: यमुना प्राधिकरण की नई आवासीय प्लॉट स्कीम हिट, 945 प्लॉट्स
Wed, Jul 10, 2024
यमुना कास प्राधिकरण से जुड़ी इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। यमुना प्राधिकरण ने अपनी नई आवासीय प्लॉट की स्कीम लॉन्च के चार दिन में ही हिट हो गई। जेवर में बन रहे नोएडा एयरपोर्ट के पास नई आवासीय योजना की लॉन्चिंग के बाद से बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। इस योजना के तहत अब तक 5,919 (करीब 6 हजार) आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिसमें से कई लोगों ने अपनी जमा राशि भी जमा कर दी है। यह आंकड़ा केवल चार दिनों का है, जो इस योजना की लोकप्रियता और लोगों की उत्सुकता को दर्शाता है। इस स्कीम में 945 प्लॉट्स हैं। खास बात यह है कि इसमें किसानों को साढ़े 17 परसेंट आरक्षण दिया गया है।यमुना प्राधिकरण ने नई आवासीय योजना की शुरुआत की है, जिसमें बड़ी संख्या में प्लॉट और आवासीय इकाइयां शामिल हैं। इस योजना के तहत आवेदनकर्ताओं को शुरुआती 10 प्रतिशत पैसा जमा करना होता है, जिसके बाद उन्हें योजना में शामिल किया जाता है। इस नई योजना की सफलता को देखते हुए यमुना प्राधिकरण ने और भी योजनाओं को जोड़ने की योजना बनाई है।
जल्द लॉन्च होंगी कई स्कीमें
आने वाले समय में प्राधिकरण विभिन्न नए सेक्टरों और मास्टर प्लान के तहत अधिक प्लॉट और आवासीय इकाइयों को शामिल करेगा। इस साल के अंत तक और भी कई बड़ी आवासीय योजनाएं लाने की योजना है, जिसमें दिसंबर महीने में एक विशेष योजना भी शामिल है। इस साल ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का वार्षिक लक्ष्य करोड़ों रुपये का है, जिसमें समूह हाउसिंग और अन्य बड़ी आवासीय योजनाएं शामिल होंगी। यह प्राधिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो क्षेत्र के विकास और आवासीय सुविधाओं के विस्तार में योगदान देगा।
: भाजपा का उत्तर प्रदेश में खेल खराब 33 पर सिमटी क्या स्टार प्रचारकों की अनदेखी करना है वजह
Tue, Jun 4, 2024
लखनऊ चार जून लोकसभा चुनाव के नतीजों में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में भगवा दल की सीटें कम हुई हैं। दोपहर 12 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, सबसे बड़ा सियासी उलटफेर यूपी में दिख रहा, जहां पर सपा और कांग्रेस वाले इंडिया गठबंधन ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है।सपा 35, कांग्रेस आठ सीटों पर आगे चल रही है, जबकि बीजेपी को बंपर नुकसान होते हुए महज 34 सीटों पर ही बढ़त हासिल है। बड़ी संख्या में सीटें घटने की वजह से बीजेपी 272 का बहुमत का आंकड़ा भी पार करती नहीं दिख रही। हालांकि, एनडीए गठबंधन जरूर सरकार बनाता दिख रहा है। यूपी में बीजेपी के बड़े सियासी उलटफेर के पीछे कई वजहें दिखाई दे रही हैं। आम चुनाव के दौरान सपा और कांग्रेस ने जिस तरह से संविधान, आरक्षण, बेरोजगारी जैसे मुद्दे उठाए, नतीजों से साफ लग रहा है कि जमीन पर यह सब काम कर गया। वहीं, बीजेपी जिस राम मंदिर मुद्दे के सहारे देशभर में 400 पार की उम्मीद लगाए बैठी थी, वो यूपी में भी काम नहीं कर सका।
चुनाव में खूब उछला संविधान और आरक्षण का मुद्दा
यूपी में बीजेपी की जमीन खिसकने और सपा व कांग्रेस के इंडिया गठबंधन की सीटें बढ़ने के पीछे राहुल गांधी, अखिलेश यादव के वादे भी हैं। दोनों नेता हर चुनावी रैली में दावा करते रहे कि यदि मोदी सरकार 400 से ज्यादा सीटें जीतती है तो संविधान में बदलाव करके आरक्षण को हटा दिया जाएगा। इसके साथ ही, राहुल गांधी ने जितनी आबादी उतना हक का नारा देकर पिछड़ों को अपने और सपा के साथ जोड़ लिया। अखिलेश का पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूला भी काम कर गया और पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक समुदाय का वोट इंडिया गठबंधन की ओर चला गया। पिछले लोकसभा चुनाव में बसपा का वोटबैंक ने मायावती के उम्मीदवारों की बजाए सपा और कांग्रेस के कैंडिडेट्स को जमकर वोट दिया।
महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दों ने बिगाड़ा बीजेपी का खेल
पिछले एक दशक में कांग्रेस समेत समूचा विपक्ष बीजेपी सरकार पर महंगाई बढ़ाने का आरोप लगाता रहा। गैस सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल समेत रोजमर्रा की जरूरतों के सामान की बढ़ती कीमतों के जरिए भी बीते दस सालों में विपक्ष ने मोदी सरकार को जमकर घेरा है। इस चुनाव में प्रचार के दौरान भी राहुल गांधी, अखिलेश यादव समेत इंडिया गठबंधन के नेताओं ने महंगाई का मुद्दा पूरे जोर-शोर से उठाया, जिसका असर आज आए चुनावी नतीजों में भी दिखाई दिया। वहीं, विपक्षी नेता बेरोजगारी बढ़ने का भी दावा करते रहे और कांग्रेस ने अपने मेनिफेस्टो में सरकार बनने पर 30 लाख नौकरियों का वादा कर दिया। नतीजों को देखकर लगता है कि उनका यह वादा
महिलाओं को लुभा गया एक लाख का वादा
कांग्रेस ने इस बार अपने मेनिफेस्टो में कई अहम वादे किए। इसमें से एक वादा गरीब महिलाओं को हर महीने साढ़े आठ हजार रुपये और सालाना एक लाख रुपये देने का था। राहुल गांधी हर रैली में यह वादा दोहराते नजर आए, जिससे दूर-दराज गांवों में रह रहे परिवारों तक यह पहुंच गया। मंच से राहुल द्वारा कहे गए खटाखट जैसे नारों ने भी लोगों का काफी ध्यान आकर्षित किया और लोगों के दिमाग में एक लाख रुपये हर साल दिए जाने की बात बैठ गई। यह सब मुद्दे और वादे आखिरकार इंडिया गठबंधन के पक्ष में गए और सपा व कांग्रेस, दोनों की ही सीटों पर काफी फायदा हुआ।
: भाजपा की अयोध्या से भी राम-राम अगल-बगल की सीट भी फसी
Tue, Jun 4, 2024
लखनऊ 4 जून लोकसभा चुनाव में भाजपा का भगवा दुर्ग ढह गया और अयोध्या सपा की हो गई। इंडिया गठबंधन के सपा उम्मीदवार अवधेश प्रसाद ने भाजपा के लल्लू सिंह को 56,934 वोटों से हराकर यहां की फैजाबाद संसदीय सीट पर कब्जा कर लिया। बसपा प्रत्याशी सच्चिदानंद पांडेय और भाकपा के अरविंद सेन यादव अपनी जमानत भी नहीं बचा सके।यूपी में भाजपा अपनी उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सकी। पिछली बार 62 सीटें जीतने वाली भाजपा इस बार 33 पर सिमट गई। सेंट्रल यूपी में उसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा।भाजपा ने राममंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा और निर्माण को जिस तरह से जनता से बीच उठाया, उसका फायदा उसे नहीं मिला। राममंदिर के इर्द-गिर्द की सभी लोकसभा सीटें भाजपा हार गई। अयोध्या मंडल में उसका रिपोर्ट कार्ड ''जीरो'' रहा। इतना ही नहीं वर्ष 2019 के चुनाव में भाजपा ने मध्य यूपी की 24 में से 22 सीटें जीती थीं। लेकिन, इस बार उसे इस क्षेत्र में 13 सीटों का नुकसान हुआ। वहीं, कांग्रेस को 3 और सपा को 11 सीटों का फायदा हुआ।अयोध्या मंडल की फैजाबाद सीट भी भाजपा नहीं बचा सकी। सपा ने अयोध्या में दलित प्रत्याशी व पूर्व मंत्री अवधेश प्रसाद को उतारा, जिन्होंने भाजपा के लल्लू सिंह को 50 हजार से ज्यादा मतों से पराजित किया। इस मंडल की सबसे चर्चित सीट अमेठी में भाजपा प्रत्याशी व कद्दावर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी कांग्रेस के केएल शर्मा के सामने कहीं भी नहीं टिक सकीं। बाराबंकी में कांग्रेस के तनुज पुनिया ने दो लाख से ज्यादा मतों से भाजपा प्रत्याशी राजरानी रावत को हराकर साबित कर दिया कि मंदिर से उपजी किसी तरह की लहर यहां तक नहीं पहुंच सकी। अयोध्या मंडल के अम्बेडकरनगर क्षेत्र में पिछली बार बसपा के टिकट पर सांसद चुने गए रितेश पांडे पर भाजपा ने इस बार दांव लगाया था। उसका यह दांव भी फ्लॉप साबित हुआ। सपा के लालजी वर्मा ने उन पर बढ़त ली।