: कभी हिंदू राष्ट्र रहे नेपाल के नए प्रधानमंत्री प्रचंड के सामने चुनौतीपूर्ण ताज
Thu, Dec 29, 2022
बीते 25 दिसंबर को पड़ोसी देश नेपाल में नई सरकार का गठन हुआ जिसमें की प्रधानमंत्री के रूप में पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड की ताजपोशी हुई तमाम राजनीतिक अस्थिरता ओं के बीच नेपाल को नए प्रधानमंत्री के रूप में माओवादी नेता प्रचंड का नेतृत्व जरूर मिला लेकिन अस्थिरता का दौर अभी नेपाल में जारी रहने वाला है क्योंकि नेपाल में 275 सीटों की संसद में प्रचंड की केवल 32 सीटें आई है और ऐसे में गठबंधन धर्म को निभाते हुए केपी शर्मा ओली की सीपीएन (यूएमएल )के 78 सांसद कब तक प्रचंड का साथ निभाएंगे यह देखने वाली बात होगी जबकि आम चुनाव में 89 सीटें प्राप्त करने वाली शेर बहादुर देउबा की पार्टी नेपाली कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी होगी लेकिन नेपाल की गठबंधन सरकार के सामने चुनौतियां भी अनेक है सरकार बनाने के लिए जितनी जोड़-तोड़ और मुश्किलों का सामना करना पड़ा, नई सरकार के सामने चुनौतियां भी उतनी ही हैं
हालांकि, नेपाल के संविधान में प्रावधान है कि दो साल तक प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव नही लाया जा सकता है लेकिन उनका तर्क है कि अगर गठबंधन के भीतर मतभेद हों, तो अस्थिरता का ख़तरा हमेशा बना रहेगा उनके मुताबिक़, ऐसे हालात से बचने के लिए नई सरकार को अपने सहयोगियों के साथ गठबंधन करने के बाद गठबंधन की सियासी संस्कृति पर अधिक काम करना होगानेपाल में, संयुक्त सरकार बनाने की कोई परंपरा नहीं है. जैसे ही छोटी-सी बात पर कोई पार्टी असंतुष्ट होगी, सरकार गिर जाएगी या अस्थिरता के हालात पैदा होंगे." कई अर्थशास्त्री कह रहे हैं कि नेपाल की अर्थव्यवस्था पिछले साल से गंभीर संकट का सामना कर रही है हाल के सालों में, विदेश संबंधी मामलों में नेपाल की कमज़ोर मौजूदगी देखी गई है और कुछ लोगों का कहना है कि नेपाल ताक़तवर देशों के बीच संघर्ष का केंद्र बन जाएगा ये भी मानना है कि विदेश नीति में संतुलन साधना नई सरकार की एक बड़ी चुनौती है विदेश नीति में संतुलन हमेशा नेपाल के लिए एक चुनौती है और यह नई सरकार के सामने भी बनी रहेगी." कुछ लोगों की ये भी चिंता है कि अमेरिकी सहायता परियोजना, एमसीसी के पास होने के बाद नेपाल को लेकर चीन और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ जाएगा इन हालात में कई लोगों का मानना है कि नेपाल को अपने पड़ोसी देशों और अन्य देशों के साथ सहज संबंध बनाए रखने के लिए संतुलित नीति अपनाने की चुनौती है
नेपाल के आम चुनाव में केवल 32 सीट प्राप्त करने वाली सीपीएन( माओवादी सेंटर) की मुखिया पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड ने प्रधानमंत्री पद का दावा ठोकते हुए 169 सांसद किस समर्थन प्राप्त होने का दावा पेश किया है
जिसमें निर्दलीय सांसद भी शामिल है नेपाल में सत्ता परिवर्तन के लिए कभी विद्रोह का रास्ता अपनाने वाले प्रचंड मायोंवादी विद्रोह का नेतृत्व करने के लिए कई वर्ष अंडरग्राउंड रहे l नेपाल में वर्ष 2008 में 293 वर्ष की पुरानी राजशाही खत्म होने के बाद अब तक 10 सरकार आ चुकी है लेकिन 32 सीटें प्राप्त वाली पार्टी के मुखिया के रूप में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले प्रचंड शायद पहले व्यक्ति होंगे हालांकि प्रचंड नेपाल में तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ले रहे हैं इससे पूर्व भी वह दो बार वर्ष 2008 नवमी तथा वर्ष 2016-17 में प्रधानमंत्री बन चुके हैं 11 दिसंबर 1954 को काशकि जिले के पोखरा के पास टिकुर पोखरी में एक साधारण परिवार में जन्मे पुष्प कमल दहल देश में 10 सालों तक विद्रोह का भी नेतृत्व कर चुके हैं जिसके लिए उन पर पड़ोसी कम्युनिस्ट वादी विचारधारा वाले देश कठपुतली होने के आरोप भी लग चुके हैं इन सब चीजों के बीच भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रचंड को नेपाल के नए प्रधानमंत्री के रूप में बधाई दी और साथ में कार्य करने का विश्वास व्यक्त किया अब देखना यह होगा कि भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा लिपुलेख में सड़क निर्माण के आव्हान को नई नेपाली सरकार किस प्रकार लेती हैसमाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली विपक्षी सीपीएन (यूएमएल), सीपीएन (माओवादी सेंटर), राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी और अन्य छोटी पार्टियां प्रचंड के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के लिए सहमत हो गई हैं इस बात को लेकर सहमति बनी है कि प्रचंड और ओली बारी-बारी से सरकार का नेतृत्व करेंगे जिसमें पहली बारी प्रचंड को मिलेगीसमाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार प्रचंड 2025 में प्रधानमंत्री का पद छोड़ देंगे जिसके बाद ये पद यूएमएल अध्यक्ष केपी ओली संभालेंगे प्रचंड गठबंधन सरकार के लिए सत्तारूढ़ नेपाली कांग्रेस पार्टी के साथ चर्चा कर रहे थे. रॉयटर्स के अनुसार लेकिन नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा ने प्रधानमंत्री पद के लिए प्रचंड को समर्थन देने से इनकार कर दिया था जिसके बाद बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई
: गुरु गोविंद सिंह जयंती आज ,उनके बलिदान और त्याग के लिए राष्ट्र कृतज्ञ
Thu, Dec 29, 2022
बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में 29 दिसंबर को गुरु गोविंद सिंह जयंती का अवकाश घोषित किया है। बृहस्पतिवार को परिषदीय विद्यालयों के साथ परिषद से मान्यता प्राप्त सभी
विद्यालयों में अवकाश रहेगा। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 22 दिसंबर 1666 को सिख धर्म के दसवें धर्म गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म महान सिख परंपरा एवं विरासत वाले परिवार में श्री तेग बहादुर सिंह के घर में हुआ था लेकिन सिख धर्म के नानकशाही कैलेंडर के अनुसार 29 दिसंबर 2022 को यानी कि आज ही के दिन गुरु गोविंद सिंह जयंती मनाना सुनिश्चित किया गया हैराज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को गुरु गोबिन्द सिंह की जयन्ती की बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने बधाई संदेश में कहा है कि लोग कोरोना संक्रमण के दृष्टिगत सभी सावधानियां बरतते हुए गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती मनाएं। उन्होंने कहा कि गुरु गोबिन्द सिंह ने समाज को सत्य, न्याय, धर्म और भलाई के लिए प्रेरित किया। जुल्म, अन्याय, अत्याचार के विरुद्ध आगे बढ़कर उन्होंने नेतृत्व प्रदान किया। उन्होंने कहा कि गुरु जी ने समाज के उपेक्षित वर्ग के लोगों को समाज की मुख्य धारा में शामिल कर सामाजिक समरसता का वातावरण बनाने का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है। समाज को उनके बताए रास्ते पर चलकर देश और समाज के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।गुरु गोविंद सिंह सिखों के दसवें गुरु थे। श्री गुरू तेग बहादुर जी के बलिदान के उपरान्त 11 नवम्बर सन 1675 को 10 वें गुरू बने। आप एक महान योद्धा, चिन्तक, कवि, भक्त एवं आध्यात्मिक नेता थे। सन 1699 में बैसाखी के दिन उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की जो सिखों के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है वह एक महान योद्धा कवि साहित्यकार नेक इंसान दानी एवं अनेकों युद्ध कलाओं तथा बाद यंत्रों में भी निपुण थे उन्होंने मानवीय मूल्यों एवं अपने धर्म की खातिर न केवल अपना पूरे परिवार का बलिदान दिया था जो आज भी हमारे आदर्शों के शिरोमणि शीर्ष है आज की युवा पीढ़ी को उनके बलिदान और त्याग से प्रेरणा और शिक्षा लेनी चाहिए कि किस प्रकार उन्होंने अपने धर्म एवं मानवीय मूल्यों के खातिर पूरी मुगल सल्तनत से लोहा लिया था आता ताई मुगल सम्राट के अनेक यात्राओं से समाज को बचाने वाले हमारे धर्मगुरु श्री गुरु गोोविंद सिंह साहिब को आज हमारा राष्ट्र कृतज्ञता से श्रद्धांजलि अर्पित करता है
: भारत में रूसी नागरिकों की रहस्यमई मौत पर उठे सवाल
Thu, Dec 29, 2022
दक्षिण उड़ीसा के रायगढ़ शहर में जिस प्रकार रूसी नागरिकों की रहस्यमई मौत हुई उस पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने सवाल खड़े किए हैं मृत रूसी नागरिकों में एक रूस के सांसद भी थे जो कि अपने किसी दोस्त के आयोजन में शामिल होने भारत पहुंचे थे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई विवेचना में कयास लगाया जा रहा है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और सांसद पावेल के बीच उत्पन्न हुए राजनीतिक मतभेदों की वजह से इस घटना को अंजाम दिया गया इसको अंतरराष्ट्रीय मीडिया में किसी भी दृष्टिकोण से रेखांकित किया जा रहा हो लेकिन नागरिकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से किसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश का पर्दा और गहराता जा रहा है पढ़िए मीडिया विद यू की एक फीचर रिपोर्ट ......
रूस के सांसद और बिज़नेसमैन पावेल एंतोव की पोस्टमॉर्टम के मुताबिक़ उनकी मौत गिरने से लगी अंदरूनी चोट की वजह से हुई जबकि उनके साथी व्लादिमीर बेदेनोव की मौत हार्ट अटैक से हुई है. पुलिस ने ये जानकारी बुधवार को दी.
दक्षिण ओडिशा के रायगड़ा शहर के एक होटल में दो दिनों के भीतर दो रूसी पर्यटकों की मौत की वजह को लेकर सस्पेंस लगातार बरक़रार है ओडिशा सरकार ने इस मामले में सीआईडी जांच के आदेश दिए हैं. वहीं मानवाधिकार आयोग ने भी इस पर संज्ञान लिया है और केस दर्ज किया है. लेकिन एक ही होटल में ठहरे इन दो रूसी पर्यटकों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब तूल पकड़ रहा है दो रूसी पर्यटक- व्लादिमीर बेदेनोव (61) और उनके साथी पावेल एंटव (65) रायगड़ा शहर के साई इंटरनेशनल होटल में संदेहास्पद परिस्थितियों में मृत पाए गए थे बेदेनोव 22 दिसंबर की सुबह होटल के कमरे में बेहोश पाए गए थे. उन्हें तत्काल स्थानीय अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया
इसके दो दिन बाद शनिवार की शाम को बेदेनोव के मित्र और रूसी सांसद पावेल एंटव को होटल के कर्मचारियों ने ख़ून से लथपथ पाया. उनकी भी मौत हो चुकी थी बताया गया कि एंटव की मौत होटल की खिड़की से नीचे छत पर गिरने से हुई. लेकिन ताज्जुब की बात ये है कि होटल के किसी कर्मचारी ने गिरने की कोई आवाज़ नहीं सुनी चूंकि मामला दो विदेशी पर्यटकों की मौत का है तो ओडिशा सरकार ने इसे राज्य की क्राइम ब्रांच को सुपुर्द कर दिया हैक्राइम ब्रांच ने बुधवार को घटनास्थल पर पहुंच कर अपनी जांच शुरू की है
इन दोनों रूसी पर्यटकों की मौत का मामला भारत ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी चर्चा में है. इसके पीछे एक और बड़ा कारण ये भी है कि सांसद एंटव ने रूस के यूक्रेन पर हमले को लेकर आलोचना भी की थी लंदन के डेली मेल ने उन्हें पुतिन इन दोनों (मृतक) के साथ आए रूसी दंपति तुरोव और नतालिया और ट्रैवल एजेंट जितेंद्र सिंह से क्राइम ब्रांच की टीम पूछताछ कर रही है इन तीनों को रायगड़ा से भुवनेश्वर लाया गया था. क्राइम ब्रांच के आईजी अमितेंद्र नाथ सिंह ने देर रात तक उनसे पूछताछ की बुधवार को तीनों को क्राइम ब्रांच के मुख्यालय कटक ले जाया गया, जहां वरिष्ठ अधिकारी उनसे पूछताछ कर रहे हैं