: उत्तर प्रदेश उपचुनाव में लोकतंत्र की सार्थकता
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Fri, Dec 9, 2022
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर जिस प्रकार उत्तर प्रदेश उपचुनाव मैनपुरी खतौली रामपुर मैं जीते हुए प्रत्याशियों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर बधाई दी है वह निश्चित रूप से प्रशंसनीय है मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव में डिंपल यादव ने रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की वही रामपुर विधानसभा मैं आकाश सक्सेना ने प्रथम बार केसरिया लहराया तथा खतौली की सीट आरएलडी प्रत्याशी मदन भैया के नाम हुई इन सभी को बहुत-बहुत बधाई
यदि हम इस उपचुनाव का विश्लेषण करें तुम मैनपुरी की जीत पर हमें यह याद रखना होगा कि मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र का मैनडेंट अपनी जनप्रिय लोकनायक राष्ट्रीय दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि स्वरुप गया मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र के लोगों ने जाति धर्म भावना तथा दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अपने क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले राष्ट्रीय किंतु जमीनी राजनेता के प्रति भावनात्मक रूप से वोट किया यही कारण है कि आज सपा प्रत्याशी डिंपल यादव ने रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की और सत्ताधारी दल के प्रत्याशी के लिए सरकार की सुशासन कानून व्यवस्था तथा जनहितकारी नीतियां भी काम में ना आ सकीl
वैसे इस उपचुनाव का हम विश्लेषण करें तो एक बात तो साफ नजर आती है कि चुनाव के बाद और परिणाम आने से पहले मैनपुरी खतौली एवं रामपुर सीट को लेकर प्रत्याशियों और उनके राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा शासन और सरकार पर बहुत टीका टिप्पणी हुई व्यवस्था को लेकर बहुत आरोप-प्रत्यारोप लगाई गई और तो और ईवीएम बदलने का भी सनसनीखेज ड्रामा फैलाया गया चुनाव आयोग तक शिकायत किए जाने की बात तमाम राजनीतिक दलों द्वारा प्रचारित की गई लेकिन अब जब परिणाम उनके पक्ष में आया तो चारों तरफ शांति कहीं कोई राजनीतिक नौटंकी या बयान बाजी नहीं आई शिवाय रामपुर विधानसभा सीट से हारे हुए सपा प्रत्याशी आसिफ रजा के अलावा!l उन्होंने रामपुर प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया है तो क्या इन सब आरोपों और राजनीतिक बयानबाजी के माध्यम से विपक्ष अपने लिए एक सुरक्षित पैसेज तैयार करता है की हारने के बाद हारने का ठीकरा स्थानीय प्रशासन और चुनाव आयोग के ऊपर फोड़ देंगे मुद्दे चाहे जो हो उनकी सफाई में दिए जाने वाले बयान भी आ सकते हैं लेकिन यह बात उठना तो लाजमी है कि जब जब जहां जहां भाजपा जीती है उस पर पक्षपातपूर्ण स्थानीय प्रशासन पर दोषपूर्ण करवाइए का चुनाव आयोग की खामियों के आरोप लगते आए हैं हमें याद रखना होगा कि चुनाव में हार जीत तो चलती रहती है लेकिन राजनीति में कोई ऐसी बयानबाजी नहीं होनी चाहिए जिसका असर हमारे व्यवस्था यह संवैधानिक संस्थाओं पर जाता हूं आज इन चुनाव के परिणाम के बाद यह बात और पुख्ता हो गई है कि इस लोकतंत्र की मर्यादा को कोई प्रभावित नहीं कर सकता चाहे विपक्ष हो या सत्ताधारी दल हो इतना खुला मैंडेट और स्पष्ट परिणाम उत्तर प्रदेश में यही कहानी बयां करते हैं राजनीतिक दलों को स्थानीय प्रशासन के ऊपर चुनाव आयोग पर उंगली उठाने से पहले अपने जीवन में झांक कर देखना होगा कि आखिर हम कहां पर खड़े हैं
यदि हम इस उपचुनाव का विश्लेषण करें तुम मैनपुरी की जीत पर हमें यह याद रखना होगा कि मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र का मैनडेंट अपनी जनप्रिय लोकनायक राष्ट्रीय दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि स्वरुप गया मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र के लोगों ने जाति धर्म भावना तथा दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अपने क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले राष्ट्रीय किंतु जमीनी राजनेता के प्रति भावनात्मक रूप से वोट किया यही कारण है कि आज सपा प्रत्याशी डिंपल यादव ने रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की और सत्ताधारी दल के प्रत्याशी के लिए सरकार की सुशासन कानून व्यवस्था तथा जनहितकारी नीतियां भी काम में ना आ सकीl
वैसे इस उपचुनाव का हम विश्लेषण करें तो एक बात तो साफ नजर आती है कि चुनाव के बाद और परिणाम आने से पहले मैनपुरी खतौली एवं रामपुर सीट को लेकर प्रत्याशियों और उनके राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा शासन और सरकार पर बहुत टीका टिप्पणी हुई व्यवस्था को लेकर बहुत आरोप-प्रत्यारोप लगाई गई और तो और ईवीएम बदलने का भी सनसनीखेज ड्रामा फैलाया गया चुनाव आयोग तक शिकायत किए जाने की बात तमाम राजनीतिक दलों द्वारा प्रचारित की गई लेकिन अब जब परिणाम उनके पक्ष में आया तो चारों तरफ शांति कहीं कोई राजनीतिक नौटंकी या बयान बाजी नहीं आई शिवाय रामपुर विधानसभा सीट से हारे हुए सपा प्रत्याशी आसिफ रजा के अलावा!l उन्होंने रामपुर प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया है तो क्या इन सब आरोपों और राजनीतिक बयानबाजी के माध्यम से विपक्ष अपने लिए एक सुरक्षित पैसेज तैयार करता है की हारने के बाद हारने का ठीकरा स्थानीय प्रशासन और चुनाव आयोग के ऊपर फोड़ देंगे मुद्दे चाहे जो हो उनकी सफाई में दिए जाने वाले बयान भी आ सकते हैं लेकिन यह बात उठना तो लाजमी है कि जब जब जहां जहां भाजपा जीती है उस पर पक्षपातपूर्ण स्थानीय प्रशासन पर दोषपूर्ण करवाइए का चुनाव आयोग की खामियों के आरोप लगते आए हैं हमें याद रखना होगा कि चुनाव में हार जीत तो चलती रहती है लेकिन राजनीति में कोई ऐसी बयानबाजी नहीं होनी चाहिए जिसका असर हमारे व्यवस्था यह संवैधानिक संस्थाओं पर जाता हूं आज इन चुनाव के परिणाम के बाद यह बात और पुख्ता हो गई है कि इस लोकतंत्र की मर्यादा को कोई प्रभावित नहीं कर सकता चाहे विपक्ष हो या सत्ताधारी दल हो इतना खुला मैंडेट और स्पष्ट परिणाम उत्तर प्रदेश में यही कहानी बयां करते हैं राजनीतिक दलों को स्थानीय प्रशासन के ऊपर चुनाव आयोग पर उंगली उठाने से पहले अपने जीवन में झांक कर देखना होगा कि आखिर हम कहां पर खड़े हैं
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