CAG रिपोर्ट के बाद बड़ा सवाल : क्या उत्तर प्रदेश में टाटा समूह का CSR फंड भी स्किल डेवलपमेंट विभाग की लापरवाही एवं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ेगा?
Media With You
Tue, Dec 23, 2025
लखनऊ।
देश के प्रतिष्ठित औद्योगिक घरानों में शामिल टाटा समूह ने बीते वर्षों में उत्तर प्रदेश सरकार को हज़ारों करोड़ रुपये का CSR (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड उपलब्ध कराया है। इस धन का बड़ा हिस्सा Skill India Mission के तहत नए ITI कॉलेजों, ट्रेनिंग सेंटर्स और कौशल अवसंरचना (Infrastructure) के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के कौशल विकास एवं व्यावसायिक शिक्षा विभाग को आवंटित किया गया।
लेकिन अब जब CAG रिपोर्ट 2025 सामने आ चुकी है और उसमें कौशल विकास योजनाओं में लापरवाही, कमजोर निगरानी और अप्रभावी क्रियान्वयन की बात कही गई है, तो यह सवाल स्वाभाविक है—
👉 क्या उत्तर प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित कर पाएगी कि टाटा समूह का CSR फंड भी उसी सिस्टम का शिकार न हो जाए, जिस पर CAG ने सवाल उठाए हैं?
CSR फंड: अवसर या अगला जोखिम?
CSR फंड का मूल उद्देश्य होता है—
गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण
आधुनिक मशीनरी और लैब
उद्योग-आधारित स्किल
युवाओं के लिए स्थायी रोज़गार का रास्ता
लेकिन CAG रिपोर्ट यह संकेत देती है कि उत्तर प्रदेश में:
प्रशिक्षण केंद्रों की गुणवत्ता की निगरानी कमजोर रही
निर्माण और संचालन में जवाबदेही तय नहीं की गई
योजनाएँ अक्सर काग़ज़ी उपलब्धियों तक सीमित रहीं
ऐसे में सवाल यह नहीं है कि पैसा आया या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि—
❝ क्या वही प्रशासनिक ढांचा, जिस पर CAG ने उंगली उठाई है, CSR जैसे संवेदनशील फंड का भी सही उपयोग कर पाएगा? ❞
मंत्री कपिल देव अग्रवाल की भूमिका पर केंद्रित प्रश्न
उत्तर प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा एवं उद्यमशीलता मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल के अधीन:
नए ITI कॉलेज
प्रशिक्षण केंद्र
निजी-सार्वजनिक भागीदारी (PPP)
उद्योग सहयोग कार्यक्रम
जैसी योजनाएँ आती हैं।
CAG रिपोर्ट के बाद यह प्रश्न और गंभीर हो गया है कि—
क्या मंत्री के स्तर पर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की सीधी निगरानी की कोई ठोस व्यवस्था है?
क्या प्रशिक्षण केंद्रों के निर्माण में थर्ड पार्टी ऑडिट अनिवार्य किया गया है?
क्या CSR फंड के उपयोग के लिए अलग, पारदर्शी और सार्वजनिक डैशबोर्ड मौजूद है?
राजनीतिक आलोचकों का कहना है कि अब केवल उद्घाटन और शिलान्यास से काम नहीं चलेगा, बल्कि हर ईंट और हर मशीन की जवाबदेही तय करनी होगी।
मुख्यमंत्री के सामने निर्णायक चुनौती
CAG रिपोर्ट के बाद उत्तर प्रदेश के मुखिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि—
विभाग में पनप रही लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार
अधिकारियों और एजेंसियों की ढीली जवाबदेही
और योजनाओं के नाम पर होने वाला अनुत्पादक खर्च
👉 टाटा समूह जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से प्राप्त CSR फंड कहीं उसी सिस्टम की भेंट न चढ़ जाए, जिसे सुधारने के लिए यह फंड दिया गया है।
यदि समय रहते:
स्वतंत्र जांच
गुणवत्ता आधारित भुगतान
और जवाबदेही तय नहीं की गई
तो यह फंड भी भवन तो खड़े कर देगा, लेकिन कौशल नहीं—जैसा कि पहले की कई योजनाओं में देखा गया।
निष्कर्ष: चेतावनी या अवसर?
CAG रिपोर्ट 2025 को अगर चेतावनी माना जाए, तो टाटा समूह का CSR फंड उत्तर प्रदेश के लिए अंतिम अवसर भी हो सकता है—
कौशल विकास को वास्तव में उद्योग-उन्मुख बनाने का
युवाओं को प्रमाणपत्र नहीं, रोजगार देने का
और विभागीय कार्यशैली को पारदर्शी बनाने का
लेकिन अगर यही फंड भी पुरानी लापरवाही, भ्रष्टाचार और दिखावटी उपलब्धियों की भेंट चढ़ गया, तो यह केवल एक योजना की विफलता नहीं होगी—
👉 यह प्रदेश के युवाओं के भविष्य के साथ सबसे बड़ा धोखा होगा
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