: पर्यटन विकास की निर्माणाधीन परियोजनाओं को 15 जनवरी तक निपटाए:-- जयवीर सिंह
Thu, Dec 22, 2022
पर्यटन विकास की निर्माणाधीन परियोजनाओं को
आगामी 15 जनवरी, तक पूरा करेअप्रैल, 2022 से अक्टूबर, 2022 तक 194 पर्यटन से संबंधित योजनाएं पूर्णपर्यटन मंत्री ने विभागीय कार्यों की समीक्षा की
लखनऊः 22 दिसम्बर, 2022
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने पर्यटन विकास एवं मा0 मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना के क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं तथा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि निर्माणाधीन परियोजनाओं के सभी कार्य गुणवत्ता एवं समयबद्धत्ता के साथ आगामी 15 जनवरी, 2023 तक हरहाल में पूरा करें एवं उससे संबंधित हाई रिज्युलूशन फोटोग्राफ एवं क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। जिन परियोजनाओं के लिए धनराशि आवंटित कर दी गई है उससे जुड़ी टेंण्डर की प्रक्रिया पूरा कराकर निर्माण कार्य जल्द-जल्द शुरू कराया जाये। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का प्रयोग करने पर संबंधित कार्यदायी संस्था के खिलाफ विधिक कार्यवाही की जायेगी।
पर्यटन मंत्री आज यहां पर्यटन भवन में विगत अप्रैल, 2022 से अक्टूबर, 2022 तक समय-समय पर आयोजित समीक्षा बैठकों में दिए गए निर्देशों एवं निर्णयों के कार्यान्वयन के प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कार्यदायी संस्थाओं के प्रोजेक्ट मैनेजर एवं पर्यटन विभाग के क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले एवं निर्माण के समय आपसी समन्वय बनाकर लोकेशन पर जाकर निरीक्षण करें। उन्होंने कहा कि कुछ कार्यदायी संस्थाओं द्वारा निर्माणाधीन परियोजनाओं को तेजी से पूरा नहीं कर रहे हैं, यह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि लम्बित परियोजनाओं एवं अवशेष कार्यों को तत्काल पूरा करा लिया जाये।
जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न धार्मिक पौराणिक एवं ऐतिहासिक स्थलों पर पर्यटकों के लिए स्थापना सुविधाओं से संबंधित योजनाएं शुरू की गई हैं। इन योजनाओं के पूरा हो जाने से पर्यटकों की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी तथा साफ-सुथरा वातावरण मिलने पर प्रदेश की छवि भी देशी और विदेशी शैलानियों के बीच में एक अच्छा संदेश पहुँचायेगी। उन्होंने हर ऐजेन्सी को आवंटित परियोजनाओं की बिन्दुवार समीक्षा की और कमियां पाये जाने पर कुछ एजेन्सियों को अपनी कार्य पद्धति में बदलाव लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में उ0प्र0 ने पर्यटन के क्षेत्र में भारी निवेश आने की संभावना है, इससे प्रदेश में पर्यटकों का आवागमन बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि निर्मित परियोजनाओं में उच्च गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया जाए।
जयवीर सिंह ने कहा कि कार्य में किसी प्रकार की डुप्लीकेसी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने वृन्दावन में बनी हुई सड़क को दोबारा बनाये जाने की जानकारी होने पर इसकी जांच हेतु मण्डलायुक्त को पत्र लिखने का निर्देश दिया, ताकि इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की जा सके। उन्होंने महाराजा सुहेलदेव से संबंधित कार्य बसंत पंचमी से पूर्व पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने धनराशि स्वीकृत होने के बाद कार्य में अपेक्षित गति न लाने पर नाराजगी व्यक्त की।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि उ0प्र0 ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2023 के लिए पूरी तैयारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस समिट के दौरान 10 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य रखा है। पर्यटन सेक्टर में भारी निवेश आाने की सम्भावना है। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया एवं जापान से भी पर्यटन के क्षेत्र में निवेश के लिए प्रतिष्ठित कम्पनियों ने रूचि दिखाई है। इसके लिए पर्यटन विभाग तैयारी शुरू करे। उन्होंने कहा कि पर्यटन सेक्टर के लिए यह सुनहरा अवसर है, इसलिए प्रदेश की क्षमता एवं सामर्थ्य को निवेशकों के समक्ष प्रदर्शित करके अधिक से अधिक निवेश प्राप्त करना है। उन्होंने मा0 मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना के अंतर्गत संचालित निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।
प्रमुख सचिव पर्यटन ने कहा कि अप्रैल, 2022 से लेकर अब तक 194 परियोजनाएं पूरी कर ली गई हैं। लम्बित एवं अवशेष कार्यों वाली परियोजनाओं को शीघ्र ही पूरा किया जाए। उन्होंने कार्यदायी संस्थाओं को कार्य में तेजी लाने एवं आवंटित धनराशि का समय से उपयोग करके आवश्यक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी कार्यदायी संस्थाएं एवं क्षेत्रीय अधिकारी अपने-अपने अधीन संचालित योजनाओं के सभी कार्य आगामी 15 जनवरी तक पूरा कर लें। जो योजनाएं धरातल पर आकार नहीं ले सकती उनकों निरस्त करके आवंटित धनराशि मुख्यालय को वापस की जाएं।
समीक्षा बैठक में विशेष सचिव पर्यटन श्री अश्वनी कुमार पाण्डेय, महानिदेशक पर्यटन श्री प्रखर मिश्र (आईएफएस), पर्यटन सलाहकार श्री जे0पी0 सिंह, उपनिदेशक श्री दिनेश एवं कल्याण सिंह सहित विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि, क्षेत्रीय अधिकारी एवं अन्य अधिकारी मौजूद थे।
: नमामि गंगे प्रोजेक्ट की प्रगति रिपोर्ट पर सरकार संतुष्ट लेकिन जनता की प्रतिक्रिया
Wed, Dec 21, 2022
लखनऊ: 21 दिसम्बर, 2022गंगा जी व सहायक नदियों को अविरल-निर्मल बनाने के संकल्प के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में संचालित ‘नमामि गंगे’ परियोजना के अत्यन्त संतोषप्रद परिणाम देखने को मिले हैं। गंगा व सहायक नदियों की स्वच्छता के इस अभियान में केन्द्र व राज्य सरकार के प्रयासों में जनसहयोग भी प्राप्त हो रहा है। आज गंगा नदी में डॉल्फिन की वापसी हुई है। तकनीक का प्रयोग कर नदियों को स्वच्छ बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री लोक भवन में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में ‘नमामि गंगे’ परियोजना के क्रियान्वयन की समीक्षा कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जी की अध्यक्षता में वर्ष 2019 में राष्ट्रीय गंगा परिषद की प्रथम बैठक कानपुर में सम्पन्न हुई थी। आगामी 30 दिसम्बर को राष्ट्रीय गंगा परिषद की द्वितीय बैठक प्रस्तावित है। इसके लिए आवश्यक तैयारी समय से पूरी कर ली जाए।
नमामि गंगे परियोजना, गंगा नदी के साथ-साथ सहायक नदियों के लिये भी है। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में यहां अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। जनपद कानपुर के जाजमऊ तथा सीसामऊ नाले से गिरने वाले गन्दे पानी को गंगा नदी में गिरने से रोकने के लिये प्रभावी प्रयास किये गये हैं। आज यह सेल्फी प्वाइंट बन गया है। गंगा सहित सभी नदियों की अविरलता तथा निर्मलता सुनिश्चित करने के लिए नगरीय ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन के लिए और प्रयास किए जाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मां गंगा, उत्तर प्रदेश को प्रकृति प्रदत्त अनुपम उपहार हैं। गंगा नदी के बहाव का सर्वाधिक क्षेत्र उत्तर प्रदेश में है। यह हमारी आस्था का केन्द्र बिन्दु हैं एवं अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार भी हैं। प्रयागराज महाकुम्भ 2025 के प्रारम्भ होने से पहले तक गंगा को अविरल-निर्मल बनाने का संकल्प पूर्ण करना होगा। नदियों को सीवरेज की गंदगी और पानी को विषाक्त होने से बचाने के लिए एस0टी0पी0 लगाए जाने की कार्यवाही में तेजी लायी जाए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि मां गंगा अनादिकाल से हमारी आस्था का केन्द्र रही हैं। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में यह आस्था के साथ अर्थव्यवस्था का आधार भी बन रही हैं। ‘अर्थ गंगा अभियान’ का सर्वाधिक लाभ उन करोड़ों लोगों को होगा, जिनकी आजीविका गंगा नदी पर ही निर्भर है। अर्थ गंगा से सकल घरेलू उत्पाद में 03 प्रतिशत का योगदान होने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हमंे ठोस प्रयास करने होंगे। विशेषज्ञों की सहायता से इसे एक मॉडल के रूप में विकसित करने के लिए प्रयास किये जाएं।
किसानों की आय बढ़ाने और विषमुक्त खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा गंगा नदी के दोनों तटों पर 05-05 किलोमीटर तक प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं। प्रदेश के 27 जनपद गंगा नदी से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा बुन्देलखण्ड के 07 जनपदों में प्राकृतिक खेती के लिए विशेष अभियान शुरु किया गया है। वर्तमान में लगभग 85 हजार हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती हो रही है। इस बार यहां उत्पादन अच्छा हुआ है।
जीरो बजट वाली प्राकृतिक खेती के अच्छे परिणामों के तुलनात्मक रिपोर्ट के साथ किसानों को जागरुक किया जाए। राज्य स्तरीय प्राकृतिक खेती बोर्ड का गठन किया गया है। प्राकृतिक खेती के अभियान से अधिकाधिक किसानों को जोड़ा जाए। अब तक प्रदेश में 66,180 हेक्टेयर क्षेत्र को जैविक खेती तहत लाया गया है। एक लाख से अधिक किसान जैविक खेती से लाभान्वित हो रहे हैं। सभी किसानों को भारत सरकार के जैविक खेती पोर्टल से जोड़ा जाए। जैविक उत्पादों की पहचान करने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सभी मण्डल मुख्यालयों पर प्रयोगशाला की स्थापना की जाए। इसी प्रकार सभी कृषि मण्डियों में जैविक उत्पाद के आउटलेट भी स्थापित किए जाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मां गंगा का हर घाट पवित्र है। इसके किनारे अनेक तीर्थ क्षेत्र, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थल तथा असीम प्राकृतिक सुन्दरता है। इन क्षेत्रों में पर्यटन की नवीन सम्भावनाओं को बढ़ावा दिया जाए। यहां एडवेंचर टूरिज्म तथा वॉटर स्पोर्ट टूरिज्म की अपार सम्भावना है। प्रधानमंत्री के प्रयासों से इस दिशा में वाराणसी में प्रेरक प्रयास हुए हैं। रिवर क्रूज टूरिज्म, वॉटर स्पोर्ट/कैम्पिंग सुविधाओं के साथ वन्य जीव पर्यटन के मॉडल को विकसित किया जाए।
प्रधानमंत्री ने नदी शहरों के लिए नई सोच की आवश्यकता बताई है। नमामि गंगे के अनुभवों से सीख लेते हुए नदी किनारे बसे शहरों की योजना बनाने में नई नदी केन्द्रित सोच की जरूरत है। यह शहर के मास्टर प्लान का हिस्सा होना चाहिए। आई0आई0टी0 कानपुर के तकनीकी सहयोग से इस सम्बन्ध में आवश्यक कार्यवाही की जाए। महिला स्वयं सहायता समूहों, भूतपूर्व सैनिकों आदि के सहयोग से गंगा नर्सरी विकसित करने के प्रयास किये जायें। यहां नर्सरी से लेकर फलों के प्रसंस्करण की पूरी वैल्यू चेन बनायी जाए। यह ‘गंगा उत्पाद’ गंगा किनारे के लोगों के लिए आय के स्थायी साधन बन सकते हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि नदी संस्कृति के प्रति व्यापक जागरूकता बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। जल संरक्षण, नदियों की स्वच्छता, नदी पुनर्जीवन तथा स्वच्छता के अभियान से बच्चों को भी जोड़ा जाए। माध्यमिक कक्षाओं के पाठ्यक्रम में इस विषय को शामिल किया जाए। युवक मंगल दल/महिला मंगल दल के माध्यम से समाज को जागरूक करने के प्रयास किये जाएं।
इस अवसर पर जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, कृषि उत्पादन आयुक्त मनोज कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव कृषि देवेश चतुर्वेदी, अपर मुख्य सचिव दुग्ध विकास एवं पशुपालन डॉ0 रजनीश दुबे, अपर मुख्य सचिव खेल नवनीत सहगल, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री एस0पी0 गोयल, प्रमुख सचिव पर्यटन मुकेश मेश्राम, प्रमुख सचिव नमामि गंगे श्री अनुराग श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव राजस्व सुधीर गर्ग, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री, सूचना एवं गृह संजय प्रसाद सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
: मरीज से अवैध वसूली पर दो डॉक्टर व पाँच कर्मचारी बर्खास्त
Tue, Dec 20, 2022
मरीज से अवैध वसूली पर दो डॉक्टर व पाँच कर्मचारी बर्खास्तगोंडा महिला चिकित्सालय की अधीक्षिका समेत अन्य डॉक्टर व स्टाफ नर्स पर कार्रवाई
मरीज से अवैध वसूली व अस्पताल में अव्यवस्था पर बिफरे उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक
लखनऊ। 20 दिसंबर
गोंडा महिला अस्पताल में भारी अव्यवस्था और अवैध वसूली के मामले को उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने गंभीरता से लिया है। मीडिया में खबरें आने के बाद उप मुख्यमंत्री ने मामले की मंडलीय अपर निदेशक से जाँच कराई। जाँच में शिकायतें सही पाईं गईं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका समेत एक डॉक्टर व स्टाफ नर्स पर वृहद कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही दो डॉक्टर, पाँच कर्मचारियों को बर्खास्त करने के निर्देश दिए हैं। गैरहाजिर 18 कर्मचारियों से स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
बीते दिनों मीडिया में गोंडा महिला अस्पताल में अव्यवस्था संबंधी खबर आई। इसका संज्ञान उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने लिया। मामले को गंभीरता से लेते हुए मंडलीय अपर निदेशक को जाँच के निर्देश दिए। मंडलीय अपर निदेशक ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में अव्यवस्था पाई गई। अवैध वसूली सम्बन्धी समस्त शिकायते भी सही मिलीं।प्रमुख सचिव को कार्रवाई के निर्देश
जाँच के आधार पर उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा को गोंडा जिला महिला चिकित्सालय की मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका डॉ. सुषमा सिंह, चिकित्साधिकारी डॉ. सुवर्णा एवं स्टॉफ नर्स, शर्मिला के विरूद्ध वृहद दण्ड की कार्यवाही किये जाने के निर्देश दिये हैं। साथ ही डॉ. ज्योतिमा सिंह, डॉ. परवेज इकबाल, ओटी टेक्नीशियन महेन्द्र यादव, आशुतोष त्रिपाठी, विष्णु, स्टॉफ नर्स नीतू व आशा सरिता सिंह को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने के आदेश दिए हैं।18 गैरहाजिर कर्मचारियों से स्पष्टीकरण तलब
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि अधिकारियों ने जाँच के दौरान अस्पताल का भ्रमण किया। डॉक्टर-कर्मचारियों का हाजिरी रजिस्टर देखा। इसमें बिना बताये अस्पताल से 18 कर्मचारी गायब मिले। सभी से स्पष्टीकरण तलब किया गया है।लापरवाह डॉक्टर-कर्मचारी नपेंगे
उप मुख्यमंत्री ने साफ कहा लापरवाही और मरीजों से अवैध वसूली कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसा करने वाले डॉक्टर और कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई होगी। मरीजों को पीड़ा देने वालों को किसी भी दशा में स्वीकार नहीं किया जायेगा।