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लाल किले की प्राचीर से विकसित भारत का संकल्प: : 80वें स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी ने देश को दिखाई नई दिशा

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Sat, Aug 15, 2026
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नई दिल्ली | 15 अगस्त 2026 | विशेष फीचर

भारत ने आज अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस पूरे देश में राष्ट्रभक्ति, गौरव और संकल्प के साथ मनाया। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर पर आयोजित मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और देशवासियों को संबोधित करते हुए वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प दोहराया। इस वर्ष के समारोह की विशेष थीम “Yuva Shakti for Viksit Bharat@2047” रही, जबकि ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का अवसर भी समारोह को ऐतिहासिक बना रहा।

तिरंगे के साथ गूंजा राष्ट्रगान और 21 तोपों की सलामी

प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले की प्राचीर पर पहुंचने से पहले स्वतंत्रता संग्राम के वीरों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। तिरंगा फहराए जाने के साथ ही स्वदेशी 105 मिमी लाइट फील्ड गनों से लैस 1721 फील्ड बैटरी (सेरेमोनियल) द्वारा 21 तोपों की सलामी दी गई। वायुसेना के दो Mi-17 हेलीकॉप्टरों ने भी समारोह के दौरान पुष्पवर्षा की।

इस वर्ष समारोह में एक विशेष ऐतिहासिक क्षण तब आया जब लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन हुआ। रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह आयोजन स्वतंत्रता दिवस समारोह की परंपरा में एक महत्वपूर्ण नया अध्याय रहा। समारोह में सेना, नौसेना, वायुसेना और दिल्ली पुलिस के जवानों की संयुक्त उपस्थिति ने राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा की भावना को और मजबूत किया।

प्रधानमंत्री के संबोधन में आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत का रोडमैप

लगभग 75 मिनट के अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की विकास यात्रा, आत्मनिर्भरता, युवा शक्ति, तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा, विनिर्माण और राष्ट्रीय सुरक्षा सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य केवल सरकार का नहीं, बल्कि 140 करोड़ से अधिक भारतीयों के सामूहिक संकल्प का विषय है।

प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत पर विशेष जोर देते हुए कहा कि देश को अपनी क्षमताओं को मजबूत करना होगा और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दूसरों पर निर्भरता कम करनी होगी। उन्होंने आने वाले वर्षों में तेज गति से सुधार और विकास की आवश्यकता पर बल दिया।

युवाओं के लिए बड़े ऐलान

इस बार प्रधानमंत्री के भाषण का एक बड़ा केंद्र देश की युवा शक्ति रही। उन्होंने अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को AI प्रशिक्षण देने तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग जैसी पहलों की घोषणा की। इसके साथ ही बच्चों में खेल प्रतिभा तलाशने, नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और तकनीकी क्षेत्र में भारत की क्षमता बढ़ाने से जुड़े ऐलान भी किए गए।

प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर निर्माण और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी महत्वाकांक्षी लक्ष्यों का उल्लेख किया। ऊर्जा सुरक्षा को उन्होंने भारत की दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण आधार बताया।

‘सप्त धारा’ के जरिए विकास की नई सोच

प्रधानमंत्री के संबोधन में ‘सप्त धारा’ यानी विकास की सात धाराओं की अवधारणा भी प्रमुख रही। इसके माध्यम से उन्होंने भारत के भविष्य के लिए व्यापक विकास दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, जिसमें आर्थिक प्रगति, तकनीक, ऊर्जा, उत्पादन, युवाओं की क्षमता, सामाजिक विकास और राष्ट्रीय शक्ति जैसे क्षेत्रों को महत्व दिया गया।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत को अपनी प्रतिभा, संसाधनों और तकनीकी क्षमता पर विश्वास करते हुए दुनिया में अपनी मजबूत भूमिका निभानी होगी।

लाल किले पर देश के शीर्ष नेतृत्व की गरिमामयी उपस्थिति

स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में देश के वरिष्ठ संवैधानिक पदाधिकारियों, केंद्रीय मंत्रियों और सैन्य नेतृत्व की उपस्थिति रही। समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा अन्य केंद्रीय मंत्री मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री के लाल किले पहुंचने पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन और थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने उनका स्वागत किया।

सेना, नौसेना, वायुसेना और दिल्ली पुलिस के संयुक्त गार्ड ऑफ ऑनर ने भी समारोह की गरिमा बढ़ाई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में NCC कैडेट और MY Bharat स्वयंसेवक भी शामिल हुए। कुल 2,500 कैडेट और स्वयंसेवकों ने समारोह में भाग लिया और ‘वंदे मातरम्’ की आकृति बनाकर देशभक्ति का संदेश दिया।

स्कूली बच्चों से मिले प्रधानमंत्री, दिखा भावुक दृश्य

प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद लाल किले पर एक भावुक और आत्मीय दृश्य भी देखने को मिला। तिरंगे के रंगों में सजे स्कूली बच्चे प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के लिए आगे आए। प्रधानमंत्री ने बच्चों से हाथ मिलाया और उनसे बातचीत की। यह दृश्य समारोह के औपचारिक वातावरण के बीच देश के भविष्य यानी बच्चों और युवाओं के प्रति प्रधानमंत्री के संदेश को भी रेखांकित करता नजर आया।

स्वतंत्रता से विकसित भारत तक—एक लंबी यात्रा

1947 में आजादी हासिल करने के बाद भारत ने लोकतंत्र, विज्ञान, तकनीक, कृषि, उद्योग, रक्षा और अंतरिक्ष सहित अनेक क्षेत्रों में लंबी यात्रा तय की है। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री का संदेश इसी यात्रा को अगले पड़ाव तक ले जाने का आह्वान रहा।

2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने jरत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य आज के समारोह का केंद्रीय संदेश रहा। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से केवल उपलब्धियों पर संतोष न करने, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें पूरा करने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।

राष्ट्र के नाम संदेश में एकता, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी का भाव

इस पूरे समारोह का सार केवल तिरंगा फहराने और स्वतंत्रता दिवस मनाने तक सीमित नहीं रहा। लाल किले से दिया गया संदेश देश की आगामी दिशा से भी जुड़ा रहा—आत्मनिर्भरता, युवा शक्ति, तकनीकी क्षमता, ऊर्जा सुरक्षा, राष्ट्रीय एकता और विकसित भारत का निर्माण।

स्वतंत्रता हमें केवल अधिकार नहीं देती, बल्कि राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों का भी बोध कराती है। आज का दिन उन अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों को याद करने का अवसर है, जिन्होंने अपने त्याग और बलिदान से भारत की आजादी का मार्ग प्रशस्त किया।

80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से उठी आवाज का सार यही रहा—भारत अपने अतीत के गौरव को साथ लेकर भविष्य के बड़े सपनों की ओर बढ़ रहा है।

जय हिन्द!

वंदे मातरम्!

— विशेष फीचर | Mediawithyou न्यूज़ पोर्टल

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