: आकाश में दिखाई दिया दुर्लभ संयोग, शुक्र तारा चंद्रमा के पीछे हुआ गायब
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Sat, Mar 25, 2023
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नई दिल्ली शुक्र और बृहस्पति के दुर्लभ संयोजन के कुछ दिनों बाद, हमारे सौर मंडल का सबसे चमकीला ग्रह चंद्रमा के करीब आ गया और आसमान में यह संयोग बेहद ही स्पष्ट रूप में दुनिया ने देखा। शुक्रवार की शाम को चैत्र शुक्ल तृतीया के चांद की खूबसूरती पर हर कोई रिझ गया। चांद के ठीक नीचे चमकीला तारा देखा गया। चांद के बिल्कुल करीब तारे जैसी रोशनी इसे और भी खूबसूरत बना दिया।
इस दुर्लभ संयोग में आकाशीय पिंड एक-दूसरे के बेहद करीब आ गए। ऐसा लगा मानो दो वस्तुएँ एक साथ संरेखित दृष्टि की एक ही रेखा में आ गई हों। शुक्र धीरे-धीरे चंद्रमा के अंधेरे किनारे के पीछे गायब हो गया। जबकि शुक्र शाम के आकाश में सबसे चमकीली वस्तुओं में से एक है। इस दौरान पृथ्वी के एकमात्र उपग्रह चंद्रमा की चमक भी लगभग 250 गुना बढ़ गई।
एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी इंडिया आउटरीच एंड एजुकेशन ने एक ट्वीट में कहा, "आज शुक्र और चंद्रमा एक संयोजन के रूप में ज्ञात एक घटना में शामिल होंगे जब वे ग्रह से एक पर्यवेक्षक के लिए एक दूसरे के बहुत करीब आने के लिए" प्रकट "होंगे। असल में, वे दृष्टि की एक ही रेखा के साथ होंगे (लेकिन फिर भी एक दूसरे से बहुत दू।"
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समय और तिथि के अनुसार, बढ़ता हुआ चंद्रमा तब शुरू होता है जब चंद्रमा अमावस्या के बाद फिर से दिखाई देता है जब सूर्य और पृथ्वी चंद्रमा के विपरीत दिशा में होते हैं। इस माह केवल शुक्र ही नहीं होगा जो शाम के आकाश में दिखाई। बल्कि मार्च के अंत में आसमान में पांच ग्रहों का संयोजन भी पृथ्वी से आकाश में देखा जाएगा। पृथ्वी के विषुव में प्रवेश करते ही 25 मार्च से 30 मार्च के बीच पांच ग्रहों को संरेखित करने के लिए निर्धारित किया गया है। इन पांच ग्रहों में बृहस्पति, बुध, शुक्र, यूरेनस और मंगल ग्रहों की एक दुर्लभ संयोग आकाश में दिखेगा। पंचग्रहों के इस संयोग को आप उन्हें 28 मार्च को सबसे साफ देख सकेंगे।
https://twitter.com/PhilippineStar/status/1639256175219998720?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1639256175219998720%7Ctwgr%5E79fa9eea3beccd423aae697143d9febfab41f91c%7Ctwcon%5Es1_c10&ref_url=http%3A%2F%2Fapi-news.dailyhunt.in%2F
वहीं, चंद्रमा 3 लाख 79 हजार किलोमीटर दूर था। दूर रहते हुए भी शुक्र की 10 फीसदी चमक थी। इतना बड़ा अंतर होते हुए भी इनका कोण पृथ्वी से देखने पर इस प्रकार था कि एक साथ नजर आ रहे थे।
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