: पर्यटन और कृषि को जोड़कर ग्रामीण अंचलों को आर्थिक रूपuसे आत्मनिर्भर बनाने की पहल -जयवीर सिंह
Tue, Sep 9, 2025
लखनऊ: 09 सितंबर, 2025 उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने राज्य में पहली बार फार्म-स्टे आवास विकसित व संचालित करने के लिए निवेशकों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। इस पहल को राज्य को कृषि-पर्यटन का अग्रणी केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। मंत्री ने बताया कि योजना के तहत परिभाषित फार्म स्टे ऐसा पर्यटक आवास है, जो खेत या उसके निकट बनाया जाएगा। यह आवास मालिक के घर से अलग होगा। इसमें कम से कम दो किराए पर देने योग्य कमरे तथा एक रिसेप्शन क्षेत्र अनिवार्य रूप से होगा। हर फार्म स्टे में पर्यटकों को ग्रामीण जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव देने के लिए कृषि कार्य, बागवानी, मत्स्य पालन, डेयरी फार्मिंग, पशुपालन, फार्म टूर या अन्य स्वीकृत ग्रामीण गतिविधियां उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। इस प्रकार आगंतुक के लिए पूरा गांव ही आकर्षण का केंद्र बनेगा।
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने यह जानकारी देते हुए बताया कि पर्यटकों को खेती-बाड़ी, ग्रामीण संस्कृति और गांवों में आतिथ्य सत्कार का विशेष अनुभव मिलेगा। फार्म-स्टे से न केवल पर्यटन को नई पहचान मिलेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी सशक्त होगी। योजना के तहत प्रोत्साहन पैकेज का प्रावधान है। पूंजी निवेश पर सब्सिडी प्रदान की जाएगी, जो इस प्रकार है- 10 लाख रुपए से 10 करोड़ रुपए के बीच 25 प्रतिशत (अधिकतम 02 करोड़ रुपए), 50 करोड़ तक 20 फीसदी (अधिकतम 07.5 करोड़ रुपए), 200 करोड़ रुपए तक 15 फीसदी (अधिकतम 20 करोड़ रुपए), 500 करोड़ रुपए तक 10 प्रतिशत (अधिकतम 25 करोड़ रुपए) और 500 करोड़ रुपए से अधिक पर 10 फीसदी (अधिकतम 40 करोड़ रुपए) होगी।
पर्यटन मंत्री ने बताया कि निवेशकों को सामान्य प्रोत्साहनों के अलावा अतिरिक्त सब्सिडी भी दी जाएगी। महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति/जनजाति और पिछड़ा वर्ग के निवेशकों को विशेष रियायतें मिलेंगी। इसी तरह फोकस टूरिज्म डेस्टिनेशन में स्थापित किए जाने वाले प्रोजेक्ट्स को भी 05 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी प्रदान की जाएगी। हालांकि, यह सब्सिडी अधिकतम 30 प्रतिशत की सीमा तक ही सीमित रहेगी।
पर्यटन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए ब्याज सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। इसके तहत 05 करोड़ रुपए तक के बैंक ऋण पर 5 फीसदी ब्याज सब्सिडी दी जाएगी। एक निवेशक को प्रति वर्ष अधिकतम 25 लाख रुपए तक की सब्सिडी मिल सकेगी, जो अधिकतम 5 वर्षों तक लागू रहेगी। निवेशकों और उद्यमियों को प्रोत्साहन देने के लिए भी बड़े कदम भी उठाए गए हैं। नई घोषणा के तहत स्टाम्प ड्यूटी, भूमि रूपांतरण शुल्क और विकास शुल्क पर 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। इस निर्णय से निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ-साथ राज्य में औद्योगिक और पर्यटन परियोजनाओं को गति मिलेगी।
औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहित करने और युवाओं को अधिक रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। नई व्यवस्था के तहत ऐसी इकाइयों जो 50 या उससे अधिक स्थानीय कर्मचारियों की नियुक्ति करेंगी, उन्हें नियोक्ता द्वारा जमा किए जाने वाले ईपीएफ योगदान की प्रतिपूर्ति सरकार द्वारा की जाएगी। यह सुविधा अधिकतम 5 वर्षों तक उपलब्ध रहेगी। दिव्यांग जनोन्मुखी इकाइयों को प्रोत्साहित करने के लिए नई सुविधा लागू की है। इसके तहत यदि कोई इकाई दिव्यांग कर्मचारियों को रोजगार देती है, तो उसे प्रति कर्मचारी 1,500 रुपए प्रतिमाह की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। यह सुविधा अधिकतम 5 कर्मचारियों तक मान्य होगी।
पर्यटन मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ग्रामीण पर्यटन को एक नए स्तर पर ले जाने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि यह सिर्फ फार्म-स्टे बनाने की योजना नहीं है, बल्कि गांवों को संस्कृति, आजीविका और सीखने के जीवंत केंद्र बनाने का अभियान है।
प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा कि फार्म स्टे पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाना है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि ग्रामीण पर्यटन केवल संदेश न रह जाए, बल्कि जमीनी स्तर पर एक सफल और सशक्त स्वरूप में सामने आए।
: आर्ट जैम 2025 : बच्चों ने रचा खुशियों का रंगीन संसार
Sun, Sep 7, 2025
लखनऊ 6 सितम्बर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में स्थित मॉडर्न स्कूल के सारनाथ हॉल में उत्साह और उमंग से भरा माहौल था, जब शहरभर से आए लगभग 200 बच्चों ने एक विशाल खाली दीवार को खुशियों से भरे भव्य भित्ति-चित्र (म्यूरल) में बदल दिया।
इस कार्यक्रम आर्ट जैम 2025 में 4 से 15 वर्ष तक के बच्चों ने भाग लिया। इसमें सी.एम.एस., ला मार्टिनियर और सेठ एम.आर. जयपुरिया जैसे अनेक विद्यालयों के छात्र-छात्राएँ शामिल हुए।मॉडर्न स्कूल की प्रिंसिपल मैडम मीना काने ने जानकारी देते हुए बताया कि बच्चों को यह स्वतंत्रता दी गई थी कि वे अपनी कला के माध्यम से यह व्यक्त करें कि उन्हें खुशी कहाँ से मिलती है – चाहे घर में, स्कूल में या फिर रोज़मर्रा की ज़िंदगी में। इस साझा चित्रकला में इंद्रधनुष, परिवार, पालतू जानवर, हँसी और सपनों जैसी अनेक झलकियाँ दिखाई दीं।
यह विविध रंगों का संगम इस बात का प्रतीक था कि एक बच्चे के जीवन में भावनात्मक सुख-समृद्धि कितनी महत्वपूर्ण है। एवं उसके समग्र विकास के लिए जरूरी भी हैकोऑर्डिनेटर मैडम मनीषा राठौड़ ने कहा है कि अनेक प्रतिभागियों के लिए यह अनुभव अविस्मरणीय रहा। उन्हें गर्व था कि उनकी चित्रकला सैकड़ों अन्य कलाकृतियों के साथ सजी और वे किसी बड़े प्रयास का हिस्सा बने। प्रत्येक बच्चे को एक "जॉय किट" भेंट की गई, जिसमें भावनात्मक सुख-समृद्धि को बढ़ावा देने वाले तत्व शामिल थे।स्पोर्ट फैकल्टी से रजनीश त्रिवेदी ने बताया है कि भावनात्मक सुरक्षा हर बच्चे का अधिकार है। रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से भावनात्मक सुख-समृद्धि को प्रोत्साहित कर आर्ट जैम ने बच्चों की आवाज़, उनकी खुशी और उनके अपनत्व का उत्सव मनाया—और सबके लिए एक उज्जवल दुनिया को रंगों में सजाया।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतियोगी बच्चों को स्कूल की तरफ से जॉय किट" एवं सर्टिफिकेट प्रदान किए गए
: लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे सितंबर से हो सकता है चालू , लंबे जाम से मिलेगी मुक्ति
Thu, Sep 4, 2025
लखनऊ 4 सितंबर लखनऊ कानपुर रूट को लेकर अच्छी खबर लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे पर अब 50 मिनट में तय होगी 95 किमी की दूरी, उम्मीद है कि सितंबर से चलने लगेंगीं गाड़ियां,उत्तर प्रदेश के लखनऊ और कानपुर एक्सप्रेस वे के बीच 18 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रूट बनाया गया है. इसमें 45 किलोमीटर तक ग्रीनफील्ड एरिया शामिल हैं. इनमें 28 छोटे पुल और 38 अंडरपास के साथ-साथ 6 फ्लाईओवर भी तैयार किए गए हैं, जिससे 95 किलोमीटर की दूरी को महज 50 मिनट में पूरा किया जा सकेगा. क्योंकि इस महत्वाकांक्षी परियोजना का 95% से अधिक निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, शुरुआती चरण में हल्के वाहन जैसे बाइक और कार इस रूट पर फर्राटा भर सकेंगे. एनएचएआई का दावा है कि इस एक्सप्रेसवे पर वाहन 100- 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगे, जिससे लखनऊ से कानपुर की यात्रा 50 मिनट में पूरी हो सकेगी । उत्तर प्रदेश के कानपुर लखनऊ एक्सप्रेसवे बनने से लोगों को काफी राहत मिलेगी इस रूट पर प्रदेशवासियों को महज 80 किलोमीटर चलने के लिए कई घंटे का समय लग जाता है वही लखनऊ उन्नाव एवं उन्नाव कानपुर के बीच बहुत जाम की स्थिति बनी हुई है इस एक्सप्रेसवे के बनने स से जहां दैनिक यात्रियों को लाभ मिलेगा वहीं लखनऊ कानपुर के बीच लगी औद्योगिक इकाइयों के माल वाहनो को भी एक लंबे थकान भारी जाम से निजात मिल सकेगी