: कोरोना का नया वैरीअंट चीन में मचा रहा है कोहराम डब्ल्यूएचओ का अलर्ट जारी भारत की चिंताएं बढ़ी
Fri, Dec 23, 2022
डब्ल्यूएचओ के अनुसार चीन की कोरोना वैक्सीन कम असर धारक सिद्ध हो रही है बगैर किसी बैकअप प्लान के जीरो को भी पॉलिसी लागू करना चीन के लिए घातक से हुआ है चीन में कॉविड के केस और उनसे जुड़े लॉकडाउन हमेशा से चलते रहे हैं जिसको की वहां की सरकार ने विश्व समुदाय से हमेशा छिपाने का प्रयास किया है लेकिन अब जबकि वहां की जनता खासतौर से युवा वर्ग मैं चीन की सरकार के प्रति खासी नाराजगी है ऐसे में चीन की सरकार के प्रति विरोध प्रदर्शनों में तेजी आई है और वहां की जनता भी सरकार की पॉलिसी की प्रति मुखर हुई है जिससे कि चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म विवो के माध्यम से विरोध प्रदर्शन तथा उनसे जुड़ी दमनकारी नीतियों की विषय में चीनी सरकार के इस प्रोपेगेंडा को विश्व समुदाय आसानी से समझ रहा है इसी विश्लेषण पर आधारित मीडिया विद यू की एक रिपोर्ट.......
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि चीन में कोरोना की नई लहर के कारण वहां के अस्पताल भरते जा रहे हैं लेकिन चीन की ओर से सटीक जानकारी नहीं दी जा रही है जिससे हालात का सही आंदाज़ा हो भले ही चीन के सरकारी आंकड़े कह रहे हों कि गुरुवार को वहां कोरोना से एक ही मौत नहीं हुई है लेकिन अमेरिकी न्यूज़ एजेंसी राइटर की एक रिपोर्ट कहती है कि "बीजिंग में कोरोना से हुई मौतों के लिए निर्धारित किए गए श्मशान घाट के सामने शवों की गाड़ियों की लंबी क़तार लगी हुई है."बीजिंग के तोंगज़ोऊ श्मशान के सामने रॉयटर्स के संवाददाता ने शवों वाली 40 गाड़ियों की लंबी क़तार देखी. इस श्मशान के एंट्री गेट पर सुरक्षाकर्मी तैनात थे
"श्मशान घाट के एक कर्मी ने एजेंसी को बताया कि बीजिंग में कुछ लोगों को तो कई दिनों तक श्मशान घाट पर अपना नंबर अआने का इंतज़ार करना पड़ रहा है तो कुछ लोग मोटी रकम भर कर श्मशान में जल्दी जगह ले रहे हैं."
"एक श्मशान कर्मी ने वहां के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट साझा किया करते हुए लिखा ' अगर आप बिना लंबी कतारों में खड़े हुए आराम से श्मशान में जगह चाहते हैं तो 26000 युआन (लगभग 3700 डॉलर) में पाएं.' हालांकि इस पोस्ट और ऑफर की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं हो सकी है."
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'जिसको भी मैं जिसे भी जानता हूं उसे बुखार है'
बिना किसी तैयारी और बैकअप प्लान के आचानक ज़ीरो कोविड पॉलिसी हटाने से पूरे चीन में कोरोना के नए मामले में बाढ़ सी आई गई है. इसे लेकर सोशल मीडिया पर ज़बरदस्त गुस्सा है जिनजियांग और अनुही जैसे कई बड़े शहरों में रैपिड टेस्ट किट की भारी किल्लत है
चीनी सोशल मीडिया वीबो पर लोग लिख रहे हैं, "बीते तीन से कोई तैयारी नहीं की गई और फिर अचानक से पाबंदिया हटाकर लोगों को बाहर खुल कर आने जाने की इजाज़त दे दी, हमारी ज़िंदगी की कोई कीमत नहीं है हम चिटियों जैंसी हल्की बना दी गई है."
चीन से बाहर रहने वाले चीनी लोग जो वापस अपने देश आए हैं वो संक्रमण की रफ़्तार देख कर हैरान हैं.
चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शियाहोंगशु पर एक यूज़र लने लिखा, "मैं विदेश में रहता हूं और मुझे कभी कोविड नहीं हुआ, लेकिन यहां आने के बाद मुझे कोविड हो गया मैं जिन्हें भी जानता हूं उन सबको बुखार है. तो अगर आप देश से बाहर रह रहे हैं तो वही रहिए वापस मत आइए."
बीते दो सप्ताह से चीन के इंटरनेट कोरोना के पोस्ट से पटे पड़े हैं. कई वीडियो ऐसे सामने आ रहे हैं जिसमें घर में संक्रमित परिजनों को बच्चे खाना और पानी दे रहे हैं
लेकिन इस तरह के कोई वीडियो या संदेश चीन के सरकारी मीडिया चैनल पर नहीं दिखाए जा रहे हैं
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'चीन से हालात नहीं संभल रहे'
अमेरिविश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहां है कि चीन में कोरोना की नई लहर के कारण वहां के अस्पताल भरते जा रहे हैं. लेकिन चीन की ओर से सटीक जानकारी नहीं दी जा रही जिससे हालात का सही आंदाज़ा हो वह लगातार सच्चाई को छिपाने की कोशिश कर रहा है अमेरिकी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट ने चीन में कोरोना की नई लहर को लेकर एक लेख प्रकाशित किया है
इसमें कहा गया है, "चीन की ज़ीरो कोविड नीति ऐसी नीति थी जो टिक नहीं सकती थी और इसे बिना किसी तैयारी और बैकअप प्लान के अचानक से ख़त्म करने के फ़ैसले से ना सिर्फ़ यहाँ के लोगों के लिए एक भयानक नई लहर का ख़तरा पैदा हुआ है बल्कि ये वहाँ के व्यापार को भी झटका देगा और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व पर भी बड़ा सवाल पैदा करता है.'
''संभव है कि ये नया संकट पूरी दुनिया को हिला कर रख दे जैसा कि वुहान में होने वाले आउटब्रेक ने तीन साल पहले पूरी दुनिया को ठप कर दिया था. चीन में जो होता है वो ज़रूरी नहीं है कि बस चीन तक ही सीमित रहे."
"जिनपिंग सरकार ने पूरे कोरोना के समय कठोर कोविड नीति अपनाई, टेस्ट किए, जबरन लोगों को क्वॉरंटीन किया लेकिन सात दिसंबर को सरकार ने नियमों में बड़ी ढील दी और कहा कि सब कुछ कंट्रोल में है. लेकिन अभी जो हालात हैं, उनसे ज़ाहिर है कि बात उसके काबू में नहीं है.''
'बीजिंग में ओमिक्रॉन का संक्रमण ऐसा फैला है कि कि यह एक भूतिया शहर में तब्दील हो गया है और डर है कि ये हालत पूरे चीन में हो सकते हैं. चीनी की सरकार जो अपने डेटा को छुपाने के लिए जानी जाती है, वह अपने प्रतिदिन आने वाले मामलों को ठीक से रिपोर्ट नहीं कर रही और कई सारे ट्रैकिंग ऐप डिएक्टिवेट कर दिए गए हैं, जिससे वहाँ के हालात कैसे हैं, आंकड़े क्या हैं? इसे लेकर असमंजस बना हुआ है."
विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से अन्य देशों के लिए अलर्ट जारी किया गया है वही भारत के स्वास्थ्य विभाग ने भी एडवाइजरी जारी कर कोबिट प्रोटोकॉल लागू कर दिया जिस जीरो कोविड पॉलिसी का विरोध पूरे चीन में हो रहा है और माना जा रहा है कि इसी वजह से जनसंख्या के आधार पर इतनी बड़ी देश में कोई बैकअप प्लान ना होने की वजह से चाइना फिर से कोविड की गिरफ्त में आ चुका है कुवैत का नया वैरीअट चाइना में तबाही मचा रहा है जनसंख्या की दृष्टि से विश्व में दूसरे सबसे बड़े राष्ट्र भारत ने भी कोबिट प्रोटोकॉल को समाप्त कर जीरो पॉइंट पॉलिसी लागू की थी जिसको कि अभी ज्यादा समय नहीं हुआ और आज विश्व जब कोबिट की नई वैरीअट की गिरफ्त की दहलीज पर खड़ा है तो भारत सरकार ने भी अपनी हां विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाह को मानते हुए कोबिट प्रोटोकॉल लागू कर दिया है जिसके अनुपालन के लिए सरकार की सुरक्षा एजेंसियों को कड़े निर्देश दिए गए
मुद्दे की बात यह है कि जीरो कोविड पॉलिसी भारत और चीन दोनों देशों ने अपने हल लागू की थी बावजूद इसके कोबिट से चाइना में हाहाकार मचा हुआ है जबकि भारत में हालात सामान्य श्रेणी के नजर आ रहे हैं उसका बहुत बड़ा कारण भारत ने बड़े पैमाने पर वैक्सीन की डोज अपनी जनता के लिए न केवल उपलब्ध कराई बल्कि उनको अपनी एजेंसियों के माध्यम से लगवाना भी सुनिश्चित किया है आज भारत की एक बहुत बड़ी आबादी दोनों कोरोना वैक्सीन की डोज से सुरक्षित हैं तीसरी बूस्टर डोज पर काम चालू है भारत ने कोविड वैक्सीन की गुणवत्ता तथा उसको लगाए जाने के व्यापक अभियान को सुनिश्चित किया था जिसकी वजह से आज विश्व में जनसंख्या के आधार पर दूसरे सबसे बड़े राष्ट्र होने के बावजूद भी अपने यहां कोबिट पांडेमिक पर काफी हद तक काबू करने में सफलता प्राप्त की है जबकि वहीं चीन ने अपनी गुणवत्ता के अनुसार कोरोना वैक्सीन को बनाया था जिसका की विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा माना जा रहा है कि विश्व में उपलब्ध अन्य कॉविड वैक्सीन के मुकाबले चीन की कोबिट वैक्सीन कम असरदार साबित हो रही है जिसको की ध्यान में रखते हुए चीन ने अभी हाल ही में जर्मनी से कोविड वैक्सीन की कुछ डोज आयात की है
: युद्ध के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति अमेरिका पहुंचे
Fri, Dec 23, 2022
फरवरी 2022 से लगातार युद्ध संकट झेल रहे यूक्रेन के राष्ट्रपति, अपने देश के अंदर विरोध को मुखर तथा युद्ध को लंबा चलते देख कहीं यूरोपियन दोस्तों का मोह भंग ना हो जाए इसलिए अमेरिकी दौरे पर है अमेरिका पहुंचकर उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन से मुलाकात की तथा साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने यूक्रेन पर रूसी हमले को 'स्वतंत्रता और लोकतंत्र' के साथ-साथ संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के मूल्यों पर हमला' बताया जिसके बाद अमेरिका की कड़ी प्रतिक्रिया स्वाभाविक थी
वहीं, ज़ेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन को दी जा रही अमेरिकी मदद दान नहीं बल्कि 'निवेश है.'लेकिन भविष्य में यूक्रेन को मदद देते रहने का फ़ैसला सिर्फ़ बाइडन के हाथ में नहीं है यूक्रेन की आइस साल मई महीने में 435 सीटों वाली प्रतिनिधि सभा में से रिपब्लिकन पार्टी के 57 सदस्यों और 100 सीटों वाली सीनेट के 11 सदस्यों ने चालीस अरब डॉलर वाले एकमुश्त अमेरिकी मदद पैकेज़ का विरोध किया था.र्थिक मदद करने के लिए बाइडन सरकार अमेरिकी संसद पर निर्भर है.इस साल अमेरिकी संसद यूक्रेन की आर्थिक और सैन्य मदद के लिए लगभग 67 अरब डॉलर की राशि पर स्वीकृति दे चुकी है. साल 2023 के लिए इस हफ़्ते 45 अरब डॉलर की स्वीकृति मिलने की उम्मीद है. हालांकि, अगले साल इससे ज़्यादा मदद हासिल करना ज़ेलेंस्की के लिए चुनौतीपूर्ण होगा.
इस साल फरवरी में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ज़ेलेंस्की का पहला अमेरिकी दौरा है बाइडन ने इस मौक़ै पर यूक्रेन को 1.7 अरब डॉलर का नया राहत पैकेज देने की घोषणा की है इसके साथ ही और 45 अरब डॉलर देने का भी वादा किया है. ज़ेलेंस्की ने अमेरिका की ओर से किए जा रहे समर्थन के लिए बाइडन का शुक्रिया किया है अमेरिका अब तक इस युद्ध में यूक्रेन को पचास अरब डॉलर की आर्थिक मदद दे चुका है जिसमें मानवीय मदद से लेकर आर्थिक और सुरक्षा इंतज़ामों से जुड़ी मदद शामिल है
यूक्रेन युद्ध की भारी क़ीमत और इसकी वजह से वैश्विक खाद्य और ऊर्जा क़ीमतों में आए उछाल के चलते यूक्रेन के कुछ सहयोगियों के लिए उसके समर्थन में खड़े रहना मुश्किल होता जा रहा हैं इन तमाम चिंताओं के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि यूक्रेन के प्रति 'जब तक होगा तब तक' समर्थन को लेकर उन्हें किसी तरह की फ़िक्र नहीं है हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी ने कहा है कि वह यूक्रेन के लिए 'ब्लैंक चैक' यानी असीमित आर्थिक मदद नहीं देगी अगले महीने जनवरी में अमेरिकी संसद की प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी को बहुमत हासिल हो जाएगा बाइडन के साथ मुलाक़ात में ज़ेलेंस्की ने कहा, "पेट्रियट मिसाइल इंस्टॉल होने के बाद क्या होगा? फिर हम राष्ट्रपति बाइडन को एक और संकेत भेजेंगे कि हमें और पेट्रियट चाहिए होंगी मैं माफ़ी चाहता हूं, लेकिन हम युद्ध से जूझ रहे हैं "
इस पर बाइडन ने कहा, "हम इस दिशा में काम कर रहे हैं
इससे पूर्व अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी तथा पेंटागन उसे बयान दिया गया था कि आने वाले कड़ाके की ठंड में यूक्रेन रूस के युद्ध मौसम की मार से शिथिल पड़ जाएगा*(mediawithyou *)
: उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स नीति स्वीकृत योगी मंत्रिमंडल का फैसला
Fri, Dec 23, 2022
मंत्रिपरिषद के महत्वपूर्ण निर्णयलखनऊ: 22 दिसम्बर, 2022मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद द्वारा निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:-‘उ0प्र0 वेयरहाउसिंग एण्ड लॉजिस्टिक्स नीति-2022’ स्वीकृतमंत्रिपरिषद ने ‘उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग एण्ड लॉजिस्टिक्स नीति-2022’ को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में नयी प्रौद्योगिकियों के विकास को देखते हुए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का कारोबारी माहौल सृजित करने हेतु प्रदेश में लॉजिस्टिक्स पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के दृष्टिगत यह नीति बनायी गयी है। इस नीति के सफल क्रियान्वयन से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर की बनाने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकेगा। यह नीति अगले 05 वर्षों के लिए प्रभावी होगी। इस नीति की अधिसूचना निर्गत होने पर ‘उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग एण्ड लॉजिस्टिक्स नीति-2018’ निरसित हो जाएगी। वर्ष 2018 की नीति के तहत प्रोत्साहनों के सम्बन्ध में अनुमोदित पैकेज वाली परियोजनाएं लाभ प्राप्त करने हेतु ‘उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग एण्ड लॉजिस्टिक्स नीति-2018’ के अन्तर्गत अधिकृत रहेंगी।
‘उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग एण्ड लॉजिस्टिक्स नीति-2022’ का उद्देश्य सुदृढ़ परिवहन अवस्थापना नेटवर्क का सृजन करना, विद्यमान वेयरहाउसिंग एण्ड लॉजिस्टिक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर का उन्नयन एवं सुधार करना, लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने एवं दक्षता में सुधार हेतु राज्य में लॉजिस्टिक्स सेवाओं के एकीकृत विकास को प्रोत्साहित करना, प्रदेश में लॉजिस्टिक्स सेक्टर के विकास हेतु प्रभावी प्रशासन एवं एकीकृत नियोजन हेतु एक प्रभावी संस्थागत तंत्र स्थापित करना, लॉजिस्टिक्स सुविधाओं की स्थापना में निजी निवेश को आकर्षित करना, लॉजिस्टिक्स उद्योग की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु कार्यबल की उत्कृष्टता, कौशल सुधार तथा क्षमता वृद्धि को बढ़ावा देना तथा स्मार्ट लॉजिस्टिक्स कार्य प्रणालियों की स्थापना करना है।
‘उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग एण्ड लॉजिस्टिक्स नीति-2022’ के तहत लॉजिस्टिक्स पार्क्स के लिए फास्ट ट्रैक भूमि आवंटन, निर्दिष्ट लॉजिस्टिक्स परिक्षेत्रों के विकास के साथ ही प्रोत्साहन योजना का प्राविधान है। प्रोत्साहन योजना के तहत इस नीति में लॉजिस्टिक्स अवस्थापना सुविधाओं को 03 शीर्षकों (1) भण्डारण सुविधाएं यथा वेयरहाउस, साइलोज एवं कोल्ड चेन सुविधा (2) मोल्टीमोडल पार्क, अन्तर्देशीय कण्टेनर डिपो, कण्टेनर फ्रेट स्टेशन सहित लॉजिस्टिक्स पार्क्स एवं ड्राई पोट जिनमें एयर फ्रेट स्टेशन सम्मिलित हैं तथा (3) अन्य सुविधाएं, जैसे-ट्रक ले-बे, निजी फ्रेट टर्मिनल, निजी बर्थिंग टर्मिनल एवं अन्तर्देशीय पोत में वर्गीकृत कर आकर्षक उपादान एवं प्रोत्साहन प्रदान करने की व्यवस्था है।
नीति में परिभाषित पात्र परियोजनाओं को फ्रण्ट एण्ड एवं बैक एण्ड उपादान प्रदान किये जाएंगे। फ्रण्ट एण्ड उपादान के अन्तर्गत पात्र परियोजनाओं को छूट/रियायतें परियोजना का वाणिज्यिक संचालन आरम्भ होने से पूर्व अनुमन्य होंगी। बैक एण्ड उपादान परियोजना के पूर्ण होने तथा वाणिज्यिक संचालन प्रारम्भ होने के उपरान्त ही प्रदान किये जाएंगे। फ्रण्ट एण्ड उपादान के तहत स्टाम्प ड्यूटी में छूट, भू उपयोग परिवर्तन चार्ज में रियायत, विकास शुल्क में छूट, ग्राउण्ड कवरेज आदि प्रदान किये जाएंगे। बैक एण्ड के तहत पूंजीगत उपादान, इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी से छूट, गुणवत्ता प्रमाणन लागत प्रतिपूर्ति एवं कौशल विकास उपादान आदि प्रोत्साहन/रियायतें दी जाएंगी। किसी भी परियोजना को प्रदान की गयी छूट एवं समस्त प्रोत्साहन-लाभों का योग इस नीति के अन्तर्गत परिभाषित पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
--------‘मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना’ के क्रियान्वयन सम्बन्धी दिशा-निर्देश अनुमोदितमंत्रिपरिषद ने ‘मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना’ के क्रियान्वयन से सम्बन्धित दिशा-निर्देशों को अनुमोदित कर दिया है। मंत्रिपरिषद ने यह निर्णय भी लिया है कि योजना के दिशा-निर्देशों में संशोधन के लिए मुख्यमंत्री जी अधिकृत होंगे।
मत्स्य उत्पादन में प्रचुर बढ़ोत्तरी किये जाने तथा मछुआ समुदाय एवं मत्स्य पालकों की स्थिति में समग्र रूप से गुणात्मक विकास लाये जाने हेतु भारत सरकार द्वारा 20 मई, 2020 से ‘प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना’ लागू की गयी है। मत्स्य क्षेत्र से प्रदेश में लगभग 39 लाख मछुआरों एवं मत्स्य पालकों को आजीविका प्राप्त होती है। इस क्षेत्र में उत्पादकता वृद्धि और मत्स्य पालकों की आर्थिक समृद्धि की अपार सम्भावनाएं हैं। इसके दृष्टिगत प्रदेश में मत्स्य पालन के क्षेत्र में वृद्धि लाने व ग्रामीण अंचलों में आवासित स्थानीय मत्स्य पालकों के आर्थिक व सामाजिक उत्थान हेतु प्रदेश सरकार द्वारा ‘मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना’ के रूप में एक नवीन राज्य योजना प्रस्तावित की जा रही है।
प्रदेश में ग्राम सभा के तालाबों में मत्स्य पालन का कार्य स्थानीय मछुआरों व पट्टाधारकों द्वारा परम्परागत तरीके से किया जा रहा है। इन तालाबों की वार्षिक मत्स्य उत्पादकता मात्र 25-30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इन तालाबों का मनरेगा कन्वर्जेन्स के माध्यम से सुधार कराकर अथवा स्वयं के संसाधन से सुधारे गये ग्राम सभा एवं अन्य पट्टे के तालाबों में मत्स्य पालन हेतु अनुदान उपलब्ध कराते हुए मत्स्य उत्पादकता को 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। ग्राम सभा के तालाबों के पट्टाधारकों व मछुआरों की आय में वृद्धि व उनका आर्थिक व सामाजिक उत्थान किया जाना सरकार की प्राथमिकताओं में सम्मिलित है। वर्तमान में प्रचलित ‘प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना’ में ग्राम सभा के पट्टे पर आवंटित तालाबों पर कोई परियोजना अनुमन्य नहीं है। इसी रिक्तता को भरने के उद्देश्य से ‘मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना’ प्रस्तावित की जा रही है।
‘मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना’ का क्रियान्वयन 02 उप योजनाओं-‘कम्पोनेन्ट ए’ एवं ‘कम्पोनेन्ट बी’ के माध्यम से किया जाएगा। ‘कम्पोनेन्ट ए’ के तहत मनरेगा कन्वर्जन्स अथवा पट्टाधारक स्वयं तथा अन्य विभागों के माध्यम से सुधारे गये ग्राम सभा व अन्य पट्टे के तालाबों में प्रथम वर्ष निवेश पर अनुदान हेतु इकाई लागत 04 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर पर 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। ‘कम्पोनेन्ट बी’ के तहत मनरेगा कन्वर्जेन्स अथवा पट्टाधारक स्वयं तथा अन्य विभागों के माध्यम से सुधारे गये ग्राम सभा व अन्य पट्टे के तालाबों में मत्स्य बीज बैंक की स्थापना योजना हेतु इकाई लागत 04 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर पर 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।
‘मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना’ के कार्यान्वयन के लिए जिला स्तर पर लाभार्थी चयन एवं अनुमोदन, योजना के पर्यवेक्षण व निगरानी हेतु जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। मत्स्य विभाग का जिला स्तरीय अधिकारी इस समिति का सदस्य सचिव होगा। लाभार्थियों का चयन जिला स्तरीय समिति द्वारा किया जाएगा। इच्छुक लाभार्थियों के आवेदन विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन प्राप्त किये जाएंगे। पूर्ण पट्टा अवधि में पट्टाधारक को किसी भी एक परियोजना में एक बार ही लाभ देय होगा। लाभार्थी चयन में जनपद स्तर पर उपयुक्तता के आधार पर यथासम्भव सभी वर्गाें की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। लाभार्थी चयन के उपरान्त स्थल का प्रारम्भिक सर्वेक्षण मत्स्य विभाग के स्थानीय अधिकारियों द्वारा किया जाएगा।
‘मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना’ 05 वर्षाें (वर्ष 2022-23 से वर्ष 2026-27 तक) के लिए संचालित की जाएगी।
--------उ0प्र0 इमारती लकड़ी एवं अन्य वन उपज का अभिवहन नियमावली, 1978 के सरलीकरण के सम्बन्ध मेंमंत्रिपरिषद ने महुआ के फूल, महुआ के बीज, लाख, आंवला के फलों एवं चिरौंजी को उत्तर प्रदेश इमारती लकड़ी और अन्य वन उपज का अभिवहन नियमावली, 1978 से मुक्त करने के सम्बन्ध में अधिसूचना निर्गत किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
वनों में निवास करने वाले अनुसूचित जनजाति तथा अन्य परम्परागत वन निवासियों, लघु एवं सीमान्त कृषकों की आय में वृद्धि तथा इन वन उपजों के सतत् विदोहन एवं विपणन से उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए महुआ के फूल तथा बीज, लाख, आंवला का फल एवं चिरौंजी को उत्तर प्रदेश इमारती लकड़ी और अन्य वन उपज का अभिवहन नियमावली, 1978 के प्राविधानों से मुक्त किए जाने का निर्णय लिया गया है।
--------महर्षि देवरहा बाबा स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, देवरिया में 30 बेडेड ट्रॉमा सेण्टर, 20 बेडेड बर्न वॉर्ड एवं 20 बेडेड टॉक्सीकोलॉजी वॉर्ड युक्त भवन के निर्माण की प्रायोजना में उच्च विशिष्टियों के अनुमोदन के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने महर्षि देवरहा बाबा स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, देवरिया में 30 बेडेड ट्रॉमा सेण्टर, 20 बेडेड बर्न वॉर्ड एवं 20 बेडेड टॉक्सीकोलॉजी वॉर्ड युक्त भवन के निर्माण की प्रायोजना में सम्मिलित आवासीय भवनों में मिनरल फाइबर, एकास्टिकल फॉल्स सीलिंग, केन्द्रीय वातानुकूलन (वी0आर0वी0/वी0आर0एफ0 सिस्टम), ग्रेनाइट वॉल लाइनिंग एवं मेटल फॉल्स सीलिंग आदि उच्च विशिष्टियों को अनुमोदित कर दिया है।
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