: जेल में बंद रहते उम्मीदवारों ने फहराया जीत का परचम
Wed, Jun 5, 2024
नई दिल्ली 5 जून लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे सामने आने शुरू हो गए हैं। इन नतीजों में जो सबसे हैरान कर देने वाली बात थी वह ये कि कुछ उम्मीदवार जेल में रहते हुए भी सांसद का चुनाव जीत चुके हैं। इनमें दो लोगों का नाम है जिनके चुनाव परिणामों ने सबको चौंका दिया।
पहला नाम राशिद शेख का है जिसने जम्मू-कश्मीर में दो-दो बार के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला को हरा दिया। वहीं, दूसरा नाम कट्टर खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल सिंह का है।
सबसे पहले बात कर लेते हैं जम्मू-कश्मीर के बारामूला सीट पर दमदार जीत हासिल करने वाले उम्मीदवार राशिद शेख की। राशिद शेख उर्फ इंजीनियर राशीद ने बारामूला सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था। इस सीट पर उन्हें कुल 4 लाख 69 हजार 574 वोट मिले हैं। राशिद ने अपने प्रतिद्वंदी उमर अबदुल्ला को 2 लाख 32 हजार 73 वोटों से हराया है। इस चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अबदुल्ला को 2 लाख 66 हजार 301 वोट मिले हैं। उमर अबदुल्ला ने अपनी हार स्वीकार कर ली है। बता दें कि राशिद शेख उर्फ इंजीनियर राशीद फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है और वह जेल में रहते हुए चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। चुनाव में जीतने वाले राशिद पर टेरर फंडिंग लेने का आरोप है। उस पर UAPA एक्ट के
तहत गंभीर आरोप लगे हुए हैं। राशिद शेख के जेल में रहते हुए उसके दोनों बेटों ने चुनाव प्रचार की कमान संभाली थी।
खडूर साहिब से जीता अमृतपाल सिंह
अब बात कर लेते हैं जेल में बंद रहते दूसरे उम्मीदवार के जीतने की। इस उम्मीदवार ने पंजाब के खडूर साहिब लोकसभा सीट से जीत हासिल की है। यह उम्मीदवार कट्टरपंथी सीख उपदेशक और खालिस्तानी समर्थक 'वारिस पंजाब दे' का प्रमुख अमृतपाल सिंह है। अमृतपाल सिंह खडूर साहिब लोकसभा सीट से करीब 1 लाख 90 हजार वोटों से आगे चल रहा है। अमृतपाल सिंह ने भी यह चुनाव निर्दलीय लड़ा था। फिलहाल वह असम के जेल में बंद है। अमृतपाल को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था। जेल में रहते हुए अमृतपाल सिंह ने बड़ी जीत हासिल की है।
: भाजपा का उत्तर प्रदेश में खेल खराब 33 पर सिमटी क्या स्टार प्रचारकों की अनदेखी करना है वजह
Tue, Jun 4, 2024
लखनऊ चार जून लोकसभा चुनाव के नतीजों में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में भगवा दल की सीटें कम हुई हैं। दोपहर 12 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, सबसे बड़ा सियासी उलटफेर यूपी में दिख रहा, जहां पर सपा और कांग्रेस वाले इंडिया गठबंधन ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है।सपा 35, कांग्रेस आठ सीटों पर आगे चल रही है, जबकि बीजेपी को बंपर नुकसान होते हुए महज 34 सीटों पर ही बढ़त हासिल है। बड़ी संख्या में सीटें घटने की वजह से बीजेपी 272 का बहुमत का आंकड़ा भी पार करती नहीं दिख रही। हालांकि, एनडीए गठबंधन जरूर सरकार बनाता दिख रहा है। यूपी में बीजेपी के बड़े सियासी उलटफेर के पीछे कई वजहें दिखाई दे रही हैं। आम चुनाव के दौरान सपा और कांग्रेस ने जिस तरह से संविधान, आरक्षण, बेरोजगारी जैसे मुद्दे उठाए, नतीजों से साफ लग रहा है कि जमीन पर यह सब काम कर गया। वहीं, बीजेपी जिस राम मंदिर मुद्दे के सहारे देशभर में 400 पार की उम्मीद लगाए बैठी थी, वो यूपी में भी काम नहीं कर सका।
चुनाव में खूब उछला संविधान और आरक्षण का मुद्दा
यूपी में बीजेपी की जमीन खिसकने और सपा व कांग्रेस के इंडिया गठबंधन की सीटें बढ़ने के पीछे राहुल गांधी, अखिलेश यादव के वादे भी हैं। दोनों नेता हर चुनावी रैली में दावा करते रहे कि यदि मोदी सरकार 400 से ज्यादा सीटें जीतती है तो संविधान में बदलाव करके आरक्षण को हटा दिया जाएगा। इसके साथ ही, राहुल गांधी ने जितनी आबादी उतना हक का नारा देकर पिछड़ों को अपने और सपा के साथ जोड़ लिया। अखिलेश का पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूला भी काम कर गया और पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक समुदाय का वोट इंडिया गठबंधन की ओर चला गया। पिछले लोकसभा चुनाव में बसपा का वोटबैंक ने मायावती के उम्मीदवारों की बजाए सपा और कांग्रेस के कैंडिडेट्स को जमकर वोट दिया।
महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दों ने बिगाड़ा बीजेपी का खेल
पिछले एक दशक में कांग्रेस समेत समूचा विपक्ष बीजेपी सरकार पर महंगाई बढ़ाने का आरोप लगाता रहा। गैस सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल समेत रोजमर्रा की जरूरतों के सामान की बढ़ती कीमतों के जरिए भी बीते दस सालों में विपक्ष ने मोदी सरकार को जमकर घेरा है। इस चुनाव में प्रचार के दौरान भी राहुल गांधी, अखिलेश यादव समेत इंडिया गठबंधन के नेताओं ने महंगाई का मुद्दा पूरे जोर-शोर से उठाया, जिसका असर आज आए चुनावी नतीजों में भी दिखाई दिया। वहीं, विपक्षी नेता बेरोजगारी बढ़ने का भी दावा करते रहे और कांग्रेस ने अपने मेनिफेस्टो में सरकार बनने पर 30 लाख नौकरियों का वादा कर दिया। नतीजों को देखकर लगता है कि उनका यह वादा
महिलाओं को लुभा गया एक लाख का वादा
कांग्रेस ने इस बार अपने मेनिफेस्टो में कई अहम वादे किए। इसमें से एक वादा गरीब महिलाओं को हर महीने साढ़े आठ हजार रुपये और सालाना एक लाख रुपये देने का था। राहुल गांधी हर रैली में यह वादा दोहराते नजर आए, जिससे दूर-दराज गांवों में रह रहे परिवारों तक यह पहुंच गया। मंच से राहुल द्वारा कहे गए खटाखट जैसे नारों ने भी लोगों का काफी ध्यान आकर्षित किया और लोगों के दिमाग में एक लाख रुपये हर साल दिए जाने की बात बैठ गई। यह सब मुद्दे और वादे आखिरकार इंडिया गठबंधन के पक्ष में गए और सपा व कांग्रेस, दोनों की ही सीटों पर काफी फायदा हुआ।
: भाजपा की अयोध्या से भी राम-राम अगल-बगल की सीट भी फसी
Tue, Jun 4, 2024
लखनऊ 4 जून लोकसभा चुनाव में भाजपा का भगवा दुर्ग ढह गया और अयोध्या सपा की हो गई। इंडिया गठबंधन के सपा उम्मीदवार अवधेश प्रसाद ने भाजपा के लल्लू सिंह को 56,934 वोटों से हराकर यहां की फैजाबाद संसदीय सीट पर कब्जा कर लिया। बसपा प्रत्याशी सच्चिदानंद पांडेय और भाकपा के अरविंद सेन यादव अपनी जमानत भी नहीं बचा सके।यूपी में भाजपा अपनी उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सकी। पिछली बार 62 सीटें जीतने वाली भाजपा इस बार 33 पर सिमट गई। सेंट्रल यूपी में उसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा।भाजपा ने राममंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा और निर्माण को जिस तरह से जनता से बीच उठाया, उसका फायदा उसे नहीं मिला। राममंदिर के इर्द-गिर्द की सभी लोकसभा सीटें भाजपा हार गई। अयोध्या मंडल में उसका रिपोर्ट कार्ड ''जीरो'' रहा। इतना ही नहीं वर्ष 2019 के चुनाव में भाजपा ने मध्य यूपी की 24 में से 22 सीटें जीती थीं। लेकिन, इस बार उसे इस क्षेत्र में 13 सीटों का नुकसान हुआ। वहीं, कांग्रेस को 3 और सपा को 11 सीटों का फायदा हुआ।अयोध्या मंडल की फैजाबाद सीट भी भाजपा नहीं बचा सकी। सपा ने अयोध्या में दलित प्रत्याशी व पूर्व मंत्री अवधेश प्रसाद को उतारा, जिन्होंने भाजपा के लल्लू सिंह को 50 हजार से ज्यादा मतों से पराजित किया। इस मंडल की सबसे चर्चित सीट अमेठी में भाजपा प्रत्याशी व कद्दावर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी कांग्रेस के केएल शर्मा के सामने कहीं भी नहीं टिक सकीं। बाराबंकी में कांग्रेस के तनुज पुनिया ने दो लाख से ज्यादा मतों से भाजपा प्रत्याशी राजरानी रावत को हराकर साबित कर दिया कि मंदिर से उपजी किसी तरह की लहर यहां तक नहीं पहुंच सकी। अयोध्या मंडल के अम्बेडकरनगर क्षेत्र में पिछली बार बसपा के टिकट पर सांसद चुने गए रितेश पांडे पर भाजपा ने इस बार दांव लगाया था। उसका यह दांव भी फ्लॉप साबित हुआ। सपा के लालजी वर्मा ने उन पर बढ़त ली।