: अपराधिक मामले छुपा कर अब नहीं बन सकेंगे एडवोकेट :- इलाहाबाद उच्च न्यायालय
Wed, Dec 27, 2023
प्रयागराज 27 दिसंबर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार व उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को आपराधिक केस में आरोपी या सजायाफ्ता किसी भी व्यक्ति को वकालत का लाइसेंस देने पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि बार काउंसिल आवेदन फॉर्म में ही दर्ज अपराध के खुलासे की प्रक्रिया अपनाएं। लाइसेंस जारी करने से पहले पुलिस से रिपोर्ट ली जाए। तथ्य छिपाकर लाइसेंस लेने का खुलासा होने पर आवेदन निरस्त कर दिया जाए।कोर्ट ने यह आदेश 14 आपराधिक केसों का इतिहास और चार केस में सजायाफ्ता विपक्षी को वकालत का लाइसेंस देने के खिलाफ शिकायत पर बार काउंसिल द्वारा निर्णय लेने में देरी को देखते हुए दिया है। कोर्ट ने विपक्षी जय कृष्ण मिश्र के खिलाफ याची की शिकायत को तीन माह में निस्तारित करने का निर्देश बार काउंसिल को दिया है। कोर्ट ने कहा है कि ऐसे लोगों को वकालत का लाइसेंस दिया जाता रहा तो यह विधि व्यवसाय ही नहीं समाज के लिए भी यह नुकसानदायक होगा। कोर्ट ने आवेदन में खुलासे की प्रक्रिया को लंबित व दाखिल होने वाले सभी आवेदनों पर लागू करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति एसडी सिंह तथा न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की खंडपीठ ने अधिवक्ता पवन कुमार दुबे की याचिका पर दिया है।याचिका पर अधिवक्ता सुरेश चंद्र द्विवेदी ने बहस की। इनका कहना था कि विपक्षी अधिवक्ता का आपराधिक इतिहास है और सजायाफ्ता है फिर भी बार काउंसिल ने उसे लाइसेंस दे दिया है। इसके खिलाफ याची की 25 सितंबर 22 को की गई शिकायत पर कोई निर्णय नहीं लिया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे लोगों को लाइसेंस देने पर एडवोकेट एक्ट में प्रतिबंधित किया गया है।कोर्ट ने बार काउंसिल से कहा कि वह लाइसेंस देने की प्रक्रिया में संबंधित थाने की पुलिस रिपोर्ट भी शामिल करे। साथ ही आवेदन में दर्ज अपराध का खुलासा अनिवार्य किया जाए। तथ्य छिपाने पर आवेदन निरस्त कर दिया जाए। बार काउंसिल ने अभी तक ऐसी प्रक्रिया नहीं अपनाई है।
: जेवर एयरपोर्ट के पास जमीन खरीदने का सुनहरा मौका
Tue, Dec 19, 2023
लखनऊ 19 दिसंबर दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख शहरों में से एक नोएडा में विकास की इबारत लिखी जा रही है. इसी क्रम में नोएडा के जेवर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाया जा रहा है. एयरपोर्ट को रेलवे, मेट्रो और RRTS से जोड़ने की महत्वकांक्षी योजना तैयार की गई हैजेवर में विकास कार्यों को देखते हुए आसपास के इलाकों में जमीन की कीमतें काफी बढ़ गई हैं. अब उत्तर प्रदेश सरकार बड़ी योजना लेकर आई है. योगी सरकार ने निर्माणाधीन एयरपोर्ट के आसपास प्लॉट बेचने का फैसला किया है. इसके लिए ई-नीलामी की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. साथ ही इसके लिए अंतिम तिथि भी निर्धारित कर दी गई है. ऐसे में लीज पर प्लॉट लेने के इच्छुक व्यक्ति इसके लिए आवेदन कर सकते हैं.उत्तर प्रदेश सरकार ने बताया कि उसने नोएडा हवाई अड्डे के पास 5 श्रेणियों में संस्थागत भूखंडों के लिए ई-नीलामी शुरू की है. सरकार ने एक बयान में कहा कि आवंटन यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) द्वारा प्रबंधित क्षेत्र में किया जाएगा. बयान के अनुसार, 'नोएडा हवाई अड्डे के निकट स्थित इन भूखंडों के रणनीतिक आवंटन से ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-18, 20 और 22ई में नर्सिंग होम, अस्पताल, प्रसूति केंद्र, कॉरपोरेट कार्यालय और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के विकास के लिए एक प्रमुख स्थान प्रदान किया जाएगा
नीलामी हो चुकी शुरू
यीडा द्वारा हाल में शुरू की गई योजना के तहत इच्छुक पक्ष 1 जनवरी 2024 तक जमीन अधिग्रहण के लिए आवेदन कर सकते हैं. ई-नीलामी प्रक्रिया 29 फरवरी 2024 तक पूरी होने वाली है. सरकार ने कहा कि जेवर क्षेत्र में बन रहे हवाई अड्डे से रणनीतिक निकटता के साथ ये भूखंड प्रमुख स्थानों पर स्थित हैं और योजना के तहत जमीन 90 साल की अवधि के लिए लीजहोल्ड के आधार पर आवंटित किए जाएंगे.
बसेगी फिल्म सिटी
उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा शहर के पास बन रहे जेवर एयरपोर्ट के निकट भारत की सबसे बड़ी फिल्म सिटी बसेगी. एक हजार एकड़ जमीन पर बसने वाली फिल्म सिटी के पहले चरण में विकासकर्ता कंपनी की तलाश की जा रही है. दुनिया की किसी एक कंपनी को जेवर एयरपोर्ट के पास देश की सबसे बड़ी फिल्म सिटी का विकास करना है. कंपनी की तलाश के लिए जारी किए गए टेंडर की अंतिम तारीख 22 दिसंबर है.
: हमेशा के लिए खत्म हो गई धारा 370 सुप्रीम कोर्ट का फैसला!
Wed, Dec 13, 2023
नई दिल्ली 13 दिसंबर जम्मू-कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के केंद्र सरकार के 2019 के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने 11 दिसबंर को फैसला सुनाया इस अनुच्छेद के जरिए जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा मिला हुआ था। जो की 5 सितंबर 2019 मैं केंद्र सरकार की फैसले के बाद समाप्त कर दिया गयादेश के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायधीशों की पीठ ने सोमवार को सुबह 11 बजे ही इस मामले में फैसला पढ़ना शुरू किया। इस पीठ में सीजेआई के अलावा, जस्टिस संजय किशन कौल, संजीव खन्ना, बीआर गवई और सूर्यकांत हैं। गौरतलब है कि सितंबर माह में लगातार 16 दिनों तक सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
तीन अलग-अलग फैसले
अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के खिलाफ फैसला सुनाने के लिए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि पांच जजों के तीन अलग-अलग फैसले हैं। जिन तीन फैसलों को सुनाया जाना है, उस पर सभी एकमत हैं।चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि हमने उस दौरान राज्य में लगे राष्ट्रपति शासन पर फैसला नहीं लिया है। स्थिति के अनुसार राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। अनुच्छेद 356 में राष्ट्रपति को शक्तियां हासिल हैं। उसे चुनौती नहीं दी जा सकती है। संवैधानिक स्थिति यही है कि उनका उचित इस्तेमाल होना चाहिए। अनुच्छेद 356 – राज्य सरकार भंग कर राष्ट्रपति शासन लगाने की बात करता है। राष्ट्रपति शासन के दौरान केंद्र राज्य सरकार की जगह फैसले ले सकता है। संसद राज्य विधानसभा की जगह काम कर सकता है।