भारत को कूटनीतिक सहयोग

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अरुणाचल प्रदेश के तवांग इलाके में गतरोज जिस प्रकार प्रतिबंधित एरिया में चीनी सैनिकों ने बदनियति से घुसपैठ करके चौकी बनाने का प्रयास किया था जिसको बॉर्डर इलाके पर तैनात भारत के जांबाज और मुस्तैद सैनिकों ने मुंह तोड़ जवाब देकर विफल कर दिया

भारत के इस दुर्गम इलाके में चीनी सैनिकों को शायद अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि अचानक से इतनी बड़ी संख्या मैं भारतीय सैनिकों की मौजूदगी होगी बॉर्डर इलाके पर पीएलए द्वारा बदलाव के प्रयास को भारतीय सैनिकों ने विफल तो कर दिया लेकिन विपक्ष और मीडिया के मन में कुछ तथ्य भी प्रश्नगत थे जिस पर बयान देते हुए मौजूदा सत्र में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन को बताया कि किस प्रकार एक छोटे सैनिक संघर्ष के बाद भारतीय सैनिकों से मुंह की खाने के बाद पीएलए वापस हो गई और भारतीय सैनिक यथास्थिति को कायम रखे हुए हैं जिसमें हमारे 6 सैनिक भी घायल हुए थे जिनका उपचार गुवाहाटी की बेस कमांड हॉस्पिटल में चल रहा है लेकिन राजनाथ सिंह के इस बयान को विपक्ष अपने तरीके से रेखांकित कर रहा है और चर्चा कराने की मांग को लेकर दोनों सदनों से वाकआउट भी किया है

लेकिन इन सबके बावजूद तवांग इलाके में हुए सैनिक संघर्ष पर भारत को अमेरिका का साथ मिला है चीन की कुटिल साजिश के खिलाफ अमेरिका खुलकर भारत के साथ खड़ा हो गया अमेरिका ने कहा है कि चीन जानबूझकर उकसावे की कार्रवाई कर रहा है साथ ही भारत-चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की तरफ से मौजूदा स्थिति में एकतरफा बदलाव के प्रयासों को विफल करने के लिए भारतीय सैनिकों की कार्यवाही का समर्थन किया है

अमेरिका के विदेश विभाग के प्रवक्ता नड प्राइस कहां है कि तवांग संवेदनशील इलाका है हम इस मसले को लेकर दूतावास और विदेश विभाग के जरिए भारत के साथ संपर्क बनाए हुए हैं चीन की उकसावे की कार्रवाई का अमेरिका निंदा करता है भारत और चीन को द्विपक्षीय वार्ता के जरिए विवादित सीमाओं की मसले को सुलझाने का प्रयास करना चाहिए जबकि पेंटागन के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल पेट राइडर ने कहा है कि तवांग में जो हुआ वह चीन को आईना दिखाने जैसा है अमेरिका हर हाल में पूरी तरह से भारत के साथ है भारत स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए जो कुछ भी कर रहा है वह तारीफ के काबिल है अमेरिका भारत के कदमों का समर्थन करता है अमेरिका अपने साझेदारों की सुरक्षा के लिए प्रतिबंध है वही व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कैरी जीन पियरे ने कहा है कि अमेरिका को खुशी है कि चीनी सैनिकों को अपनी गलती का जल्द एहसास हो गया और भी पीछे हट गए उन्होंने कहा है कि झड़प के बाद दोनों देशों के बीच कमांडर स्तर की वार्ता होना अच्छा संकेत है

आपको बताते चलें इससे पूर्व बी लद्दाख क्षेत्र के गलवान इलाके में चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की कोशिश की थी जिसमें भारत सैनिकों के साथ हुए खूनी संघर्ष में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे लेकिन इससे कहीं ज्यादा चीन ने अपने सैनिकों की जान गवाई थी जिसको भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान से समझा जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा था कि हमारी 20 बहादुर सैनिक मारते मारते शहीद हुए हैं उस समय भी अमेरिका की एजेंसियों ने भारतीय सैनिकों की बहादुरी को प्रमाणित किया था लेकिन इन सब चीजों से इधर भारत के सदन में मौजूद कुछ ऐसी भी लोग हैं जो भारत सरकार से सेना के द्वारा किए गए जाबाजी के प्रमाण पत्र मांगते हैं चाहे वह सर्जिकल स्ट्राइक या फिर एयर स्ट्राइकl

अरुणाचल प्रदेश के तवांग जैसे दुर्गम इलाकों में हुए घुसपैठ के इरादों को नाकाम करने पर दिए गए भारत सरका के रक्षा मंत्री के बयान को विपक्ष द्वारा रेखांकित करना एक लोकतांत्रिक अधिकार  है तो सीमा सुरक्षा सड़क निर्माण संगठन द्वारा बिछाई गई सड़क निर्माण के दुर्गम इलाकों तक जाल को समझना और उस पर अपना राजनीतिक समर्थन देना राष्ट्र की सुरक्षा की खातिर कर्तव्य भी है सरकार के बुलंद इरादों को भापते हुए सीमा सुरक्षा सड़क निर्माण संगठन द्वारा भारत के दुर्गम इलाकों तक सड़क बिछाना इस प्रकार की कुटिल पड़ोसियों के मंसूबों को विफल करने में भारतीय फौज के लिए सहायक सिद्ध होगा और शायद यही वजह थी जब नो मेस लैंड पर एल ई सी के पास प्रतिबंधित क्षेत्र में चीनी फौजियों की मोमेंट को देखा गया तत्काल प्रभाव से भारतीय सैनिकों की भी मौजूदगी हो सकी थी


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