: नववर्ष का जश्न कहीं हुडदंग और पार्टी तो कहीं मंदिरों में आराधना के साथ संपन्न हुआ
Mon, Jan 2, 2023
शनिवार को कड़ाके की ठंड के बावजूद शहरवासियों में नये साल का स्वागत करने व बीते साल को अलविदा कहने के लिए उल्लास रहा। जहां एक और नववर्ष का स्वागत करने के लिए लोगों ने मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना आराधना को प्राथमिकता दी वहीं दूसरी ओर युवा पीढ़ी ने जश्न एवं अपने शौक को शर्मा कर नाच और मस्ती के साथ नव वर्ष का जश्न मनाया पुलिस प्रशासन की तमाम तैयारियों के बावजूद कुछ जगह हंगामा बरपा लेकिन प्रशासन व कानून व्यवस्था के चलते कुछ जगहों को छोड़कर बाकी सार्वजनिक स्थलों पर शांति व्यवस्था कायम रही। ज्यादातर लोगोें ने अपने दोस्तों, परिचितों व परिवार के साथ या तो घर में या फिर किसी होटल, क्लब या निजी भवन में नये साल का जश्न मनाया इसी के चलते नशे की लत तथा हुडदंग ने दिल्ली की एक होनहार युवती की जान ले लीलखनऊ ने नए साल का जश्न अपने अंदाज में मनाया। शनिवार शाम से ही घरों से लेकर होटल-क्लबों में तैयारियां तेज हो गई थीं। जैसे ही रात 12 बजे घड़ी की तीनों सुइयां एक साथ इकट्ठा हुईं तो पूरा शहर जश्न में डूब गया। हजरतगंज से लेकर समिट बिल्डिंग और अन्य इलाकों में हजारों युवा देर रहा तक जश्न में डूबे रहे।कार्यक्रमों में भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए कमिश्नरेट पुलिस के अलावा अस्पतालों व नगर निगम कर्मचारियों को शनिवार, रविवार को हाई अलर्ट पर रखा गया है। इस दौरान 100 से अधिक जगहों पर 8000 पुलिसकर्मी व पीएसी की 16 कंपनी तैनात किए गए हैं। हुड़दंगियों से निपटने के लिए हर चौराहे पर पुलिस मुस्तैद रही।उधर दिल्ली में नववर्ष के जश्न के बीच एक दुखद खबर परिवार का इकलौता सहारा बनी युवती को कार से घसीट कर मार दिया गया दिल्ली के कंझावला इलाके में 23 वर्षीय युवती को एक गाड़ी से कुचल दिया गया और कार सवार आरोपियों ने कई किलोमीटर उसको घसीटा दिल्ली के स्पेशल सीपी सागर प्रीत हुड्डा ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम करने के लिए मेडिकल बोर्ड बनाया गया है और फॉरेंसिक टीम की भी मदद ली जा रही है. उन्होंने बताया कि पांचों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया था और तीन दिन की पुलिस रिमांड मिली है. उन्होंने कहा कि पुलिस परिवार के संपर्क में है और उनके आरोपों के हिसाब से भी जांच की जा रही है
: उत्तर प्रदेश सरकार की ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर सुनवाई 4 जनवरी को
Mon, Jan 2, 2023
नगर निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर प्रदेश सरकार की दायर याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने चार जनवरी की तारीख दी है। उत्तर प्रदेश में निकाय चुनावों पर यूपी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी जिसमें ओबीसी आरक्षण के बगैर चुनाव कराने के आदेश को चुनौती दी गई है सोमवार को जनहित याचिका स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 4 जनवरी की तारीख सुनवाई के लिए सुनिश्चित की हैमुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों पर ध्यान दिया और कहा कि इस मामले में तत्काल सुनवाई की जरूरत है। पीठ ने कहा कि हम इसे परसों लेंगे। राज्य सरकार ने 27 दिसंबर के आदेश के खिलाफ अपनी अपील में कहा है कि उच्च न्यायालय पांच दिसंबर के मसौदा अधिसूचना को रद्द नहीं कर सकता है, जो अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों के अलावा अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) के लिए शहरी निकाय चुनावों में सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है।मुख्य रूप से जनहित याचिका के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार ने काहे की ओबीसी वर्ग के आरक्षण की सुविधा संवैधानिक रूप से है जिसकी अनदेखी करके शहरी निकाय चुनाव कराना संवैधानिक व्यवस्था के अनुकूल नहीं होगा जबकि उत्तर प्रदेश सरकार हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में ट्रिपल टेस्ट के लिए के लिए ओबीसी आरक्षण आयोग गठित कर चुकी है अब उत्तर प्रदेश में होने वाले निकाय चुनाव से संबंधित समाचार के लिए 4 जनवरी तक का इंतजार करना होगा जब सुप्रीम कोर्ट इस संदर्भ में सुनवाई करेगा
: केंद्र का नोटबंदी फैसला उचित :--सुप्रीम कोर्ट
Mon, Jan 2, 2023
सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले पर मुहर लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यों की संविधान पीठ ने 4 न्यायाधीश की सहमति के फैसले से नोटबंदी को सही ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि नोटबंदी की प्रक्रिया में गड़बड़ी नहीं हुई। ये फैसला लेने से पहले केंद्र सरकार और आरबीआई क बीच विचार विमर्श हुआ था। हालांकि 5 न्यायाधीशों की इस बेंच में जस्टिस नागरत्ना ने अलग फैसला सुनाया है। इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मोदी सरकार की नोटबंदी को चुनौती देने वाली सभी 58 याचिकाओं को खारिज कर दिया। नोटबंदी के फैसले को संवैधानिक पीठ ने सही ठहराया
सुप्रीम कोर्ट ने साफ-साफ कहा कि सुप्रीम कोर्ट और रिजर्व बैंक के बीच इस बारे में विचार विमर्श हुआ था, इसलिए इसे असंवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता। 5 जजों की बेंच में से जस्टिस नागरत्ना का फ़ैसला अलग है। इस संविधान पीठ की ओर से केवल जस्टिस नागरत्ना ने सरकार के इस फैसले को गलत बताया। उन्होंने अपने जजमेंट में कहा कि नोटबंदी को कानून के जरिए लागू करना चाहिए था नोटिफिकेशन के जरिए नहीं। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि विमुद्रीकरण (नोटबंदी)की शुरुआत कानून के विपरीत और गैरकानूनी शक्ति का इस्तेमाल था। इतना ही नहीं यह अधिनियम और अध्यादेश भी गैरकानूनी थे। इसके चलते भारत के लोगों को कठिनाई से गुजरना पड़ा। हालांकि, इसे ध्यान में रखते हुए कि ये फैसला 2016 में हुआ था, ऐसे में इसे बदला नहीं जा सकता।जस्टिस वीआर गवई ने कहा कि 6 महीने तक केंद्र और आरबीआई के बीच परामर्श हुआ था। हम मानते हैं कि इस तरह के उपाय को लाने के लिए एक उचित सांठगांठ थी, और हम मानते हैं कि विमुद्रीकरण आनुपातिकता के सिद्धांत से प्रभावित नहीं हुआ था यानी कि सरकार ने इस फैसले को शक्ति का दुरुपयोग करते हुए नहीं बल्कि विचार-विमर्श के बाद लिया था। विमुद्रीकरण (नोटबंदी) लाने के लिए RBI के पास कोई स्वतंत्र शक्ति नहीं है। हमने संदर्भ का उत्तर दिया है और इस प्रकार हम रजिस्ट्री को निर्देश देते हैं कि वह मामले को सीजेआई के समक्ष उचित दिशा-निर्देशों के लिए रखें।