: पर्यटन विकास की निर्माणाधीन परियोजनाओं को 15 जनवरी तक निपटाए:-- जयवीर सिंह
Thu, Dec 22, 2022
पर्यटन विकास की निर्माणाधीन परियोजनाओं को
आगामी 15 जनवरी, तक पूरा करेअप्रैल, 2022 से अक्टूबर, 2022 तक 194 पर्यटन से संबंधित योजनाएं पूर्णपर्यटन मंत्री ने विभागीय कार्यों की समीक्षा की
लखनऊः 22 दिसम्बर, 2022
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने पर्यटन विकास एवं मा0 मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना के क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं तथा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि निर्माणाधीन परियोजनाओं के सभी कार्य गुणवत्ता एवं समयबद्धत्ता के साथ आगामी 15 जनवरी, 2023 तक हरहाल में पूरा करें एवं उससे संबंधित हाई रिज्युलूशन फोटोग्राफ एवं क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। जिन परियोजनाओं के लिए धनराशि आवंटित कर दी गई है उससे जुड़ी टेंण्डर की प्रक्रिया पूरा कराकर निर्माण कार्य जल्द-जल्द शुरू कराया जाये। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का प्रयोग करने पर संबंधित कार्यदायी संस्था के खिलाफ विधिक कार्यवाही की जायेगी।
पर्यटन मंत्री आज यहां पर्यटन भवन में विगत अप्रैल, 2022 से अक्टूबर, 2022 तक समय-समय पर आयोजित समीक्षा बैठकों में दिए गए निर्देशों एवं निर्णयों के कार्यान्वयन के प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कार्यदायी संस्थाओं के प्रोजेक्ट मैनेजर एवं पर्यटन विभाग के क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले एवं निर्माण के समय आपसी समन्वय बनाकर लोकेशन पर जाकर निरीक्षण करें। उन्होंने कहा कि कुछ कार्यदायी संस्थाओं द्वारा निर्माणाधीन परियोजनाओं को तेजी से पूरा नहीं कर रहे हैं, यह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि लम्बित परियोजनाओं एवं अवशेष कार्यों को तत्काल पूरा करा लिया जाये।
जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न धार्मिक पौराणिक एवं ऐतिहासिक स्थलों पर पर्यटकों के लिए स्थापना सुविधाओं से संबंधित योजनाएं शुरू की गई हैं। इन योजनाओं के पूरा हो जाने से पर्यटकों की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी तथा साफ-सुथरा वातावरण मिलने पर प्रदेश की छवि भी देशी और विदेशी शैलानियों के बीच में एक अच्छा संदेश पहुँचायेगी। उन्होंने हर ऐजेन्सी को आवंटित परियोजनाओं की बिन्दुवार समीक्षा की और कमियां पाये जाने पर कुछ एजेन्सियों को अपनी कार्य पद्धति में बदलाव लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में उ0प्र0 ने पर्यटन के क्षेत्र में भारी निवेश आने की संभावना है, इससे प्रदेश में पर्यटकों का आवागमन बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि निर्मित परियोजनाओं में उच्च गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया जाए।
जयवीर सिंह ने कहा कि कार्य में किसी प्रकार की डुप्लीकेसी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने वृन्दावन में बनी हुई सड़क को दोबारा बनाये जाने की जानकारी होने पर इसकी जांच हेतु मण्डलायुक्त को पत्र लिखने का निर्देश दिया, ताकि इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की जा सके। उन्होंने महाराजा सुहेलदेव से संबंधित कार्य बसंत पंचमी से पूर्व पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने धनराशि स्वीकृत होने के बाद कार्य में अपेक्षित गति न लाने पर नाराजगी व्यक्त की।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि उ0प्र0 ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2023 के लिए पूरी तैयारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस समिट के दौरान 10 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य रखा है। पर्यटन सेक्टर में भारी निवेश आाने की सम्भावना है। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया एवं जापान से भी पर्यटन के क्षेत्र में निवेश के लिए प्रतिष्ठित कम्पनियों ने रूचि दिखाई है। इसके लिए पर्यटन विभाग तैयारी शुरू करे। उन्होंने कहा कि पर्यटन सेक्टर के लिए यह सुनहरा अवसर है, इसलिए प्रदेश की क्षमता एवं सामर्थ्य को निवेशकों के समक्ष प्रदर्शित करके अधिक से अधिक निवेश प्राप्त करना है। उन्होंने मा0 मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना के अंतर्गत संचालित निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।
प्रमुख सचिव पर्यटन ने कहा कि अप्रैल, 2022 से लेकर अब तक 194 परियोजनाएं पूरी कर ली गई हैं। लम्बित एवं अवशेष कार्यों वाली परियोजनाओं को शीघ्र ही पूरा किया जाए। उन्होंने कार्यदायी संस्थाओं को कार्य में तेजी लाने एवं आवंटित धनराशि का समय से उपयोग करके आवश्यक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी कार्यदायी संस्थाएं एवं क्षेत्रीय अधिकारी अपने-अपने अधीन संचालित योजनाओं के सभी कार्य आगामी 15 जनवरी तक पूरा कर लें। जो योजनाएं धरातल पर आकार नहीं ले सकती उनकों निरस्त करके आवंटित धनराशि मुख्यालय को वापस की जाएं।
समीक्षा बैठक में विशेष सचिव पर्यटन श्री अश्वनी कुमार पाण्डेय, महानिदेशक पर्यटन श्री प्रखर मिश्र (आईएफएस), पर्यटन सलाहकार श्री जे0पी0 सिंह, उपनिदेशक श्री दिनेश एवं कल्याण सिंह सहित विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि, क्षेत्रीय अधिकारी एवं अन्य अधिकारी मौजूद थे।
: कोरोना के बढ़ते हुए मामले को देखते हुए भारत सरकार की एडवाइजरी जारी
Thu, Dec 22, 2022
कोरोना के पॉजिटिव मामलों की जीनोम सीक्वेंसिंग फिर से शुरू की गई है। केंद्र सरकार के आदेश के बाद दिल्ली सरकार के लोकनायक और आईएलबीएस अस्पताल में जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए पाजिटिव सैंपलों को जुटाया जा रहा है।
चीन समेत दुनिया के तमाम देशों में कोरोना ने फिर पैर पसारने शुरू कर दिए हैं. दुनिया में पिछले एक हफ्ते में कोरोना के 36 लाख मामले सामने आए हैं. वहीं इन 7 दिनों में 10 हजार लोगों की मौत हुई है. चीन के अलावा अर्जेंटीना, ब्राजील और जापान में बहुत तेजी से केस बढ़ रहे हैं. दुनियाभर में बढ़ रहे कोरोना के केसों के चलते भारत सरकार ने भी कोरोना पर एक समीक्षा बैठक बुलाईकेंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया की अध्यक्षता में आज उच्च स्तरीय बैठक हुई। इसके बाद मंडाविया ने कहा कि कोरोना अभी गया नहीं है। सभी संबंधित पक्षों को इसे लेकर सतर्क व सावधान रहना है। उधर, नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा कि कोरोना टीकों की तीसरी या ऐहतियाती खुराक अनिवार्य है। इसे सभी को लेना चाहिए। भीड़भाड़ वाली जगह मास्क पहने की सलाह भी दी गई है।
बैठक के बाद मंडाविया ने ट्वीट कर कहा, 'कुछ देशों में बढ़ते कोरोना मामलों को देखते हुए हमने विशेषज्ञों व अधिकारियों के साथ देश में हालात की समीक्षा की। कोविड अभी गया नहीं है। सभी संबंधित पक्षों को निर्देश दिया गया है कि वे सतर्क रहें और निगरानी को मजबूत करें। हम किसी भी हालात से निपटने के लिए तैयार हैं।'
पिछले 1 हफ्ते में दुनियाभर में 36 लाख केस
पिछले 7 दिनों में दुनियाभर में कोरोना के 3,632,109 केस सामने आए हैं. अकेले जापान में 1055578 केस मिले हैं. वहीं, दक्षिण कोरिया में 460,766, फ्रांस में 384184, ब्राजील में 284,200, अमेरिका में 272,075, जर्मनी में 223,227, हॉन्गकॉन्ग में 108577, चीन के पड़ोसी ताइवान में 107381 केस मिले हैं.
: आखिर कब रुकेगा एसिडl अटैक लचर कानून व्यवस्था
Wed, Dec 21, 2022
अभी बहुत समय पहले की बात नहीं है जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था
कभी लड़कों से भी पूछा करो कहां जा रहे हो किस से मिल रहे हो
प्रधानमंत्री की इस सटीक टिप्पणी को यदि आज हमने अपने जेहन में उतारा होता तो विगत वर्षों में किशोरावस्था में किए गए अपराधों से हम अपने बच्चों को बचा सकते थे आज के बदले हुए परिवेश में किशोरावस्था में ही जब बच्चे नाबालिक होते हैं तभी वह संगीन अपराध को अंजाम देने लगते हैं और क्योंकि हमारी कानून व्यवस्था में नाबालिक की अपराध के लिए दंड का प्रावधान हल्का है जिसका लाभ उठाते हुए वह किए गए अपराध के प्रतिरूप दंड से बच जाते हैं और यदि कानून द्वारा दिए गए दंड की मूल भावना अर्थात हृदय परिवर्तन से वंचित हो गए तो शातिर अपराधी बनते हैं ऐसा ही एक प्रकरण बीते 14 दिसंबर को दिल्ली में देखने को मिलादिल्ली के द्वारका के मोहन गार्डन इलाके में रहने वाली 17 वर्षीय सुप्रिया जो अपनी छोटी बहन 13 साल की प्रिया के साथ सुबह घर से स्कूल जा रही थी जिसके ऊपर मोहल्ले के रहने वाले 3 लड़कों ने एसिड फेंक दिया जिससे उसका चेहरा बुरी तरह से झुलस गया और अथाह पीड़ा को सहती हुई परिजनों के माध्यम से सफदरजंग हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया जहां उसकी हालत के विषय में भास्कर रिपोर्टर पूनम कौशल की ग्राउंड रिपोर्ट पढ़कर मन बहुत द्रवित हो गया और सोचने पर मजबूर हो गया की अनायास इस बच्ची का क्या कसूर था जो उस पर एसिड अटैक हुआ यदि आप भी सामाजिक सरोकार रखते हैं भास्कर रिपोर्टर पूनम कौशल की रिपोर्ट पढ़कर आपके मन में पीड़ा का एहसास हो तो फोन घुमा कर दिल्ली के डीसीपी एसीपी से मांग करिए कि दोषी व्यक्तियों को कठोर से कठोर सजा मिले और एसिड उपलब्ध कराने वाली ऑनलाइन कंपनी फ्लिपकार्ट का पूर्णता बॉयकाट हो एक मासूम की दर्द को समाज के सामने मार्मिक तरह से प्रस्तुत करने के लिए रिपोर्टर पूनम कौशल तथा उनके संस्थान दैनिक भास्कर का हम आभार व्यक्त करते हैं खबर का लिंक और रिपोर्ट आगे प्रस्तुत है https://dainik-b.in/vHSdhggOTvb
https://dainik-b.in/vHSdhggOTvb
दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के ICU में 17 साल की एक लड़की एडमिट है। चेहरा ढंका है, क्योंकि 5 दिन पहले 14 दिसंबर को उसी के मोहल्ले के दो लड़कों ने उस पर एसिड फेंक दिया। तभी से वो ICU में है। हालांकि उसकी हालत अब बेहतर है।
मम्मी-पापा की जिंदगी अब अस्पताल की बेंच या ICU के दरवाजे पर कट रही है। बेटी से मिलने का टाइम आता है, तो हिम्मत जुटानी पड़ती है। देखते ही मां की आंखों से आंसू बहने लगते हैं, पिता खुद को समेटते हुए हिदायत देते हैं- ‘देखो, बिटिया के सामने मत रोना…’
रिश्तेदार और दोस्त आ रहे हैं, लेकिन अभी माता-पिता के अलावा कोई नहीं मिल सकता। लड़की की सिक्योरिटी के लिए ICU के बाहर एक पुलिसवाला तैनात है। ICU में बेटी से मिल जब-जब मां-बाप बाहर निकलते हैं, तो ऊपर वाले को याद करते हैं, दुआएं करते हैं।
उन्हें खुशी है कि बेटी इतने दिन बाद बोल पा रही है। पिता लगभग चहकते हुए अंदाज में बताते हैं, ‘कह रही थी, पापा मैं जल्दी ठीक हो जाऊंगी।’ ये ख़ुशी कुछ ही पल ठहरती है और उदासी उन्हें फिर घेर लेती है। बेटी के भविष्य की चिंताएं उनके चेहरे पर नजर आने लगती है।
14 दिसंबर को स्कूल जा रही थी, बाइक से आए और एसिड फेंक दिया
सुप्रिया दिल्ली के द्वारका में मोहन गार्डन इलाके में रहती है। पिता 14 दिसंबर का दिन याद कर बताते हैं कि दोनों बेटियां 17 साल की सुप्रिया और 13 साल की प्रिया सुबह 7.30 बजे घर से स्कूल के लिए निकली थीं। सुप्रिया का प्री-बोर्ड का हिस्ट्री का पेपर था। कुछ ही मिनट बाद छोटी बेटी भागती हुई आई और बताया कि दीदी के चेहरे पर किसी ने कुछ फेंक दिया है।
पिता आज भी ये बताते हुए कांपने लगते हैं। बताते हैं- ‘जब तक मैं वहां पहुंचा, तब तक लोग बेटी के चेहरे पर पानी डाल चुके थे। इससे एसिड का असर तो कम हो गया, लेकिन तब भी धुआं निकल रहा था। मैं घबरा गया था। मैंने तुरंत बेटी को बाइक पर बिठाया और प्राइवेट अस्पताल ले गया, वहां से उसे दीनदयाल अस्पताल भेज दिया। बाद में उन्होंने सफदरजंग रेफर कर दिया।’
छोटी बहन से कहा- एक-एक इंजेक्शन गिन रही हूं, अब तक 17 लग चुके
ये पूरी घटना लड़की की छोटी बहन प्रिया के सामने हुई थी। प्रिया अभी बहुत डरी हुई है। हालांकि शुक्रवार को प्रिया ICU में अपनी बहन से मिली। उसे पहले ही मम्मी-पापा ने समझा दिया था कि दीदी के सामने खुद को संभालना, बिल्कुल नहीं रोना।
प्रिया कैमरे पर आने के लिए तैयार नहीं हुईं, लेकिन उन्होंने बताया कि मैं दीदी से मिलने ICU में गई, तब उन्हें होश आ चुका था। मैंने उन्हें देखते ही कहा- ‘मैं तुम्हारे लिए इतना रो रही थी और तुम यहां अस्पताल में आराम से बिस्तर पर लेटी हो।’
सुप्रिया ने जवाब दिया-
‘आराम से नहीं लेटी हूं। इंजेक्शन लग रहे हैं, बहुत तकलीफ हो रही है।’
प्रिया ने कहा-
‘तीन दिन में तीन इंजेक्शन लगे होंगे।’
इस पर सुप्रिया ने कहा-
‘मैं एक-एक इंजेक्शन गिन रही हूं। अब तक 17 लग चुके हैं। आगे भी पता नहीं कितने और लगेंगे।’
तेजाब के हमले में सुप्रिया का चेहरा काफी हद तक बच गया है, लेकिन उसकी आंखों को अब भी नुकसान का खतरा है। डॉक्टरों का कहना है कि सुप्रिया की आंखें बच जाएंगीं, लेकिन नुकसान होगा।
तीनों आरोपी पड़ोस में रहने वाले, लड़की से अच्छी दोस्ती थी
सुप्रिया पर जिन लड़कों ने तेजाब फेंका है, वे उसके मोहल्ले में ही रहते थे। पिता ने माना है कि उनसे उसकी दोस्ती थी। सुप्रिया की मां कहती हैं- ‘बेटी ने कभी डर तो जाहिर नहीं किया था, लेकिन पापा को लड़के के बारे में बताया था, फिर उन्होंने उस लड़के को समझाया भी था।’
पुलिस ने एसिड अटैक के आरोपी तीन लड़कों को अरेस्ट कर लिया है। घटना का CCTV फुटेज भी है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट फ्लिपकार्ट के जरिए तेजाब खरीदा था। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने फ्लिपकार्ट को नोटिस भेजा है।
मुख्य आरोपी सचिन अरोड़ा की उम्र 20 साल है, वह दीवारों पर वॉलपेपर लगाने का काम करता था। उसका साथी हर्षित अग्रवाल 19 साल का है, वह एक कंपनी में पैकिंग का काम करता था। तीसरा आरोपी वीरेंद्र सिंह 22 साल का है और जनरेटर मैकेनिक है। कोर्ट ने 17 दिसंबर को तीनों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
सचिन ने अटैक के करीब 20 दिन पहले इसका प्लान बना लिया था। बाद में दोनों दोस्तों को शामिल कर लिया। एसिड फेंकने के लिए वह हर्षित को साथ ले गया था।
फिल्म देखकर किया एसिड अटैक, क्राइम शो देखकर पुलिस से बचने का था प्लान
पुलिस की पूछताछ में पता चला कि आरोपी सचिन को एसिड अटैक का आइडिया एक फिल्म देखते हुए आया था। उसने दोनों दोस्तों को इसमें शामिल किया। इसके बाद लड़की के प्री-बोर्ड एग्जाम की डेट पता की। एसिड के बारे में जानकारी जुटाने के बाद ऑनलाइन ऑर्डर किया। अटैक के बाद पुलिस से कैसे बचा जाए, इसका तरीका उसने एक क्राइम शो से सीखा।
प्लान के मुताबिक, सचिन और हर्षित बाइक से आए और लड़की पर तेजाब फेंका। सचिन और हर्षित का मोबाइल और स्कूटी लेकर वीरेंद्र दूसरी लोकेशन पर चला गया, ताकि जांच हो तो पुलिस गुमराह हो जाए। बाद में इन्हें सबूत के तौर पर पेश किया जा सके, लेकिन CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया।
‘बेटी ने कभी नहीं बताया कि किसी ने उसे तंग किया हो’
लड़की के पिता बताते हैं- ‘तीनों लड़के हमारे मोहल्ले के ही हैं। पहले उन्होंने कभी बच्ची को तंग नहीं किया था, अगर तंग किया होता तो हम लीगल एक्शन ले चुके होते। पहले वे हमारे मकान में नीचे ही रहते थे, बेटी से बात भी करते थे। ये तो सच है कि बच्चे दोस्त थे, लेकिन किसी वजह से उनकी बातचीत बंद हो गई थी।’
पिता आगे कहते हैं- ‘अब तो हम बस यही चाहते हैं कि बेटी ठीक हो जाए। अभी उसकी आंखों में बहुत जलन है। अभी उसके प्री-बोर्ड एग्जाम चल रहे हैं, एक ही पेपर दिया है। हमें सबसे ज्यादा चिंता उसकी पढ़ाई की है। हम उसकी परीक्षा को लेकर एप्लिकेशन लगाएंगे, फिर देखते हैं क्या होता है।
मेरी बेटी बहुत स्ट्रॉन्ग है, उसे कोई घबराहट नहीं है। वह मुझसे भी कहती है कि पापा क्यों परेशान होते हैं। मैं तो ठीक हो जाऊंगी, लेकिन मेरे साथ ऐसा करने वालों ने अपनी जिंदगी खराब कर ली है।’
पिता बताते हैं कि सुप्रिया ने कभी नहीं सोचा था कि उसके साथ ऐसा होगा। उसे सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि उसके अपने मोहल्ले के, जान पहचान के लड़कों ने उसके साथ ऐसा किया। मुख्य आरोपी से उसकी दोस्ती थी, लेकिन कुछ महीने पहले उसने बात करना बंद कर दिया था।
‘आरोपी एक दिन पहले ही मिला था, नमस्कार भी किया’
सुप्रिया के पिता कहते हैं- ‘बेटी समझ भी नहीं पा रही है कि उस पर एसिड अटैक क्यों हुआ। उसने सिर्फ बोलना बंद किया था, इसके अलावा कोई बात नहीं थी। वह चाहती है कि हमला करने वाले को सजा हो।’
पुलिस को भी जांच में पता चला है कि सचिन और पीड़िता सितंबर तक दोस्त थे। इसके बाद दोनों की बातचीत बंद हो गई। सचिन इसी से नाराज था। हमने आरोपियों के परिवार से बात करने की भी कोशिश की, लेकिन वे अब घर छोड़कर जा चुके हैं।
परिवार के मुताबिक कुछ दिन से सुप्रिया अपने एक दूसरे दोस्त के साथ स्कूल जाती थी। आरोपी सचिन उसके दोस्त पर भी दबाव बना रहा था कि वह सुप्रिया से कहे कि वह उससे बात करे, लेकिन सुप्रिया ने उससे पूरी तरह बात करना बंद कर दिया था।
पिता कहते हैं- ’एक दिन पहले ही वह (आरोपी) मुझसे मिला था और नमस्कार किया था। पहले हम एक ही गली में रहते थे। कुछ महीने पहले हमने दूसरी गली में मकान ले लिया था।’
एसिड अटैक के वक्त आरोपियों ने चेहरा ढंक रखा था, लेकिन पीड़िता की बहन ने कद-काठी से उन्हें पहचान लिया। CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस ने उन्हें अरेस्ट कर लिया।
सुप्रिया के पिता ने बताया कि एसिड अटैक में ज्यादातर पीड़िताओं का चेहरा खराब हो जाता है और इसका असर उनकी बाकी जिंदगी पर पड़ता है। कई बार लड़कियां डिप्रेशन में भी चली जाती हैं, लेकिन सुप्रिया ने बहुत बहादुरी दिखाई है। हमले के बाद उसने अभी तक एक बार भी चिंता या दुख जाहिर नहीं किया है।
उसने अब तक अपने चेहरे को लेकर कोई बात नहीं की है। आइना लगा है, वो चेहरा देख लेती है, बावजूद इसके वह बिल्कुल नहीं घबरा रही है, उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं है। वो बहुत हिम्मती है और उसे लग रहा है कि वो इससे उबर जाएगी।
पिता के मुताबिक सुप्रिया 12वीं में हैं और आगे कानून की पढ़ाई कर जज बनना चाहती है। 18 दिसंबर को उसका कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) का पेपर है, लेकिन हॉस्पिटल में होने की वजह से वह पेपर नहीं दे पाई।’
‘अब बेटियों को अकेले नहीं जाने देंगे’
हादसे के बाद परिवार डरा हुआ है। खासकर छोटी बेटी की सुरक्षा और मानसिक सेहत को लेकर हम अब भी चिंतित हैं। वह हमले की चश्मदीद है और उसने हमलावरों की पहचान भी की है। मां कहती हैं- ‘हमें हमेशा अपनी बेटियों के लिए डर लगा रहेगा। हम अब कभी उन्हें अकेले नहीं जाने देंगे। कोशिश करेंगे कि स्कूल भी खुद ही छोड़कर आएं। हमारी बेटी गवाह भी है, अब उस पर और ज्यादा खतरा है।’
सुप्रिया के पिता कहते हैं- अब तक पुलिस ने हमारी पूरी मदद की है। इस घटना के बाद लोगों ने भी बहुत सहयोग किया। अभी छोटी बेटी बहुत डरी हुई है। मैं यही चाहता हूं कि इन लड़कों को सख्त सजा मिले, ताकि इस तरह की घटना करने से पहले कोई भी दस बार सोचे। समाज में सख्त संदेश जाना चाहिए। सरकार को एसिड को पूरी तरह बैन कर देना चाहिए।’
(पहचान छिपाने के लिए दोनों लड़कियों के नाम बदले गए हैं।)
देश में एसिड का स्टॉक करने से लेकर बेचने तक के लिए नियम बने हैं, इसके बावजूद ये आसानी से शॉपिंग वेबसाइट पर मिल रहा है, नीचे दिए ग्राफिक्स से जानिए एसिड अटैक पर बने कानून...
देश में एसिड का स्टॉक करने से लेकर बेचने तक के लिए नियम बने हैं, इसके बावजूद ये आसानी से शॉपिंग वेबसाइट पर मिल रहा है, नीचे दिए ग्राफिक्स से जानिए एसिड अटैक पर बने कानून...