: मुलायम की विरासत संभालेंगी उनकी बहू डिंपल यादव
Fri, Nov 11, 2022
मैनपुरी से लोकसभा उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी होंगी डिंपल यादव यहां से सन 2019 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव ने रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की थी अभी हाल ही में गुड़गांव के मेदांता हॉस्पिटल में लंबी बीमारी के चलते उनका निधन हो गया था मैनपुरी की लोकसभा सीट लंबे समय से समाजवादी पार्टी के पास रही है यादव बहुल मैनपुरी की इस लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों ने हमेशा रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की है जातिगत समीकरणों के आधार पर देखें तो यादव सवा चार लाख और शाक्य मतदाता 3 लाख से ऊपर होने के कारण बहुदा यादव और शाक्य प्रत्याशी के बीच ही जोर आजमाइश होती है समाजवादी पार्टी ने हमेशा यहां पर यादव प्रत्याशी ही घोषित किया है तो धुर विरोधी भाजपा ने अधिकतर शाक्य प्रत्याशी पर दांव खेला है अब जबकि मुलायम सिंह की कर्म स्थली कहीं जाने वाले जनपद मैनपुरी से उनकी बहू को प्रत्याशी बनाया गया है तो देखने वाली बात होगी मुलायम सिंह के निधन के बाद मैनपुरी की जनता सैफई परिवार पर कितना विश्वास जता पाती है ऐसे में जब मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई शिवपाल यादव खुद समाजवादी पार्टी की राजनीति में हाशिए पर खड़े हो मुलायम सिंह यादव के बाद शिवपाल यादव का रुख भी मैनपुरी के यादव मतदाताओं को प्रभावित करेगा
: निर्वाचन आयोग के निर्देशों के बावजूद हिमाचल प्रदेश में अपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े हुए प्रत्याशियों की भरमार
Fri, Nov 11, 2022
हिमाचल प्रदेश मैं होने वाली 12 नवंबर को चुनाव के लिए आज शाम 5:00 बजे तक प्रचार थम जाएगा साथ साथ प्रशासन ने भी अपनी तैयारियां पुख्ता की है और सुरक्षा के मजबूत इंतजाम रखें पोलिंग पार्टियां भी मतदान केंद्रों के लिए रवाना हो रही है निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं लेकिन खास बात यह है कि कुल नामांकन 412 में से 94 प्रत्याशी अपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े हैं जिनके ऊपर संगीन वारदातें दर्ज है अब ऐसे में सवाल उठता है क्या हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक पार्टियों की पहली पसंद अपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशी हैं त्रिकोणीय संघर्ष के बीच भाजपा कांग्रेस और आप के राजनेता बड़ी-बड़ी चुनावी रैलियों मे हिमाचल प्रदेश को भ्रष्टाचार मुक्त लूटपाट और माफिया गिरी से निजात दिलाने की बात करते आए हैं जबकि सत्य है कि सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े हुए प्रत्याशियों पर जी भर कर दांव लगाया हैभारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशा निर्देशों के बावजूद ऐसे प्रत्याशियों को जो अपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े हुए हैं उन पर विश्वास जताने की आखिर राजनीतिक पार्टियों की क्या मजबूरी हो सकती है यह तो पता 8 दिसंबर के परिणाम आने के बाद ही चलेगा की जनता ने अपना भरोसा कहां जताया है लेकिन यहां एक बात तो तय है कि अपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े हुए प्रत्याशियों के मामले में चुनाव आयोग द्वारा जारी एडवाइजरी को राजनीतिक पार्टियों ने ताक पर उठा कर रख दिया है