: मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट का एतराज
Fri, Nov 25, 2022
एक
याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति में जल्दबाजी और नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए
हैं सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संवैधानिक पीठ ने याचिका की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से पेश अटॉर्नी जनरल एजी से पूछा कि नियुक्ति 1 दिन में की गई है यह जल्दबाजी दर्शाती है चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में इतनी तत्परता क्यों हम जानना चाहते हैं नियुक्ति की प्रक्रिया और आधार क्या थी कानून मंत्री ने चार नामों को किस आधार पर तय किया हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ किया कि यह किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है मैं केवल प्रक्रिया जानना चाहता हूं सरकार इसे प्रतिकूल मुकदमेंे बाजी की तरह से ना ले
सरकार की तरफ से पेश होते हुए अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि ने नियुक्ति को सही बताते हुए अनुरोध किया है कि कोर्ट नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया को देखने से पहले टीका टिप्पणी ना करें उन्हों7ने कहा है कि सभी चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति त्वरित प्रक्रिया से ही की जाती है आमतौर पर प्रक्रिया 3 दिन से अधिक नहीं चलती मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी करके फैसला सुरक्षित रख लिया है मुख्य चुनाव आयुक्त एवं चुनाव आयुक्त की प्रक्रिया से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पांच सदस्यों की संवैधानिक पीठ मैं जस्टिस केएम जोसेफ जस्टिस ऋषिकेश अनिरुद्ध बोस जस्टिस अजय रस्तोगी सहित जस्टिस सिटी रवि कुमार शामिल थ
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से संबंधित फाइल को कोर्ट में पेश करने को कहा है जिस पर अटॉर्नी जनरलने गुरुवार को कोर्ट में फाइल पेश करते हुए कहा है कि कई नियुक्तियां 24 घंटे या 12 घंटे के भीतर हुई है कोई ट्रिगर बिंदु नहीं है एक प्रक्रिया है जिसे अपनाया गया है उनकी नियुक्ति से संबंधित पूरे मामले को समग्रता से देखने की जरूरत है चयन प्रक्रिया में व्यक्त की सेवा में अनुभव उसके पास कार्यकाल के लिए बचे समय आज सभी चीजों को संपूर्णता में देखते हुए किया जाता है एवं बैच की वरिष्ठता एवं क्रम के अनुसार प्रक्रिया होती है
याचिका में कहा गया था की मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए जो कॉलेजियम बने उसमें भारत के प्रधानमंत्री लोकसभा में नेता विपक्ष और सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शामिल हो जिसकी सुनवाई करते हुए जस्टिस अजय रस्तोगी ने कहा है कि 15 मई को चुनाव आयुक्त का पद रिक्त हुआ था और 18 नवंबर को नियुक्त की गई आप बताइए कि 15 मई से 18 नवंबर के बीच नियुक्त के लिए क्या प्रक्रिया की गई संवैधानिक पीठ ने सीईसी और इसी के 6 साल के कार्यकाल के पूर्णा ना होने को भी लेकर सवाल खड़े किए उन्होंने कहा सी सी आई सी दोनों का कार्यकाल 6 वर्ष का होगा यह नियम है और इसका पालन किया जाना चाहिए जबकि उनके 6 साल के कार्यकाल से पहले नियुक्त किया जाना नियम और कानून का उल्लंघन है उन्होंने आगे कहा है कि कई बार नियुक्ति को लेकर जल्दी होती है लेकिन जब मामला यहां लंबित है तब भी यह नियुक्ति की गई है चयनित अरुण गोयल गणित में गोल्ड मेडलिस्ट है और उनका एकेडमिक रिकॉर्ड भी बहुत अच्छा है लेकिन क्या यह चैन का आधार हो सकता है
: सेना ने दो टूक कहा कि सरकार आदेश दे तो POK फिर हमारा
Tue, Nov 22, 2022
भारत
के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान के पूछे गए सवाल पर जिसमें राजनाथ सिंह ने कहा था पीओके में हो रहे अत्याचार की पाकिस्तान को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी सेना की लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्ववेदी ने कहा है कि जहां तक भारतीय सेना का संबंध है वह सर वह सरकार द्वारा दिए गए किसी भी आदेश को पूरा करेगी जब भी इस तरह के आदेश दिए जाएंगे हम हमेशा इसके लिए तैयार रहेंगे उत्तरी सेना के कमांडर ने मंगलवार को कहा है कि भारत काफी हद तक सीमा पार आतंकवाद को नियंत्रित करने में सक्षम है उन्होंने यह भी कहा है कि धारा 370 के हटने के बाद से जम्मू कश्मीर में काफी बदलाव आया है राज्य में आतंकवाद और उनकी गतिविधियों पर लगाम लगी है
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शौर्य दिवस के मौके पर जम्मू कश्मीर में बोलते हुए कहा था कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पीओके में पाकिस्तान ने जो किया है उसकी उसे कीमत चुकानी पड़ेगी उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान अपने कब्जे वाले कश्मीर में लोगों पर अत्याचार कर रहा है और इसे इसके परिणाम भुगतने होंगे उन्होंने आगे कहा है कि हमने कश्मीर का विकास कार्य शुरू कर दिया है लेकिन हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक हम गिलगित बालटिस्तान नहीं पहुंच जाते
मंगलवार को लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने खुलासा करते हुए बताया कि हमारे पास पुख्ता जानकारी है कि लगभग 160 आतंकवादी लांच पैड पर बैठे हैं जिनमें 130 पीर पंजाल के उत्तर में जबकि 30 पीरपंजाल के दक्षिण में है पूरे भीतरी इलाके में कुल 82 पाकिस्तानी आतंकवादी और 53 स्थानीय आतंकवादी है उन्होंने कहा है कि करीब 170 अज्ञात आतंकवादी भी वहां मौजूद है श्री द्विवेदी ने बताया कि इस तरह कुल 300 आतंकवादी वर्तमान में क्षेत्र फैले हुए हैं लेकिन हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि बिग किसी भी अप्रिय गतिविधि में शामिल ना हो पाए हमने कुछ हद तक आतंकवाद को नियंत्रित किया है हमारा पड़ोसी देश अब अशांति पैदा करने की छोटी-छोटी घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश में इंस्टॉल ग्रेनाइट बॉर्डर सब घुसपैठ की कोशिश कर रहा है लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर पर बड़ा बयान देते हुए लेफ्टिनेंट जनरल श्री द्विवेदी ने कहा है कि पीओके की विषय पर संसद में प्रस्ताव पास हो चुका है इसमें कुछ भी नया नहीं है यह संसद के प्रस्ताव का हिस्सा है भारतीय सेना सरकार के हर आदेश के लिए पूरी तरह से तैयार है सरकार जब भी आदेश देगी सेना अपनी पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ेगी चिनार कॉर्प्स कमांडर ने कहा है कि जब भी ऐसा फैसला होगा यह सेना को ऐसा आदेश दिया जाएगा भारतीय सेना उस पर कार्यवाही करने के लिए पूरी तरह तैयार है आपको बताते चलें कि यह पहली बार नहीं है कि जब सेना ने पीओके वापस लेने के अपने मंसूबों को जगजहिर किया है इससे पहले भी चिनार चिनार कार्स लेफ्टिनेंट जनरल एडेएस औजला ने कहा था कि भारतीय सेना हमेशा तैयार है एक बार पीओके को हासिल करने का आदेश मिला तो फिर हम पीछे मुड़कर नहीं देखेंगे
: निर्वाचन आयोग के निर्देशों के बावजूद हिमाचल प्रदेश में अपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े हुए प्रत्याशियों की भरमार
Fri, Nov 11, 2022
हिमाचल प्रदेश मैं होने वाली 12 नवंबर को चुनाव के लिए आज शाम 5:00 बजे तक प्रचार थम जाएगा साथ साथ प्रशासन ने भी अपनी तैयारियां पुख्ता की है और सुरक्षा के मजबूत इंतजाम रखें पोलिंग पार्टियां भी मतदान केंद्रों के लिए रवाना हो रही है निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं लेकिन खास बात यह है कि कुल नामांकन 412 में से 94 प्रत्याशी अपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े हैं जिनके ऊपर संगीन वारदातें दर्ज है अब ऐसे में सवाल उठता है क्या हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक पार्टियों की पहली पसंद अपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशी हैं त्रिकोणीय संघर्ष के बीच भाजपा कांग्रेस और आप के राजनेता बड़ी-बड़ी चुनावी रैलियों मे हिमाचल प्रदेश को भ्रष्टाचार मुक्त लूटपाट और माफिया गिरी से निजात दिलाने की बात करते आए हैं जबकि सत्य है कि सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े हुए प्रत्याशियों पर जी भर कर दांव लगाया हैभारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशा निर्देशों के बावजूद ऐसे प्रत्याशियों को जो अपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े हुए हैं उन पर विश्वास जताने की आखिर राजनीतिक पार्टियों की क्या मजबूरी हो सकती है यह तो पता 8 दिसंबर के परिणाम आने के बाद ही चलेगा की जनता ने अपना भरोसा कहां जताया है लेकिन यहां एक बात तो तय है कि अपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े हुए प्रत्याशियों के मामले में चुनाव आयोग द्वारा जारी एडवाइजरी को राजनीतिक पार्टियों ने ताक पर उठा कर रख दिया है