: शीतला माता जनपद वासियों की कुलदेवी
Sat, Dec 17, 2022
मां शीतला देवी मंदिर मैं मैनपुरी जनपद ही नहीं बल्कि दूर-दूर के जनपदों से भक्तजन दर्शन करने आते हैं मां शीतला देवी मंदिर मैनपुरी जनपद में स्थित है मां शीतला जनपद वासियों के लिए कुलदेवी कहलाती हैं भक्तजनों की अगाध श्रद्धा अटूट आस्था का केंद्र है वर्ष में आने वाले दो नवरात्र शारदीय नवरात्र एवं शुक्ल पक्ष के नवरात्र में माता शीतला के मंदिर में मेला लगता है एवं बड़ी दूर दूर से भक्तजन अपनी अपनी मनोकामना लेकर माता के द्वार आते हैंभौगोलिक मान्यता के अनुसार यहां पर लगने वाले दोनों मेलों में झंडा यानी नेजा मनोकामना पूर्ण हेतु अधिकांश भक्तजन गाना गाते बजाते ढोल और बैंड के साथ नाचते गाते माता को समर्पित करते हैं मेरी भी जीवन में आने वाली समस्त खुशियां या यूं कहें मेरे दामन में समटी हुई समस्त खुशियां माता के ही प्रसाद की देन है माता के चमत्कार का कोई वर्णन नहीं कर सकता है इसीलिए वर्ष भर भक्त जनों का माता के मंदिर पर तांता लगा रहता है हमारी जनपद मैनपुरी का जिला प्रशासन भी माता के चमत्कार के आगे नतमस्तक है प्रत्येक वर्ष लगने वाली ग्राम सुधार प्रदर्शनी मेला नुमाइश को जिला प्रशासन बड़ी-ही मुस्तैदी एवं आस्था के साथ संपन्न करवाने के लिए तत्पर रहता है साथ ही साथ जनपद वासी भी अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करते हैं हमारे यहां ग्राम सुधार प्रदर्शनी के दौरान होने वाले समस्त सांस्कृतिक कार्यक्रम युवा पीढ़ी को सीख देने वाले एवं मनोरंजन वर्धक होते हैंप्रेषक अवनीश दुबे जिला कलेक्ट्रेट मैनपुरी
: आज से शुभ लग्न मुहूर्त स्थगित खरमास शुरू
Sat, Dec 17, 2022
खरमास 16 दिसंबर से 14 जनवरी
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सूर्य के बृहस्पति की धनुराशि में गोचर करने से खरमास शुरू होता है। यह स्थिति मकर संक्रान्ति तक रहती है। इस कारण मांगलिक कार्य नहीं होते है। जैसे ही सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है तभी से खरमास आरम्भ हो जाता है और इसी के साथ शादी विवाह एवं अन्य मांगलिक कार्य निषेध हो जाते है।इस माह में सूर्य धनु राशि का होता है। ऐसे में सूर्य का बल वर को प्राप्त नहीं होता। इस वर्ष 16 दिसंबर प्रातः 09:55 पर सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने से लेकर 14 जनवरी 2022 रात्रि 08:43 सूर्य के मकर राशि मे प्रवेश करने तक तक खरमास रहेगा। वर को सूर्य का बल और वधू को बृहस्पति का बल होने के साथ ही दोनों को चंद्रमा का बल होने से ही विवाह के योग बनते हैं। इस पर ही विवाह की तिथि निर्धारित होती है।खरमास शुरू हो जाने से विवाह संस्कारों पर एक माह के लिए रोक लग जाएगी। साथ ही अनेक शुभ संस्कार जैसे जनेऊ संस्कार, मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश भी नहीं किया जाएगा। हमारे भारतीय पंचांग के अनुसार सभी शुभ कार्य रोक दिए जाएंगे। खरमास कई स्थानों पर मलमास के नाम से भी विख्यात है। शास्त्रों में मलमास शब्द की यह व्युत्पत्ति निम्न प्रकार से बताई गई है।‘मली सन् म्लोचति गच्छतीति मलिम्लुचः’अर्थात् ‘मलिन (गंदा) होने पर यह आगे बढ़ जाता है।’हिन्दू धर्म ग्रंथों में इस पूरे महीने में किसी भी शुभ कार्य को करने की मनाही है। जब गुरु की राशि धनु में सूर्य आते हैं तब खरमास का योग बनता है। वर्ष में दो मलमास पहला धनुर्मास और दूसरा मीन मास आता है। यानी सूर्य जब-जब बृहस्पति की राशियों धनु और मीन में प्रवेश करता है तब खर या मलमास होता है क्योंकि सूर्य के कारण बृहस्पति निस्तेज हो जाते हैं। इसलिये सूर्य के गुरु की राशि में प्रवेश करने से विवाह संस्कार आदि कार्य निषेध माने जाते हैं। विवाह और शुभ कार्यों से जुड़ा यह नियम मुख्य रूप से उत्तर भारत में लागू होता है जबकि दक्षिण भारत में इस नियम का पालन कम किया जाता है। मद्रास, चेन्नई, बेंगलुरू में इस दोष से विवाह आदि कार्य मुक्त होते हैं।गीता सार !!
खरमास में व्रत का महत्व
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जो व्यक्ति खरमास में पूरे माह व्रत का पालन करते हैं उन्हें पूरे माह भूमि पर ही सोना चाहिए. एक समय केवल सादा तथा सात्विक भोजन करना चाहिए. इस मास में व्रत रखते हुए भगवान पुरुषोत्तम अर्थात विष्णु जी का श्रद्धापूर्वक पूजन करना चाहिए तथा मंत्र जाप करना चाहिए. श्रीपुरुषोत्तम महात्म्य की कथा का पठन अथवा श्रवण करना चाहिए. श्री रामायण का पाठ या रुद्राभिषेक का पाठ करना चाहिए. साथ ही श्रीविष्णु स्तोत्र का पाठ करना शुभ होता है।मास के आरम्भ के दिन श्रद्धा भक्ति से व्रत तथा उपवास रखना चाहिए. इस दिन पूजा – पाठ का अत्यधिक महात्म्य माना गया है. इसमास मे प्रारंभ के दिन दानादि शुभ कर्म करने का फल अत्यधिक मिलता है. जो व्यक्ति इस दिन व्रत तथा पूजा आदि कर्म करता है वह सीधा गोलोक में पहुंचता है और भगवान कृष्ण के चरणों में स्थान पाता है।खरमास की समाप्ति पर स्नान, दान तथा जप आदि का अत्यधिक महत्व होता है. इस मास की समाप्ति पर व्रत का उद्यापन करके ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए और अपनी श्रद्धानुसार दानादि करना चाहिए. इसके अतिरिक्त एक महत्वपूर्ण बात यह है कि खरमास माहात्म्य की कथा का पाठ श्रद्धापूर्वक प्रात: एक सुनिश्चित समय पर करना चाहिए।इस मास में रामायण, गीता तथा अन्य धार्मिक व पौराणिक ग्रंथों के दान आदि का भी महत्व माना गया है. वस्त्रदान, अन्नदान, गुड़ और घी से बनी वस्तुओं का दान करना अत्यधिक शुभ माना गया है।खरमास की पौराणिक प्रचलित कथा
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लोक कथाओं के अनुसार खरमास (मलमास) को अशुभ माह मानने के पीछे एक पौराणिक कथा बताई जाती है। खर गधे को कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मार्कण्डेय पुराण के अनुसार एक बार सूर्य अपने सात घोड़ों के राथ को लेकर ब्राह्मांड की परिक्रमा करने के लिए निकल पड़ते हैं।इस परिक्रमा के दौरान सूर्य देव को रास्ते में कहीं भी रूकने की मनाही होती है, लेकिन सूर्य देव के सातों घोड़े कई साल निरंतर दौड़ने की वजह से जब प्यास से व्याकुल हो जाते हैं सुखदेव पानी भरने के लिए निकट बने एक तालाब के पास रुक जाते हैं तभी उन्हें स्मरण होता है कि उन्हें रास्ते में तो कहीं रुकना ही नहीं है तो वे कुंड के पास कुछ गधों को अपने रक्त से जोड़कर आगे बढ़ जाते हैं जिससे उनकी गति धीमी हो जाती है यही वजह है कि खरमास को अशुभ माह के रूप में देखा जाता हैप्रेषक पंडित कन्हैयालाल मिश्र( सर्वेश्वर नाथ महादेव मंदिर राम राम बैंक अलीगंज लखनऊ)
: लखनऊ का चिड़ियाघर कुकरेल पर स्थानांतरित होगा
Mon, Dec 5, 2022
नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान लखनऊ यानी कि लखनऊ का चिड़ियाघर अपने वर्तमान जगह से स्थानांतरित होकर कुकरेल बन छेत्र में स्थापित होगा बढ़ती आबादी व ध्वनि प्रदूषण मुख्य वजह बताई जा रही है जिसकी वजह से कुकरेल फॉरेस्ट क्षेत्र में चिड़ियाघर को स्थापित किया जाएगा 150 एकड़ में बनने वाले इस न चिड़ियाघर के साथ-साथ 350 एकड़ की नाइट सफारी बनाने का भी शासन का प्रस्ताव है प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले महा प्रदेश कैबिनेट कमेटी में यह प्रस्ताव पास हो चुका है और केंद्रीय चिड़ियाघर को भेजा गया है
इस संबंध में जानकारी देते हुए नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान लखनऊ के निदेशक विष्णु कांत मिश्रा ने बताया है कि बढ़ती आबादी व ध्वनि प्रदूषण के कारण प्राणी उद्यान को कुकरेल फॉरेस्ट क्षेत्र के अंतर्गत 150 एकड़ की भूमि पर स्थापित करना प्रदेश सरकार की तरफ से प्रस्तावित है यह प्रस्ताव अनुमोदन हेतु केंद्रीय चिड़ियाघर को भेजा गया है साथ ही साथ कुकरेल क्षेत्र में 350 अकड़ मेन नाईट सफारी बनाने का भी प्रस्ताव है जब चिड़ियाघर नई जगह बनकर तैयार हो जाएगा तब यहां की जानवर वहां पर स्थानांतरित कर दिए जाएंगे उन्होंने जानकारी देते हुए बताया लखनऊ का चिड़ियाघर प्रदेश के प्राचीनतम चिड़िया घरों में से एक है यह 1921 को स्थापित किया गया था जिसमें 100 से अधिक प्रजातियो के 1000 से ज्यादा वन्य जीव एवं चिड़िया है जिसमें भालू बंदर मगरमच्छ शेर चीता हिरण एवं मांसाहारी हिंसक जीव आदि 1921 से लेकर के अब तक होने वाली तमाम पीढ़ियों के बचपन का मनोरंजन का केंद्र रहा है यह चिड़ियाघर नरही स्थित 29 हक्टर में फैला हुआ है शहर के बीचोबीच स्थित चिड़ियाघर के जानवरों को यातायात एवं ध्वनि प्रदूषण से बचाने के लिए कुकरेल वन क्षेत्र मे स्थापित
किया जाना प्रस्तावित है