: 15 दिसंबर को राजस्थान में भजनलाल शर्मा लेंगे CM पद की शपथ, PM और शाह हो सकते हैं शामिल
Wed, Dec 13, 2023
जयपुर 12 दिसंबर राजनीतिक इतिहास में 15 दिसंबर को एक नया पन्ना जुडने जा रहा है। शुक्रवार को राज्य के मनोनीत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को राज्यपाल कलराज मिश्र शपथ ग्रहण कराएंगे। वहीं, दीया कुमारी और प्रेम चंद बैरवा को कैबिनेट सदस्य के रूप में शपथ दिलाएंगे।बीजेपी की राजस्थान इकाई के प्रमुख सीपी जोशी ने बुधवार को ऐलान किया कि शपथ समारोह सुबह 11:15 बजे जयपुर में अल्बर्ट हॉल के बाहर होगा। शपथ समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कई अन्य नेताओं की उपस्थिति की उम्मीद है।विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ नेताओं और मुख्यमंत्रियों को भी निमंत्रण दिया गया है। विद्याधर नगर का प्रतिनिधित्व करने वाली दीया कुमारी और दादू का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रेम चंद बैरवा को कैबिनेट सदस्य के रूप में शपथ लेंगे।https://twitter.com/ANI/status/1734911892391698887?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1734911892391698887%7Ctwgr%5E54f90ddc73288e1391d009f0d9eed9c3a3193ba9%7Ctwcon%5Es1_c10&ref_url=http%3A%2F%2Fapi-news.dailyhunt.in%2Fकई दिनों के सस्पेंस के बाद, बीजेपी ने मंगलवार को सांगानेर विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने भजनलाल शर्मा को राजस्थान का मुख्यमंत्री घोषित किया। अजमेर उत्तर विधायक वासुदेव देवनानी को विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका निभाने के लिए चुना गया है।
: हमेशा के लिए खत्म हो गई धारा 370 सुप्रीम कोर्ट का फैसला!
Wed, Dec 13, 2023
नई दिल्ली 13 दिसंबर जम्मू-कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के केंद्र सरकार के 2019 के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने 11 दिसबंर को फैसला सुनाया इस अनुच्छेद के जरिए जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा मिला हुआ था। जो की 5 सितंबर 2019 मैं केंद्र सरकार की फैसले के बाद समाप्त कर दिया गयादेश के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायधीशों की पीठ ने सोमवार को सुबह 11 बजे ही इस मामले में फैसला पढ़ना शुरू किया। इस पीठ में सीजेआई के अलावा, जस्टिस संजय किशन कौल, संजीव खन्ना, बीआर गवई और सूर्यकांत हैं। गौरतलब है कि सितंबर माह में लगातार 16 दिनों तक सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
तीन अलग-अलग फैसले
अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के खिलाफ फैसला सुनाने के लिए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि पांच जजों के तीन अलग-अलग फैसले हैं। जिन तीन फैसलों को सुनाया जाना है, उस पर सभी एकमत हैं।चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि हमने उस दौरान राज्य में लगे राष्ट्रपति शासन पर फैसला नहीं लिया है। स्थिति के अनुसार राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। अनुच्छेद 356 में राष्ट्रपति को शक्तियां हासिल हैं। उसे चुनौती नहीं दी जा सकती है। संवैधानिक स्थिति यही है कि उनका उचित इस्तेमाल होना चाहिए। अनुच्छेद 356 – राज्य सरकार भंग कर राष्ट्रपति शासन लगाने की बात करता है। राष्ट्रपति शासन के दौरान केंद्र राज्य सरकार की जगह फैसले ले सकता है। संसद राज्य विधानसभा की जगह काम कर सकता है।
: जम्मू कश्मीर पुनर्गठन संशोधन विधेयक 2023 लोकसभा से पास
Wed, Dec 6, 2023
नई दिल्ली 6 दिसंबर जम्मू कश्मीर पुनर्गठन संशोधन विधेयक लोकसभा में जोरदार बहस के बाद आखिरकार पास कर दिया गया. इस बहस पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि बिल के उद्देश्यों पर सभी की सहमति हैउन्होंने कहा कि ये बिल लोगों को न्याय दिलाने के लिए है. मैं जो विधेयक लेकर आया हूं, वह बिल 70 वर्षों से जिन पर अन्याय हुआ, अपमानित हुए और जिनकी अनदेखी की गई, उनको न्याय दिलाने का बिल है.केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि ये बिल 70 सालों में जिनके साथ अन्नाय हुआ उनको आगे बढ़ाने का बिल है. जो लोग अपने ही देश में विस्तापित हुए ये बिल उनको सम्मान और नेतृत्व देने का है. उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि किसी ने इस बिल का विरोध नहीं किया. छह घंटे की चर्चा चली. जिन पर आतंकवाद को रोकने की जिम्मेदारी थी. वो इंग्लैंड में छुट्टियां मना रहे थे.शाह ने कहा कि जो लोग ये पूछ रहे थे कि विस्थापित कश्मीरी पंडितों को आरक्षण देने से क्या होगा.. तो मैं कहना चाहता हूं कि कश्मीरी पंडितों को आरक्षण देने से कश्मीर की विधानसभा में उनकी आवाज गूंजेगी और अगर फिर विस्थापन की स्थिति आएगी तो वो उसे रोकेंगे. जो ये कहते हैं कि धारा 370 हटने से क्या हुआ?इस पर मैं कहना चाहता हूं कि 5-6 अगस्त 2019 को इनकी वर्षों से न सुनी जाने वाली आवाज को मोदी जी ने सुना और आज उनको उनका अधिकार मिल रहा है. जब कश्मीरी विस्थापित हुए, तो अपने ही देश में उन्हें शरणार्थी बनना पड़ा. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी देश के एसे नेता हैं, जो गरिब से गरिब परिवार से आते हैं. वो पिछड़ा वर्ग का भी दर्द जानते हैं और गरीब का भी दर्द जानते हैं.