: पुरानी ट्रेन को अंतिम बार चलता देख लोगों की आंखें नम हो गईं
Wed, Feb 1, 2023
145 साल से पटरी पर दौड़ रही मीटर गेज मीनाक्षी एक्सप्रेस मंगलवार (31 जनवरी) को अंतिम बार चली. यह ट्रेन मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में अंग्रजों के जमाने से यानी कि करीबन डेढ़ शताब्दी से पटरी पर दौड़ रही थी. पुरानी ट्रेन को अंतिम बार चलता देख लोगों की आंखें नम हो गईं. इस मौके पर रेल कर्मचारियों और लोगों ने ट्रेन के चालक का फूलों की माला पहनाकर सम्मान किया
अंग्रजों के समय के मीटर गेज को अब ब्रॉड गेज में परिवर्तित किया जाएगा. बता दें कि यह ट्रेन मध्यप्रदेश के जिले महू और खंडवा के बीच 123 किलोमीटर का सफर तय करती थी. इस ट्रेन का श्रद्धालुओं की आवाजाही में योगदान रहा है. इस ट्रेन से महू इंदौर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रसिद्ध ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के लिए मोरटक्का तक आते थे. आज 31 जनवरी को इस ट्रेन ने अपना आखिरी सफर तय किया ह
अंग्रेजों के शासनकाल में मीटर गेज ट्रैक बनाए गए थे, यह ट्रेन इन्हीं ट्रैक पर दौड़ती थी. मीनाक्षी एक्सप्रेस ट्रेन के परिचालन को खत्म करने के बाद निर्माण कार्य तेजी से शुरू हो जाएगा. सभी ट्रैकों को जल्द ब्रॉड गेज में बदल दिया जाएगा
ट्रेन को आखिरी बार चलता देख रेलवे कर्मचारी और आसपास के लोग इमोशनल हो गए. जब ट्रेन चालक और टीसी ट्रेन को आखिरी बार ट्रैक पर दौड़ाने आए, तो लोगों ने फूलों की माला से उनका स्वागत-सतकार किया, चेहरे पर खुशी और नम आंखों के साथ ट्रेन को आखिरी हरी झंडी दिखाई गई. नागरिक इस वक्त पर इस ट्रेन के सफर के इतिहास को याद करते हुए उदास भी दिखे, तो इस बात पर खुशी भी जाहिर की, अब इस ट्रैक के ब्रॉड गेज परिवर्तन से उत्तर से दक्षिण को जोड़ता ये ट्रैक क्षेत्र में विकास के नए द्वार खोलेगा
नर्मदा नदी पर बने मजबूत रेलवे पुल को भी ध्वस्त कर ब्रॉड गेज के लिए नया पुल निर्माण करने की कवायद शुरू हो चुकी है. इस ट्रैक पर लोग आंध्रप्रदेश के काचीगुड़ा से राजस्थान के जयपुर तक के सफर को आज भी अपने जेहन में रखे हुए हैं. मीनाक्षी एक्सप्रेस के नाम से चलने वाली इस ट्रेन की यादें आज भी लोगों के दिल-दिमाग मे बसी हैं.
: गुरु गोविंद सिंह जयंती आज ,उनके बलिदान और त्याग के लिए राष्ट्र कृतज्ञ
Thu, Dec 29, 2022
बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में 29 दिसंबर को गुरु गोविंद सिंह जयंती का अवकाश घोषित किया है। बृहस्पतिवार को परिषदीय विद्यालयों के साथ परिषद से मान्यता प्राप्त सभी
विद्यालयों में अवकाश रहेगा। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 22 दिसंबर 1666 को सिख धर्म के दसवें धर्म गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म महान सिख परंपरा एवं विरासत वाले परिवार में श्री तेग बहादुर सिंह के घर में हुआ था लेकिन सिख धर्म के नानकशाही कैलेंडर के अनुसार 29 दिसंबर 2022 को यानी कि आज ही के दिन गुरु गोविंद सिंह जयंती मनाना सुनिश्चित किया गया हैराज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को गुरु गोबिन्द सिंह की जयन्ती की बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने बधाई संदेश में कहा है कि लोग कोरोना संक्रमण के दृष्टिगत सभी सावधानियां बरतते हुए गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती मनाएं। उन्होंने कहा कि गुरु गोबिन्द सिंह ने समाज को सत्य, न्याय, धर्म और भलाई के लिए प्रेरित किया। जुल्म, अन्याय, अत्याचार के विरुद्ध आगे बढ़कर उन्होंने नेतृत्व प्रदान किया। उन्होंने कहा कि गुरु जी ने समाज के उपेक्षित वर्ग के लोगों को समाज की मुख्य धारा में शामिल कर सामाजिक समरसता का वातावरण बनाने का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है। समाज को उनके बताए रास्ते पर चलकर देश और समाज के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।गुरु गोविंद सिंह सिखों के दसवें गुरु थे। श्री गुरू तेग बहादुर जी के बलिदान के उपरान्त 11 नवम्बर सन 1675 को 10 वें गुरू बने। आप एक महान योद्धा, चिन्तक, कवि, भक्त एवं आध्यात्मिक नेता थे। सन 1699 में बैसाखी के दिन उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की जो सिखों के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है वह एक महान योद्धा कवि साहित्यकार नेक इंसान दानी एवं अनेकों युद्ध कलाओं तथा बाद यंत्रों में भी निपुण थे उन्होंने मानवीय मूल्यों एवं अपने धर्म की खातिर न केवल अपना पूरे परिवार का बलिदान दिया था जो आज भी हमारे आदर्शों के शिरोमणि शीर्ष है आज की युवा पीढ़ी को उनके बलिदान और त्याग से प्रेरणा और शिक्षा लेनी चाहिए कि किस प्रकार उन्होंने अपने धर्म एवं मानवीय मूल्यों के खातिर पूरी मुगल सल्तनत से लोहा लिया था आता ताई मुगल सम्राट के अनेक यात्राओं से समाज को बचाने वाले हमारे धर्मगुरु श्री गुरु गोोविंद सिंह साहिब को आज हमारा राष्ट्र कृतज्ञता से श्रद्धांजलि अर्पित करता है
: मां की आखिरी इच्छा पूर्ण करने के लिए बेटी ने अस्पताल के आईसीयू में की शादी
Tue, Dec 27, 2022
खबर बिहार के गया जिले से है जहां एक बेटी ने अपनी मां की आखिरी इच्छा पूरी करने के लिए आईसीयू में रचाई शादी और इस शादी में दोनों परिवारों के परिजनों के अलावा अस्पताल कर्मी भी शामिल हुए यहां एक प्राइवेट अस्पताल के ICU में एडमिट महिला मरीज की आखिरी इच्छा को पूरा करने के लिए बेटी ने आईसीयू में ही अपनी मां की आंखों के सामने सात फेरे लिए।हालांकि बेटी की शादी के दो घंटे बाद ही मां ने दम तोड़ दिया। इस शादी में न सिर्फ दूल्हा-दुल्हन के परिवार के लोग, बल्कि अस्पताल के कर्मी भी मौजूद रहे।जानकारी के मुताबिक, जिले के मजिस्ट्रेट कॉलेनी के सामने स्थित अर्श हॉस्पिटल में ये शादी कराई गई है। गुरारू प्रखंड के बाली गांव केनिवासी ललन कुमार की पत्नी पूनम कुमारी वर्मा कई दिनों से बीमार थी। सीरियस होने के बाद उन्हें अर्श हास्पिटल गया में भर्ती कराया गया था।पूनम वर्मा को भर्ती कराए जाने के बाद डॉक्टर ने कहा कि मरीज की हालत गंभीर है और किसी भी समय मौत हो सकती है। ऐसी हालत में मरीज पूनम कुमारी वर्मा ने परिजनों के सामने शर्त रख दी कि उनकी बेटी चांदनी कुमारी की शादी उनके जिंदा रहते हो
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