: हमारा संविधान हमारे मौलिक अधिकारों का रक्षा कवच है
Sat, Dec 17, 2022
भारतीय संविधान की प्रकृति संघात्मक प्रकृति का है डॉक्टर बी आर अंबेडकर जिन्हें भारतीय संविधान का जनक माना जाता है या उनका विचार था, विश्व के संविधानओं की तुलना में भारतीय संविधान वृहद संविधान हैं इस संविधान में प्रशासन से संबंधित सभी प्रावधान राज्य के नीति निर्देशक तत्व मौलिक अधिकार मौलिक कर्तव्य राज्य तथा केंद्र के शासन से संबंधित प्रावधान नए ढांचे की पदसोपानआत्मक व्यवस्था इत्यादि का संपूर्ण विवरण दिया गया है यह वृहद हो गया है क्योंकि यह पूर्ण दस्तावेज है, मजबूत शक्तिशाली केंद्र के साथ संघवाद का स्थापित किया जाना भारतीय संविधान केंद्र तथा राज्य के मध्य अनोखे संघवाद संबंध की स्थापना करता है संघवाद इकाई स्थापित करते हुए केंद्र को अधिक मजबूत बनाया गया है इस संघवाद की अवधारणा के अंतर्गत केंद्र तथा राज्यों को अपने-अपने विषयों पर जिन्हें की संविधान के द्वारा उन्हें आवंटित किया गया है विधि निर्माण करने की शक्ति प्रदान की गई हैं तथा वे अलग-अलग शासन संचालित कर सकते हैं परंतु कुछ विशेष परिस्थितियों में शक्तियां जिन्हें पृथक कर दिया गया है केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजय भारतीय संविधान में ऐसे प्रावधानों का उल्लेख किया गया है जिससे आकस्मिक परिस्थितियों में उत्पन्न होने वाली आकस्मिकता से निपटा जा सकता है आकस्मिकता से संबंधित प्रावधान अनुच्छेद 352 356 तथा 360 के अंतर्गत समाहित किए गए हैं जो आकस्मिकता से निपटने के लिए केंद्र को सशक्त बना देते हैंमौलिक अधिकारों की अवधारणा भारतीय संविधान के भाग 3 अनुच्छेद 12 से लेकर 35 तक में समाहित की गई हैं मौलिक अधिकार अधिकार होते हैं जो एक मानव प्राणी के स्वस्थ वातावरण में आधारभूत तथा सर्वांग पूर्ण विकास हेतु आवश्यक अपरिहार्य तथा प्रकृतितह वंचित होते हैं संविधान का भाग 3 एक व्यक्ति के मौलिक अधिकारों को राज्य के विरुद्ध संरक्षित करता है यह व्यक्ति को राज्य के द्वारा निर्मित मनमानी विधियों से संरक्षित करने की प्रत्याभूत प्रदान करता है यह प्रत्याभूत मौलिक अधिकारों के माध्यम से राज्य द्वारा निर्मित मनमानी विधि अथवा किए गए कृत्य से संरक्षित होती हैं व्यक्ति अनुच्छेद 32 तथा 226 की सहायता मौलिक अधिकारों के भंग हो जाने पर प्राप्त कर सकते हैं {jayendra pandey Advocate}
: शीतकालीन अवकाश में उच्चतम न्यायालय की कोई बेंच नहीं
Fri, Dec 16, 2022
शीतकालीन अवकाश से पूर्व सुप्रीम कोर्ट का आज यानी कि शुक्रवार को आखिरी कार्य दिवस है सीजीआई डीवाई चंद्रचूड़ ने इस बात की घोषणा करते हुए बताया कि इस बार शीतकालीन अवकाश 17 दिसंबर से 1 जनवरी तक रहेगा जिसमें कि उच्चतम न्यायालय की कोई भी पीठ मौजूद नहीं होगी अभी तक की परंपरा में शीतकालीन और गर्मियों की दोनों छुट्टियों में तात्कालिक मामलों को निपटाने के लिए उच्चतम न्यायालय की बेंच जरूर मौजूद रहती थी सीजेआई डि. बाई चंद्रचूड़ ने कोर्ट रूम उपस्थित वकीलों को शीतकालीन अवकाश में कोई भी बेंच ना होने का हवाला देते हुए बताया कि 17 से 1 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश रहेगा जिसमें की सुप्रीम कोर्ट की कोई भी बेंच मौजूद नहीं रहेगी आज के कार्य दिवस को आखरी मानते हुए कार्य किया जाए आने वाले 2 हफ्तों के लिए सुप्रीम कोर्ट की सभी बेंच छुट्टी पर रहेंगेमाना जा रहा है कॉलेजियम को लेकर उच्चतम न्यायालय और संसद के बीच दूरियां लगातार बढ़ती जा रही है इसी परिपेक्ष में अभी हाल ही में राज्यसभा को संबोधित करते हुए अपने प्रथम उद्बोधन में सभापति जगदीश धनगर ने कॉलेजियम को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी कानून मंत्री किरण रिजिजू कॉलजियम व्यवस्था पर अपना बयान दे चुकी है लेकिन उच्चतम न्यायालय जजों की नियुक्ति को लेकर बनी हुई कोलेजियम व्यवस्था को तर्कसंगत मानता है इन्हीं सब प्रस्तुति जन राजनीतिक टिप्पणियों को लेकर ऐसा माना जा रहा है कि कॉलेजियम व्यवस्था को लेकर संसद और सुप्रीम कोर्ट में कहीं ना कहीं परिस्थिति जन्य वैचारिक मतभेद लगातार हो रही है
: सड़क पर गड्ढे से हुए हादसों में f.i.r. के निर्देश कर्नाटक हाई कोर्ट सख्त
Fri, Dec 16, 2022
कर्नाटक हाईकर्ट की किनागी खंडपीठ ने बेंगलुरु की सड़कों पर हुए गड्ढों को भरने में निगम अधिकारियों की लापरवाही को लेकर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए एवं फैसला दिया है कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि सड़कों पर गड्ढों के कारण यदि कोई दुर्घटना होती है तो पीड़ित व्यक्ति पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज करा सकता है ऐसे मामलों में पुलिस को तकनीकी पहलुओं की आड़ में नहीं छोड़ना चाहिए उसे एफ आई आर दर्ज कर मामले की जांच करनी चाहिएइस समस्या पर ध्यान देते हुए सड़क निर्माण के समय जिम्मेदार लोगों की तरफ कर्नाटक हाईकोर्ट का ध्यान तब गया जब वह एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी बरले तथा न्यायाधीश अशोक दास की खंडपीठ ने प्रतिवादी के रूप में गृह विभाग को शामिल करने को कहा है साथ ही भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से कहा है कि वह बेंगलुरु महानगर पालिका द्वारा भरे गए गड्ढों का सर्वेक्षण कर 8 सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करें मामले की सुनवाई 6 फरवरी को होगी सड़क के गड्ढों पर हाईकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए कहां है कि गड्ढों के कारण दुर्घटनाओं में चोट लगने या मौत होने की जब भी शिकायत मिले तो पुलिस अधिकारी तुरंत प्राथमिकी दर्ज करें और उसकी यथासंभव जांच करें सड़क दुर्घटना से हुए जानमाल के नुकसान को अब परिजन सड़क निर्माण में शामिल लोगों को भी कानून प्रतिवादी बना सकते हैं बहुत समय पहले की बात नहीं है जब इसी प्रकार की एक दुर्घटना में उद्योगपति साइरस मिस्त्री की सड़क हादसे में मौत हो गई थी इस मामले में गाड़ी चला रही स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अनाहिता पंडोले के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था