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CAG रिपोर्ट 2025 : उत्तर प्रदेश में स्किल इंडिया योजना—कौशल से ज़्यादा ‘खेल’, रोज़गार से ज़्यादा प्रचार लखनऊ।

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Tue, Dec 23, 2025
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प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी Skill India Mission का ज़मीनी क्रियान्वयन उत्तर प्रदेश में गंभीर सवालों के घेरे में है। CAG की 2025 की ऑडिट रिपोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के स्किल डेवलपमेंट विभाग और उससे जुड़ी योजनाओं में प्रशासनिक लापरवाही, कमजोर निगरानी और सरकारी धन के अप्रभावी उपयोग की ओर इशारा किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कौशल विकास के नाम पर योजनाएँ तो चलीं, लेकिन न तो उनका वास्तविक मूल्यांकन हुआ और न ही स्थायी रोज़गार सुनिश्चित किया जा सका। काग़ज़ों में कौशल, ज़मीनी हकीकत में भ्रम उत्तर प्रदेश में कौशल विकास योजनाओं के तहत हज़ारों प्रशिक्षण केंद्रों को मान्यता दी गई। लेकिन ऑडिट में सामने आया कि: कई प्रशिक्षण केंद्रों की भौतिक मौजूदगी संदिग्ध थी।

प्रशिक्षण की अवधि, गुणवत्ता और प्रशिक्षकों की योग्यता का समुचित सत्यापन नहीं हुआ। उपस्थिति और लाभार्थी डेटा में गड़बड़ियाँ पाई गईं, जिससे फर्जी या अप्रमाणित प्रशिक्षण की आशंका बढ़ी। CAG की टिप्पणी साफ़ है—योजना का फोकस युवाओं को सक्षम बनाने से ज़्यादा लक्ष्य-पूर्ति और आँकड़ों की बाज़ीगरी पर रहा। रोज़गार के नाम पर 8 से 12 हज़ार की नौकरी और सरकारी पीठ-थपथपाहट रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जिन युवाओं को “रोज़गार प्राप्त” बताया गया: उनमें से बड़ी संख्या को ₹8,000 से ₹12,000 प्रतिमाह की अस्थायी या अल्पकालिक नौकरियाँ मिलीं।

इन नौकरियों में कोई सामाजिक सुरक्षा, स्थायित्व या कौशल-उन्नयन का रास्ता नहीं था। इसके बावजूद, विभागीय स्तर पर रोज़गार सृजन के बड़े-बड़े दावे किए गए और योजनाओं की सफलता का श्रेय लिया गया। CAG का संकेत है कि रोज़गार की गुणवत्ता को नज़रअंदाज़ कर केवल संख्या पर ज़ोर दिया गया। ट्रेनिंग के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग ऑडिट में यह भी पाया गया कि: प्रशिक्षण लागत और वास्तविक आउटपुट के बीच भारी अंतर है। कई मामलों में ट्रेनिंग पूरी हुए बिना भुगतान कर दिया गया। थर्ड-पार्टी मूल्यांकन या तो हुआ ही नहीं या केवल औपचारिकता निभाई गई। यह स्थिति दर्शाती है कि सरकारी धन का उपयोग परिणाम-आधारित न होकर प्रक्रिया-आधारित रहा, जिससे बर्बादी की संभावना बढ़ी।

विभाग और मंत्रियों की भूमिका पर सवाल CAG रिपोर्ट सीधे किसी मंत्री का नाम नहीं लेती, लेकिन यह स्पष्ट करती है कि: नीति निर्धारण और निगरानी में राजनीतिक-प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी रही। प्रदर्शनियों एवं रोजगार मेला के नाम पर डंका ज्यादा पीटा गया जबकि धरातल पर काम अपेक्षाकृत नहीं हुआ विभागीय स्तर पर उत्तरदायित्व तय नहीं किया गया—किस अधिकारी/एजेंसी ने क्या चूक की, इसका रिकॉर्ड अस्पष्ट है। योजनाओं की समीक्षा और सुधार के लिए मंत्रालयी स्तर पर प्रभावी हस्तक्षेप नहीं दिखा। राजनीतिक मंचों से कौशल विकास को “युवाओं का भविष्य” बताया गया, लेकिन विभागीय कामकाज उस दावे के अनुरूप नहीं दिखा। युवाओं के साथ सबसे बड़ा नुकसान सबसे बड़ा नुकसान उन लाखों बेरोज़गार युवाओं का हुआ: जिन्हें कौशल नहीं, सिर्फ़ प्रमाणपत्र मिला जिनकी उम्मीदें ट्रेनिंग के बाद भी अधूरी रहीं और जो सरकारी दावों के बावजूद स्थायी रोज़गार से दूर रहे CAG के अनुसार, यदि निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही होती, तो यही धन युवाओं के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सकता था। निष्कर्ष CAG रिपोर्ट 2025 यह संकेत देती है कि उत्तर प्रदेश में Skill India / कौशल विकास योजना अपने मूल उद्देश्य से भटक गई।

यह योजना: कौशल निर्माण से ज़्यादा आंकड़ों का खेल बन गई रोज़गार से ज़्यादा प्रचार का माध्यम बन गई और युवाओं के भविष्य से ज़्यादा विभागीय उपलब्धियों की फाइल भरने का ज़रिया बन गई अब सवाल यह नहीं कि योजना थी या नहीं, सवाल यह है कि क्या उत्तर प्रदेश सरकार और उसका स्किल डेवलपमेंट विभाग इस रिपोर्ट के बाद जवाबदेही तय करेगा, या कौशल के नाम पर यह खेल यूँ ही चलता रहेगा?

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