: रुद्राक्ष धारण करने से मिलते हैं शुभ फल लेकिन धारण करने का तरीका जरूर जान ले
Sat, Nov 26, 2022
सनातन धर्म के सभी ग्रंथों सहित पुराणों आदि में भगवान शिव के प्रिय रुद्राक्ष के महत्व को अभिव्यक्त किया गया है जिनसे हमें रुद्राक्ष के आकार प्रकार एवं उनसे मिलने वाले फलों तथा धारण करने की सही विधि का ज्ञान प्राप्त होता है रुद्राक्ष का उच्चारण मात्र ही सभी फलों का देने वाला होता है कहते हैं इसके नाम को जपने से 10 गायों को दान देने के समान फल प्राप्त होता है
रुद्राक्ष पहन कर सभी भक्तों के कष्ट दूर हो जाते हैं और उनको अपने मनोकामना की प्राप्ति होती है रुद्राक्ष को धारण एवं जो अपने से करोड़ों लोगों की प्राप्ति होती है जब कोई साधक रुद्राक्ष पहन कर अभीष्ट मंत्रों का जप करता है तब उसक मनोरथ सुलभ होने लगते हैं रुद्राक्ष पहनकर शिव मंत्रों का जप एवं शिव पूजन अत्यंत लाभदायक सिद्ध होता है ध्यान रहे यह सब मनोरथ तभी सिद्ध होते हैं जो रुद्राक्ष को धारण करने की विधि त्रुटि विहीन की जाए शिव पुराण व अन्य धर्म ग्रंथों का सार लेते हुए धारण करने की विधि पर प्रकाश डाला गया है आइए जानते हैंरुद्राक्ष को धारण करना एक महत्वपूर्ण कार्य होता है इसको धारण करने से पूर्व कुछ पवित्र नित्यकर्म किए जाते हैं जिसके पश्चात रुद्राक्ष अभिमंत्रित हो धारण यह उपयोग करने योग्य हो जाता है सर्वप्रथम याद रखने योग्य विषय है की जवाब रुद्राक्ष की माला रुद्राक्ष जो भी धारण करें उसे शुक्ल पक्ष के सोमवार को ग्रहण करना चाहिए
सर्वप्रथम धारण करने से पूर्व रुद्राक्ष को सरसों के तेल में 5 से 7 दिन भिगोकर रखना चाहिए तत्पश्चात रुद्राक्ष को गंगाजल एवं गाय के दूध के साथ स्नान कराएं तथा साथ ही साथ पंचामृत एवं पंचगव्य से भी स्नान कराएं और इसके साथ ही पंचाक्षर मंत्र ओम नमः शिवाय का जाप करते रहे इस विधि से अभिमंत्रित कर धूप दीप बिल पत्र लाल चंदन एवं लाल फूल पूजन करें तथा शिवलिंग से स्पर्श कराकर हवन की भभूति लगाएं पूर्व या उत्तर की दिशा में मुख करके दिए गए मंत्र का उच्चारण करते हुए धारण करें ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि धीमहि तन्नो रुद्र रुद्राक्ष की मांगों को शुद्ध लाल धागे में पिरो कर धारण करना उत्तम रहता है: रुद्राक्ष को पूर्णिमा संक्रांति ग्रहण या अमावस्या के दिन धारण करने से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है शिव पुराण के अनुसार रुद्राक्ष के आधार को ब्रह्मदेव माना गया है जबकि नाभि को विष्णु भगवान का स्थान दिया गया है एवं चेहरे को रुद्र माना गया है और प्रत्येक क्षेत्र में कोटि कोटि देवताओं का वास कहां गया है इसलिए रुद्राक्ष को सही विधि पवित्रता शुद्धता और जान के साथ धारण करने से जीव के कष्ट दूर होते हैं और सुख में जीवन प्राप्त होता है साथ ही साथ रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति को शुद्ध आचार विचार के साथ साथ सात्विक भोजन का भी ध्यान रखना होगा
सौजन्य से
आचार्य नारायण कुमार दीक्षित नैमिषारण्य सीतापुर
: बुक कैफे बच्चों को देता है पढ़ाई के साथ खेलने का भी मौका
Sat, Nov 12, 2022
आजकल बच्चों को पढ़ाई के साथ भी फन चाहिए होता है तो ऐसे में बुक कैफे और लाइब्रेरी का ट्रेंड समाज में आकार ले रहा है जहां पहले शहर या कॉलेज मैं एक या दो लाइब्रेरी या पुस्तकालय देखने को मिलते थे आज के समय में परिवेश बदल रहा है आपने देखा होगा हमारे समाज में गली मोहल्लों में तमाम छोटी-बड़ी लाइब्रेरी उदय हुई है जिसका की लाभ आज की युवा पीढ़ी और पढ़ने वाले बच्चे लेते हुए देखे जा सकते हैं यह पुस्तकालय खोलने का चलन जहां एक और युवाओं को अपने सब्जेक्ट से संबंधित पुस्तक उपलब्ध कराने का कार्य करता है वही उनको पढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण भी उपलब्ध कराता है साथ ही साथ खाली पड़ी तमाम कमर्शियल और घरेलू जगहों का सदुपयोग करते हुए बुद्धिजीवी इसको व्यापार का भी आकार देने लगे हैं जो भी पाठक इन लाइब्रेरी में आते हैं वह पाठ्य सामग्री के साथ साथ अनुकूल माहौल पानी चाय कोल्ड ड्रिंक की सुविधा व बैठने की आरामदायक वातानुकूलित जगह को देखते हुए उचित मूल्य भी लाइब्रेरी या पुस्तकालय संचालक को प्रदान करते हैं जिससे कि वह इन निजी पुस्तकालय को और सुविधाजनक बनाया जा सकेआजकल प्राइमरी क्लास के बच्चे भी इन पुस्तकालय के प्रति आकर्षित हुए हैं ऐसे निजी पुस्तकालय उन्हें जहां बच्चों का पुस्तकों के प्रति ध्यान आकर्षित किया है वही एक नया रोजगार भी विकसित किया है अभी पाठ्य सामग्री के आधार पर देखा जाए तो प्राइमरी शिक्षा से संबंधित बच्चों को पाठ्य सामग्री ऐसी पुस्तकालय में उपलब्ध नहीं हो पाती है जिससे कि वह 1 और खेल और पढ़ाई को मिश्रित करते हुए अपने अपने घरों में भी छोटा सा पुस्तकालय या बुक कैफे स्थापित कर सकते हैं जिससे कि उनको पढ़ाई के साथ-साथ खेल का भी आनंद आएगा और स्थान परिवर्तन से अनुकूल माहौल भी बनेगा ऐसे ही कुछ टिप्स विद्यार्ट्री मॉडर्न स्कूल में पढ़ने वाली सिक्स स्टैंडर्ड की स्टूडेंट आर्य गुप्ता और सेकंड स्टैंडर्ड की स्टूडेंट समृद्धि गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया है कि हमारे घर में जो भी हमारे सब्जेक्ट से रिलेटेड स्टोरी टाइप की कोई भी बुक्स जो पुरानी क्लास की थी या मार्केट में उपलब्ध है ऐसी सभी बुक्स को एक जगह एकत्रित करके घर में किसी खाली पड़े स्थान को बुक कॉर्नर या बुक कैफे नाम से आकार दिया जा सकता है और अपने मनोरंजन के हिसाब से समय-समय पर अपनी रेगुलर स्टडीज के बाद अपने माइंड को फ्रेश करने ऐसे बुक कॉर्नर में आकर अपने मनपसंद की पुस्तकों का आनंद उठाया जा सकता है साथ में कुछ स्नैक्स या कंसंट्रेट करने वाला म्यूजिक हो तो और भी आनंद आता है आप भी ट्राई करें
: या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता नमस्तस्ए नमस्तस्ए नमस्तस्ए नमो नमः
Fri, Nov 11, 2022
जैसे नेत्र रहते हुए भी लोग रात्रि में वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाते हैं परंतु दीपक लाने पर वे अपना रास्ता स्पष्ट देख लेते हैं इसी प्रकार वेद पाठ ज्ञान एवं त्याग तपस्या अथवा यज्ञ कर्मों के बल पर मुझे देख पाना असंभव है जब तक भक्ति का प्रकाश नहीं हो जोधपुर से योगियों की सेवा करता है वह मेरा अत्यंत भक्त है और जो विशुद्ध ज्ञान एवं परमानंद से युक्त है उसके हाथ की हथेली में मुक्ति रखी हुई है मात्र तर्कों से तथा कृतियों के अध्ययन से वासनाओं से परिपूर्ण इस माया का नाश कैसे हो सकता है यह कभी भी संभव नहीं है केवल परम ज्ञान से ही इसका विनाश किया जा सकता है तथा उसके उपरांत उसके पुणे लौटने का कोई भेद नहीं होता मैं ही यह शरीर हूं ऐसा विचार भ्रम है अविद्या है तथा यही भ्रम की जननी है मैं शरीर नहीं हूं मैं आत्मा हूं ऐसा अनुभव विद्या है तथा तथा जब तुम नेति नेति की प्रक्रिया से परमात्मा को जानने में समर्थ होते हैं तभी तुम समस्त कर्मों का त्याग कर सकते हो अन्यथा तुम्हें अपने कर्तव्यों का पालन करते रहना होगा जिस जगह साक्षात्कार होता है कि शरीर आत्मा इंद्रियां से पृथक है उसी क्षण माया का जो संसार का मूल कारण है विनाश हो जाता है