: भीषण सड़क दुर्घटना में कार सवार आठ में से सात लोगों की मौत
Sat, Feb 4, 2023
ताजमहल देखकर लौटते वक्त उन्नाव में हुए सड़क हादसे में बाराबंकी के 7 लोगों की मौत हो गई. मृतकों में जहां एक ही परिवार के चार लोग शामिल हैं वहीं अन्य तीन लोग उसके ससुराल पक्ष के थे एक ही परिवार के चार लोगों की मौत के बाद जब शव गांव पहुंचा तो कोहराम मच गया. अब इस परिवार में महज एक घायल मासूम बच गया हैउन्नाव में पोस्टमार्टम के बाद शनिवार को तीन शवों के बसौली पहुंचने पर पिता और अन्य परिजन सदमे के कारण बेहोश हो गए. दिनेश के परिवार में कुल 5 लोग थे जिसमें एक मासूम बच्चा ही घायल अवस्था में बचा है जबकि उसकी सास और दो साली भी हादसे की शिकार हुई हैं. ये सभी लोग अपनी एसयूवी से आगरा में ताजमहल देख कर वापस बाराबंकी लौट रहे थे, तभी उन्नाव के पास टायर फटने से ये सड़क हादसा हुआ थादरअसल भारतीय जनता पार्टी के पिछड़ा वर्ग के पूर्व जिलाध्यक्ष रामखेलावन लोधी के चार बेटों में से दूसरे नंबर के पुत्र दिनेश राजपूत शहर के चित्रगुप्त नगर कॉलोनी में पत्नी और तीन बच्चों के साथ रहते थे. दिनेश शहर में ही हार्डवेयर की दुकान चलाते थे.31 जनवरी को दिनेश पत्नी अनीता सिंह (34साल), बेटी गौरी उर्फ संस्कृति (9 साल) बेटों में आर्यन (4 साल), लक्ष्यवीर (10 महीने) सास कांती (52साल), साली प्रीती (15साल) और प्रिया (9साल) के साथ अपनी कार से आगरा घूमने गए थे. ताजमहल देखने के बाद शुक्रवार को सभी एक कार से वापस बाराबंकी लौट रहे थे. कार दिनेश राजपूत चला रहे थे.आगरा से बाराबंकी लौटते वक्त उन्नाव में हुई भीषण सड़क दुर्घटना में कार में सवार आठ में से सात लोगों की मौत हो गई है. इनमें मोहम्मदपुर खाला थाना क्षेत्र के बसौली गांव के एक ही परिवार के चार लोगों की मौत के बाद गांव में कोहराम मच गया
: जमानत राशि जमा नहीं कर पाने की वजह से जेल में रहने को मजबूर कैदियों को लेकर सुप्रीमअदालत ने सात दिशा-निर्देश जारी किए
Fri, Feb 3, 2023
रिहाई के आदेश के बावजूद जमानत धनराशि जमा नहीं कर पाने की वजह से जेल में रहने को मजबूर कैदियों को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट भी एक्टिव हो गया है. सर्वोच्च अदालत ने इसे लेकर सात दिशा-निर्देश जारी किए गए हैंबेल मिलने के बावजूद जेल में रहने की मजबूरी को पर मदद के लिए सरकार के बाद अब सुप्रीम कोर्ट भी आगे आया हैसुप्रीम कोर्ट की ओर जारी दिशा-निर्देश में कहा गया है कि कोर्ट से किसी विचाराधीन कैदी या फिर दोषी को जमानत पर रिहा करने का आदेश आता है तो उसी दिन या फिर अगले दिन जेल अधीक्षक के माध्यम से कैदी को ई-मेल के जरिए जमानत आदेश की सॉफ्ट कॉपी भेजनी होगी. जेल अधीक्षक को ई-जेल सॉफ्टवेयर या जेल विभाग में इस्तेमाल हो रहे किसी अन्य सॉफ्टवेयर के जरिए जमानत आदेश दिए जाने की तारीख भी दर्ज करनी होगीसुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा है कि यदि आरोपी को जमानत पर रिहा कर देने के आदेश के दिन से सात दिन की अवधि में रिहा नहीं किया जाता है तो यह जेल अधीक्षक का कर्तव्य होगा कि वे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण यानी DLSA के सचिव को सूचित करें. डीएलएसए कैदी की रिहाई के लिए हर संभव तरीके से उसकी सहायता, बातचीत करने के लिए पैरा लीगल वालंटियर या जेल विजिटिंग एडवोकेट को नियुक्त कर सकता हैसर्वोच्च अदालत ने कहा है कि नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर यानी एनआईसी ई-जेल सॉफ्टवेयर में आवश्यक फील्ड बनाने का प्रयास करेगा ताकि जेल विभाग की ओर से जमानत आदेश की तारीख और जमानत पर रिहाई की तारीख दर्ज की जा सके. इससे ये डेटा भी रहेगा कि आदेश और अनुपालन में कितना वक्त लगता है. यदि कैदी सात दिन के भीतर रिहा नहीं होता है तो एक स्वचालित ई-मेल सचिव, DLSA को भेजा जा सकता हैसुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सचिव, DLSA अभियुक्तों की आर्थिक स्थिति का पता लगाने के लिहाज सेपरिवीक्षा अधिकारियों या पैरा लीगल वालंटियर्स की मदद ले सकता है. इससे कैदी की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार की जा सकेगी. इससे संबंधित न्यायालय के समक्ष जमानत की शर्तों में ढील देने के अनुरोध के साथ रखा जा सकेगासर्वोच्च अदालत ने कहा है कि ऐसे मामलों में जहां अंडर ट्रायल या दोषी करार दिया गया कैदी अनुरोध करता है कि वह एक बार रिहा होने के बाद जमानत बांड या जमानत की धनराशि के दस्तावेज दे सकता है तो एक उपयुक्त मामले में, अदालत अभियुक्त को एक विशिष्ट अवधि के लिए अस्थायी जमानत देने पर विचार कर सकती है. जिससे इस अवधि में वह जमानत बांड या जमानत प्रस्तुत कर सकेसुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि जमानत देने की तारीख से एक महीने के भीतर जमानत बांड प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो संबंधित न्यायालय इस मामले का स्वतः संज्ञान ले सकता है और विचार कर सकता है कि क्या जमानत की शर्तों में संशोधन या छूट की आवश्यकता है? सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि अभियुक्त या दोषी की रिहाई में देरी का एक कारण स्थानीय जमानत पर जोर देना है. कोर्ट ने ये भी सुझाव दिया कि ऐसे मामलों में अदालतें स्थानीय जमानत की शर्त नहीं लगा सकती हैजस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अभय एस ओक की पीठ ने अपने इस आदेश में यह भी कहा कि भारत सरकार को NALSA यानी राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के साथ चर्चा करनी चाहिए कि क्या वह NALSA और DLSA के सचिवों को ई-जेल पोर्टल तक पहुंच प्रदान करें या नहीं? केंद्र की ओर से एएसजी केएम नटराज ने पीठ को आश्वासन दिया कि अनुमति देने में कोई समस्या नहीं होगी, हालांकि वह निर्देश मांगेंगे और सुनवाई की अगली तारीख पर अदालत में बताएंगे. मामले पर अगली सुनवाई अब 28 मार्च को होगीसुप्रीम कोर्ट स्वतः संज्ञान लेकर कर रहा सुनवाईदरअसल, सुप्रीम कोर्ट जमानत को लेकर नियम तैयार करने के मामले में स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने 26 नवंबर को संविधान दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सर्वोच्च अदालत में एक सरकारी आयोजन के बाद भावुक अपील पर संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की थी. द्रौपदी मुर्मू ने कहा था कि देश की जेलों में बंद हजारों कैदियों के पास जमानत पर रिहाई का कोर्ट आदेश तो है लेकिन उनके पास जमानत राशि के पैसे नहीं हैं. इस वजह से वे जमानत के बावजूद जेल में ही बंद हैं. कोर्ट और सरकार उनके लिए कुछ करे. इस अपील के दो दिन बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट तलब कर ली थी.
: जम्मू-कश्मीर में पहली बार पकड़ी गई परफ्यूम आईईडी
Thu, Feb 2, 2023
जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया। उन्होंने पड़ोसी देश पर आतंकवाद फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी जमीन से आतंकवाद फैलाने और दुनिया भर में सैकड़ों निर्दोष लोगों को मारने के लिए बदनाम है।जम्मू-कश्मीर उसके निशाने पर है। पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में लोगों को सांप्रदायिक रूप से बांटना चाह रहा है। उन्होंने बताया कि पहली बार परफ्यूम आईईडी का घाटी में इस्तेमाल किया गया।https://twitter.com/ANI/status/1621057167314014210?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1621057167314014210%7Ctwgr%5E1113bd310f4981c3506a848b93021113b3802d8b%7Ctwcon%5Es1_c10&ref_url=http%3A%2F%2Fapi-news.dailyhunt.in%2Fडीजीपी ने नरवाल हमले के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि 20 जनवरी को दो बम लगाए गए थे। 21 जनवरी को 20 मिनट के अंतराल पर दो बम विस्फोट किए गए, ताकि अधिक से अधिक लोगों को मारा जा सके। पहले आईईडी विस्फोट के बाद 9 लोग घायल हो गए।पुलिस ने एक आतंकवादी आरिफ को गिरफ्तार किया है, जो 3 साल से पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में था। सरकारी टीचर आसिफ नरवाल में हुए दोहरे बम ब्लास्ट में मुख्य आरोपित है। आरोपित मोहम्मद आरिफ ने फरवरी, 2022 को जम्मू के शास्त्री नगर में एक आईईडी धमाका किया था। इसके अलावा पुलिस महानिदेशक ने दावा किया कि कटडा बस में हुआ धमाका भी इसी ने किया था। साल 2010 में आरिफ आरईटी टीचर नियुक्त हुआ था। वर्ष 2016 में वह शिक्षक बन गया था। आरिफ का मामा पाकिस्तान में है। बीते वर्ष दिसंबर माह में ड्रोन के जरिए पाकिस्तान से आरिफ को आईईडी भेजे गए थे।जम्मू में पहली बार पकड़ी गई परफ्यूम आईईडीजम्मू के नरवाल ट्रांसपोर्ट यार्ड में 20 जनवरी को हुए दो आईडी धमाकों के आरोप में जम्मू पुलिस ने सरकारी शिक्षक मोहम्मद आरिफ निवासी रियासी को गिरफ्तार किया है। आतंकी से पुलिस ने परफ्यूम आईडी बरामद की है। जो कमरे में खुशबू करने वाली बोतल के समान है। जम्मू में पहली बार परफ्यूम आईईडी पकड़ी गई है।