: तुर्किए में 7.8 तीव्रता के भूकंप के झटके, कई इमारतों को नुकसान, सीरिया तक कांपी धरती
Mon, Feb 6, 2023
भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। नूर्दगी से 23 किलोमीटर पूर्व की ओर यह झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 7.8 मापी गई। बताया जा रहा है कि इस दौरान पांच लोगों की मौत हो गई है।इमारतों को नुकसान पहुंचा है। यह आंकड़ा अभी बढ़ भी सकता है। सनलिउर्फा मेयर ने इसकी पुष्टि की है।यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, भूकंप का केंद्र गाजियांटेप से लगभग 33 किलोमीटर (20 मील) और नूरदगी शहर से लगभग 26 किलोमीटर (16 मील) दूर था। यह 18 किलोमीटर (11 मील) की गहराई पर केंद्रित था।जानकारी के मुताबिक, भूकंप के झटके दूर सीरिया तक महसूस किए गए। भूकंप के झटके इतने तेज थे कि कई इमारतों को नुकसान पहुंचने की खबरें आई हैं। संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की मानें तो भूकंप की वजह से कई लोगों के हताहत होने की आशंका है।राष्ट्रपति एर्दोगन बोले- इस आपदा से मिलकर निपटेंगेतुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने ट्विटर पर कहा कि भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों में खोज और बचाव दलों को तुरंत भेजा गया। हमें उम्मीद है कि हम इस आपदा को एक साथ जल्द से जल्द और कम से कम नुकसान के साथ पार कर लेंगे।
: गैस गीजर फटने से महिला की हालत गंभीर
Mon, Feb 6, 2023
शाहगंज के दरगाह कमाल खां इलाके में रविवार को हादसा सामने आया। यहां गैस गीजर फटने से मकान की छत भी गिर गई। इसके मलबे में पति-पत्नी दब गए। पांच साल में उनकी बेटी भी इस हादसे की चपेट में आ गई। छत गिरने के बाद चीख पुकार सुनकर लोग बस्ती से बाहर आए और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। जहां पर उनका इलाज जारी हैइस घटना के बाद महिला की हालत गंभीर बनी हुई है। घटना सुबह 6 बजे की बताई जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार दरगाह कमाल खां की रहने वाली 25 वर्षीय गजाला पत्नी करीम चाय बनाने के लिए रसोई में गई हुई थीं। इसी बीच गैस का गीजर तेज धमाके से फटा और मकान की छत ढह गई। धमाके की आवाज को सुनकर आस-पास के लोग भी वहां पर पहुंचे। तकरीबन 45 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद गजाला और करीम को बाहर निकाला जा सका। रसोई में गैस चूल्हा जलने के चलते वह बुरी तरह से झुलस भी गई।इस बीच दोनों की छह साल की बेटी सफिया भी हादसे की चपेट में आ गई। स्थानीय लोगों के द्वारा इस हादसे की सूचना पुलिस को भी दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया। घायलों का इलाज अस्पताल में जारी है। इस बीच घायलों के रिश्तेदारों और परिजनों को भी सूचित कर दिया गया है। सुबह-सुबह हुए इस हादसे के बाद कॉलोनी के लोगों ने भी दहशत का माहौल है। क्षेत्रवासियों ने बताया कि जिस दौरान यह हादसा हुआ उस समय ज्यादातर लोग तो नींद में ही थे। चीख-पुकार सुनकर उन्हें इस हादसे के बारे में जानकारी लगी। उसके बाद आनन-फानन में राहत और बचाव काम शुरू किया गया और पुलिस को सूचना दी गई।
: संत रविदास जी की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनको नमन किया
Sun, Feb 5, 2023
गुरु रविदास के जन्मदिन को गुरु रविदास जयंती के रूप में भारत में मनाया जाता है। रविवार 5 फरवरी को संत रविदास जी की जयंती मनाई जा रही है।ये माघ पूर्णिमा यानी माघ महीने में पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। यह वर्षगांठ भारत में दुनिया भर के लोगों द्वारा मनाई जाती है। इस दिन श्रद्धालु नदी में पवित्र स्नान करके अनुष्ठान करते हैं। रविदास जयंती 2020 में 9 फरवरी और 2021 में 16 फरवरी को मनाई गई थी। जातिवाद का मुकाबला करने के उनके प्रयासों के कारण, गुरु रविदास को आध्यात्मिक व्यक्ति और समाज सुधारक दोनों के रूप में माना जाता है। वह संत कबीर के समय में थे। संत रविदास जी की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनको नमन किया है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा, ''संत रविदास जी की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए हम उनके महान संदेशों का स्मरण करते हैं। इस अवसर पर उनके विचारों के अनुरूप न्यायप्रिय, सौहार्दपूर्ण और समृद्ध समाज के अपने संकल्प को दोहराते हैं। उनके मार्ग पर चलकर ही हम कई पहलों के जरिए गरीबों की सेवा और उनका सशक्तिकरण कर रहे हैं।''गुरु रविदास मध्यकाल एक भारतीय संत थे, जिन्होंने समाज में फैली जात-पात का विरोध किया था। इन्होंने रैदासिया अथवा रविदासिया पंथ की स्थापना की थी।-गुरु रविदास (रैदास) का जन्म वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर गांव में हुआ था। उनका जन्म विवार को संवत 1398 को हुआ। इनके पिता का नाम संतोख दास तथा माता का नाम कलसां देवी था।रविदास जयंती पर, उनके अनुयायी उनका जन्मदिन मनाने के लिए उनके जन्मस्थान पर जाते हैं। रविदास जयंती के दिन रविदास जी का जन्मदिन मनाया जाता है। रविदास जी जाति व्यवस्था को खत्म करने के अपने काम के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने भक्ति आंदोलन में भी योगदान दिया है और कबीर जी के घनिष्ठ मित्र और शिष्य के रूप में प्रसिद्ध थे। उनके और कबीर जी के बीच अध्यात्म पर बहुत सारी बातचीत होती थी। उनकी शिष्या मीराबाई थीं।-रविदासिया धर्म, के लोग सिर्फ रविदास जी को मानते हैं। इसके अलावा कबीरपंथी, सिख भी रविदास जी की पूजा करते हैं।