: बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 के साथ 36 वा राफेल भी राष्ट्र को समर्पित
Fri, Dec 16, 2022
बिग ब्रेकिंग:भारत चीन तनाव के बीच बड़ी खबरभारत ने अपनी बहु प्रतीक्षित बैलेस्टिक मिसाईल अग्नि 5 का सफल परीक्षण किया है।
इसका इंतजार देश को लम्बे वक्त से था,
ओडिसा के तट से हुआ सफल परीक्षण, हमला करने में सक्षम अग्नि-5 की मारक क्षमता 5000 किलोमीटर है जिसके निशाने पर चीन के लगभग सभी प्रमुख शहर आते हैं देश की सुरक्षा में यह एक बड़ी उपलब्धि है भारत और चीन के विवाद को देखते हुए और राष्ट्र का मिसाइल व अन्य टेक्नोलॉजी में सक्षम होना बेहद जरूरी पड़ोसी मुल्कों की गुस्ताखी को देखते हुए भारत सरकार ने दुर्गम इलाकों तक सड़क सुरक्षा निर्माण संगठन के माध्यम से रसद ब सेनाओं का यातायात सुचारू रूप से दुरुस्त करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है जिसकी वजह से हमारे सेना को अपने सीमावर्ती दुर्गम इलाकों तक निगरानी रखना आसान हो सकेगा यही कारण था कि 9 दिसंबर को अरुणाचल प्रदेश के तवांग इलाके में पी एल ए का मूवमेंट देखने के बाद भारतीय फौजी हरकत में आई और उन्होंने मुंहतोड़ जवाब देते हुए लगभग 300 चीनी सैनिकों को गणेश संघ कड़े संघर्ष के बाद बैरंग लौटा दिया सुरक्षा को और चाक-चौबंद करने के लिए भारत सरकार ने 36 राफेल लड़ाकू जेट का जो सौदा किया था वह भी राष्ट्र को समर्पित किया जा चुका है
कल 36 में राफेल भारत की धरती पर उतरा जिससे सीना को जल्द से जल्द राफेल समर्पित किया जा सके सीमावर्ती इलाकों में भारत chin के बीच तनाव को देखते हुए सरकार का यह कदम बेहद जरूरी था
भारत और चीन की सीमाएं 3488 किलोमीटर में फैली है यह जम्मू कश्मीर के लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड सिक्क्म, अरुणांचल प्रदेश से होकर गुजरती है जिसमे बीस हजार फ़ीट की उचाई में हिमालय की दुर्गम चोटियों से लेकर पैग़गोक की नीली झील के बीचों बीच सतह भी शामिल है जो तीन सेक्टरों में बटीं हुयी है पश्चिमी सेक्टर अर्थात जम्मू कश्मीर मिडिल सेक्टर यानी हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखण्ड और पूर्वी सेक्टर अर्थात सिक्किम तथा अरुणांचल प्रदेश इन सभी सेक्टर में पड़ने बाली सीमा रेखा को एल ए सी (line of actual control) एल ओ सी (line of control) आई बी (international border) कहते है दरअसल भारत चीन के बीच मैक मोहन लाइन को छोड़ कर कोई भौतिक निशान नहीं है केवल प्राकृतिक संसाधनों से दो देशों की सीमा को पहचाना जा सकता है और इसी चीज का फायदा विस्तारवादी देश ने समय समय पर भ्रम व तनाव की स्थिति उत्पन्न करके उठाया है आजादी के बाद से भारत की सीमाओं का अतिक्रमण कर चीनी सेनाओं की घुसपैठ ''नो मेन्स लैण्ड ''पर होती रही है और जब भारतीय फौज पेट्रोलिंग या गश्त के लिए उन क्ष्रत्रों में आती है तब वह वापस पीछे हट जाते है लेकिन पीछे हटने से पहले अस्थाई बंकर तथा खाद्द्य सामिग्री के रैपर आदि सबूत के तोर पर छोड़ देते है और वही छोड़ी हुई चीजे दिखा कर भारतीय सेना के गश्ती दल पर आरोप मढ़ते है कि उन्होंने सीमा का उल्लंघन किया है सोची समझी रणनिति के तहत चीन बेबुनियाद बातो से पहले तनाव उत्पन्न करता है फिर सैन्य स्तरीय वार्ताओं के क्रम में पहले कैप्टेन और फिर मेजर की फ्लैग मीटिंग से तनाव कम करने का डोंग रचता है
: हाईकोर्ट ने निकाय चुनाव की अधिसूचना पर 20 तक रोक लगाई
Thu, Dec 15, 2022
निकाय चुनाव और आरक्षण पर अब तक 14 जनहित याचिकाएं दाखिल हो चुकी है पूर्व की जनहित याचिका के साथ जोड़कर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ खंडपीठ ने निकाय चुनाव की अधिसूचना पर 20 तारीख तक रोक लगा दी है साथ ही ट्रांसजेंडर्स के लिए आरक्षण की मांग करने वाली याचिका पर सरकार से 19 तारीख तक जवाब दाखिल करने को कहा हैउच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ खंडपीठ ने अन्य पिछड़ा वर्ग को उचित आरक्षण का लाभ दिए जाने तथा सीटों के रोटेशन के मुद्दों को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा था लेकिन बुधवार को सुनवाई के समय सरकार की तरफ से जवाब पेश करने के लिए 3 दिन और वक्त मांगा है जिसको भी कोर्ट ने स्वीकार कर लिया और अगली सुनवाई 20 दिसंबर को निर्धारित कर दी इसी बीच ट्रांसजेंडर्स के लिए आरक्षण के मुद्दे वाली जनहित याचिका पर 19 तारीख तक सरकार से जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है तथा निकाय चुनाव का कार्यकाल खत्म होने पर प्रशासकों की नियुक्ति पर हाईकोर्ट ने पूछा है कि किस प्रावधान के तहत यह शासनादेश जारी किया है न्यायालय ने मामले में राज्य सरकार को 19 तारीख तक जमा भी शपथ पत्र दाखिल करने को कहा है जबकि याची की ओर से न्यायालय को बताया गया था कि 12 दिसंबर को एक शासनादेश जारी किया गया जिसके तहत निकाय का कार्यकाल खत्म होते ही वह प्रशासनिक व्यवस्था लागू हो जाएगी कोर्ट ने इसे संज्ञान लेते हुए सरकार से 19 तारीख तक जवाब तलब किया है
: अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर पर सैनिक संघर्ष के बाद अमेरिका का भारत को कूटनीतिक सहयोग
Thu, Dec 15, 2022
अरुणाचल प्रदेश के तवांग इलाके में गतरोज जिस प्रकार प्रतिबंधित एरिया में चीनी सैनिकों ने बदनियति से घुसपैठ करके चौकी बनाने का प्रयास किया था जिसको बॉर्डर इलाके पर तैनात भारत के जांबाज और मुस्तैद सैनिकों ने मुंह तोड़ जवाब देकर विफल कर दियाभारत के इस दुर्गम इलाके में चीनी सैनिकों को शायद अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि अचानक से इतनी बड़ी संख्या मैं भारतीय सैनिकों की मौजूदगी होगी बॉर्डर इलाके पर पीएलए द्वारा बदलाव के प्रयास को भारतीय सैनिकों ने विफल तो कर दिया लेकिन विपक्ष और मीडिया के मन में कुछ तथ्य भी प्रश्नगत थे जिस पर बयान देते हुए मौजूदा सत्र में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन को बताया कि किस प्रकार एक छोटे सैनिक संघर्ष के बाद भारतीय सैनिकों से मुंह की खाने के बाद पीएलए वापस हो गई और भारतीय सैनिक यथास्थिति को कायम रखे हुए हैं जिसमें हमारे 6 सैनिक भी घायल हुए थे जिनका उपचार गुवाहाटी की बेस कमांड हॉस्पिटल में चल रहा है लेकिन राजनाथ सिंह के इस बयान को विपक्ष अपने तरीके से रेखांकित कर रहा है और चर्चा कराने की मांग को लेकर दोनों सदनों से वाकआउट भी किया हैलेकिन इन सबके बावजूद तवांग इलाके में हुए सैनिक संघर्ष पर भारत को अमेरिका का साथ मिला है चीन की कुटिल साजिश के खिलाफ अमेरिका खुलकर भारत के साथ खड़ा हो गया अमेरिका ने कहा है कि चीन जानबूझकर उकसावे की कार्रवाई कर रहा है साथ ही भारत-चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की तरफ से मौजूदा स्थिति में एकतरफा बदलाव के प्रयासों को विफल करने के लिए भारतीय सैनिकों की कार्यवाही का समर्थन किया हैअमेरिका के विदेश विभाग के प्रवक्ता नड प्राइस कहां है कि तवांग संवेदनशील इलाका है हम इस मसले को लेकर दूतावास और विदेश विभाग के जरिए भारत के साथ संपर्क बनाए हुए हैं चीन की उकसावे की कार्रवाई का अमेरिका निंदा करता है भारत और चीन को द्विपक्षीय वार्ता के जरिए विवादित सीमाओं की मसले को सुलझाने का प्रयास करना चाहिए जबकि पेंटागन के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल पेट राइडर ने कहा है कि तवांग में जो हुआ वह चीन को आईना दिखाने जैसा है अमेरिका हर हाल में पूरी तरह से भारत के साथ है भारत स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए जो कुछ भी कर रहा है वह तारीफ के काबिल है अमेरिका भारत के कदमों का समर्थन करता है अमेरिका अपने साझेदारों की सुरक्षा के लिए प्रतिबंध है वही व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कैरी जीन पियरे ने कहा है कि अमेरिका को खुशी है कि चीनी सैनिकों को अपनी गलती का जल्द एहसास हो गया और भी पीछे हट गए उन्होंने कहा है कि झड़प के बाद दोनों देशों के बीच कमांडर स्तर की वार्ता होना अच्छा संकेत हैआपको बताते चलें इससे पूर्व बी लद्दाख क्षेत्र के गलवान इलाके में चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की कोशिश की थी जिसमें भारत सैनिकों के साथ हुए खूनी संघर्ष में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे लेकिन इससे कहीं ज्यादा चीन ने अपने सैनिकों की जान गवाई थी जिसको भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान से समझा जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा था कि हमारी 20 बहादुर सैनिक मारते मारते शहीद हुए हैं उस समय भी अमेरिका की एजेंसियों ने भारतीय सैनिकों की बहादुरी को प्रमाणित किया था लेकिन इन सब चीजों से इधर भारत के सदन में मौजूद कुछ ऐसी भी लोग हैं जो भारत सरकार से सेना के द्वारा किए गए जाबाजी के प्रमाण पत्र मांगते हैं चाहे वह सर्जिकल स्ट्राइक या फिर एयर स्ट्राइकlअरुणाचल प्रदेश के तवांग जैसे दुर्गम इलाकों में हुए घुसपैठ के इरादों को नाकाम करने पर दिए गए भारत सरका के रक्षा मंत्री के बयान को विपक्ष द्वारा रेखांकित करना एक लोकतांत्रिक अधिकार है तो सीमा सुरक्षा सड़क निर्माण संगठन द्वारा बिछाई गई सड़क निर्माण के दुर्गम इलाकों तक जाल को समझना और उस पर अपना राजनीतिक समर्थन देना राष्ट्र की सुरक्षा की खातिर कर्तव्य भी है सरकार के बुलंद इरादों को भापते हुए सीमा सुरक्षा सड़क निर्माण संगठन द्वारा भारत के दुर्गम इलाकों तक सड़क बिछाना इस प्रकार की कुटिल पड़ोसियों के मंसूबों को विफल करने में भारतीय फौज के लिए सहायक सिद्ध होगा और शायद यही वजह थी जब नो मेस लैंड पर एल ई सी के पास प्रतिबंधित क्षेत्र में चीनी फौजियों की मोमेंट को देखा गया तत्काल प्रभाव से भारतीय सैनिकों की भी मौजूदगी हो सकी थी