: सीतापुर पुलिस की बर्बरता पूर्ण कार्रवाई में युवक की जान गई
Wed, Aug 13, 2025
लखनऊ 13 अगस्त वहा...रे उत्तर प्रदेश की पुलिस प्रदेश के डीजीपी मुख्यालय से मित्र पुलिस की नसीहत कई बार दी गई लेकिन प्रदेश के कोई ना कोई दरोगा जी वर्दी के रोग में आकर ऐसा काम कर जाते हैं जिससे पूरे महकमें को कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है सीतापुर के सिधौली थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। युवक की मौत के बाद उसके परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं, दावा किया है कि पुलिस ने युवक को चोर समझकर पिटाई की थी, जिसके चलते उसकी मौत हुई।परिजनों का कहना है कि युवक को दारोगा ने चोर समझकर लाठी-डंडों से बुरी तरह पीटा। उनका यह भी कहना है कि पुलिस ने युवक को बुरी तरह से मारने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती करवाया, लेकिन डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। परिजनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उचित जांच-पड़ताल के बिना युवक को अपराधी समझा और उसे निशाना बनाया। अब परिजन सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं और चाहते हैं कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
: किसी भी जमीन पर मलकाना हक के लिए केवल रजिस्ट्री पर्याप्त नहीं
Thu, Aug 7, 2025
नई दिल्ली 6 अगस्त आज सुप्रीम कोर्ट ने एक केस की सुनवाई करते हुए जमीनी विवाह से जुड़े हुए मामलों महत्वपूर्ण टिप्पणी की है अब भारत में जमीन (Property) के मालिकाना हक के लिए केवल रजिस्ट्री ही पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि अन्य कई दस्तावेज भी जरूरी होंगे। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ रजिस्ट्रेशन से ही किसी व्यक्ति को संपत्ति या जमीन का स्वामित्व या मालिकाना हक नहीं मिल जाता, इसके लिए अन्य कई दस्तावेजों की भी जरूरत होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमीन का रजिस्ट्रेशन किसी व्यक्ति के दावे का समर्थन कर सकता है, लेकिन यह प्रॉपर्टी पर कानूनी कब्जे या नियंत्रण के बराबर नहीं है। इस फैसले से पूरे देश में जागरूकता पैदा हुई है, हालांकि प्रॉपर्टी होल्डर्स, रियल एस्टेट डेवलपर्स पर इसका काफी असर पड़ने वाला है।
बता दें कि इससे पहले सभी को यही मालूम था कि अगर उनके पास प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन है, तो वह उसके मालिक हैं। लेकिन कोर्ट के फैसले के अनुसार प्रॉपर्टी के संपूर्ण कानूनी मालिकाना हक के लिए केवल रजिस्ट्रेशन ही पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए आपके पास कानूनी तौर पर संपूर्ण स्वामित्व (ओनरशिप) होना चाहिए। कोर्ट का मानना है कि इससे प्रॉपर्टी के विवादों और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी। कोर्ट ने साफ किया कि केवल रजिस्ट्री के आधार पर ही प्रॉपर्टी का लेन-देन नहीं किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्या मतलब?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से काफी लोग हैरान हैं। इस फैसले का दूरगामी असर होगा। सुप्रीम कोर्ट के इस नए फैसले का मतलब है कि अब हमें प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री के साथ ही अन्य कानूनी दस्तावेज भी समय से तैयार करवाने होंगे। तभी हमें उस प्रॉपर्टी की संपूर्ण कानूनी ओनरशिप यानी मालिकाना हक मिल पाएगा। इस ओनरशिप के बाद ही आपके पास अपनी संपत्ति के मालिकाना हक के साथ ही उसके उपयोग, मैनेजमेंट और ट्रांसफर का कानूनी हक रहेगा।
निर्णय उन लोगों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है, जिन्होंने खरीद, विरासत या अन्य माध्यमों से संपत्ति अर्जित की है। संपत्ति मालिकों को अब संपत्ति संबंधित सभी दस्तावेजों की कानूनी मान्यता हासिल करने और स्वामित्व व रजिस्ट्रेशन के मुद्दों को समझने के लिए लीगल प्रोफेशन्ल्स से परामर्श लेने की सलाह दी जा रही है। संपत्ति मालिकों को संपत्ति संबंधी कानूनों में होने वाले बदलावों और कोर्ट द्वारा उनकी व्याख्या करने के तरीके के बारे में भी जानकारी रखनी चाहिए।
दी जा सकेगी मालिकाना हक को चुनौती
अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि अगर किसी के पास प्रॉपर्टी की केवल रजिस्ट्री ही है, और उस पर किसी अन्य का कब्जा है या उस संपत्ति पर अधिकार संबंधी कोई विवाद है, तो मालिकाना हक को चुनौती दी जा सकती है। इस फैसले से स्पष्ट है कि अब अगर आप कोई प्रॉपर्टी खरीदते हैं, तो आपको ज्यादा सतर्क रहना होगा और बारीकी से प्रॉपर्टी के सभी अन्य दस्तावेजों की जांच करनी होगी और उन्हें अपने पक्ष में ट्रांसफर कराना होगा।
मालिकाना हक के लिए कौन से डॉक्यूमेंट जरूरी?
1- बिक्री आलेख (द सेल डीड): यह एक ऐसा डॉक्यूमेंट है, जो किसी प्रॉपर्टी के मालिकाना हक को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर करने के रूप में काम करता है। पहली बार किसी भी प्रॉपर्टी को खरीदने के लिए बिक्री विलेख उचित कानूनी मालिकाना हक सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
2- द मदर डीड: किसी भी प्रॉपर्टी के लेन-देन में ‘द मदर डीड’ बेहद जरूरी कानूनी दस्तावेज है। यह प्रॉपर्टी के पूरे मालिकाना हक के इतिहास को दर्शाता है। इसमें प्रॉपर्टी के सभी लेन-देन का रिकॉर्ड होता है। खासकर यह दस्तावेज उस समय जरूरी होता है, जब आप उसके बदले बैंक से लोन लेना चाहते हैं।
3- बिक्री और खरीद समझौता (SPA): किसी भी प्रॉपर्टी की खरीद के लिए बिक्री और खरीद समझौता सबसे जरूरी दस्तावेजों में शामिल है। इसमें खरीदने और बेचने वाले के बीच लेनदेन की शर्तों की डिटेल होती है। इसमें प्रॉपर्टी को बेचने की कीमत, भुगतान की शर्तें शामिल हैं।
4- भवन स्वीकृति योजना: किसी भी प्रॉपर्टी पर घर बनाने के लिए पहले स्थानीय नगर निगम या अथॉरिटी से मंजूरी लेनी होती है। इसके लिए यह दस्तावेज भी बेहद जरूरी होता है।
5- कब्जा पत्र (Possession Letter): यह एक कानूनी दस्तावेज है, जो प्रूव करता है कि प्रॉपर्टी का मालिकाना हक एक पक्ष से दूसरे पक्ष को ट्रांसफर हो गया है। यह पत्र बिल्डर की ओर से जारी किया जाता है, जिसमें बताया जाता है कि खरीदार किसी तारीख से प्रॉपर्टी पर कब्जा कर सकता है।
: उत्तर प्रदेश में ड्यूटी से लगातार गैरहाजिर चार डॉक्टर बर्खास्त*
Tue, Aug 5, 2025
लखनऊ, 3 अगस्त बिना सूचना लगातार गैरहाजिर चल रहे चार डॉक्टरों को बर्खास्त कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग के तीन डॉक्टरों सहित कन्नौज मेडिकल कॉलेज में हड्डी रोग विभाग के सहायक आचार्य की सेवाएं समाप्त की गई हैं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निर्देश पर प्रमुख सचिव ने आदेश जारी कर दिया है। तीन अन्य डॉक्टरों पर गिर सकती है गाज।
पीलीभीत जिला चिकित्सालय में तैनात बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजकुमार, शाहजहांपुर के जलालाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉ. विनय कुमार सैनी, अम्बेडकर नगर (स्थानान्तरणधीन उन्नाव) डॉ. शशि भूषण डोभाल लंबे समय से लगातार गैरहाजिर चल रहे थे। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने तीनों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। वहीं, लंबे समय से गैरहाजिर कन्नौज राजकीय मेडिकल कॉलेज के सहायक आचार्य, आर्थोपेडिक्स विभाग के डॉ. अवनीश कुमार सिंह को भी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
मैनपुरी के किशनी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में तैनात दन्तशल्यक डॉ. राखी सोनी बिना सक्षम स्तर से अवकाश स्वीकृत कराये अनधिकृत रूप से तैनाती स्थल से अनुपस्थित हैं। प्रयागराज के डिप्टी सीएमओ डॉ. आनन्द सिंह को एवं मथुरा के छाता सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में तैनात डॉ. अशोक कुमार द्वारा गम्भीर रूप से घायल रोगी के इलाज में लापरवाही बरतने के आरोप लगे। तीनों डॉक्टरों की जांच कराई गई। प्राथमिक जाँच में इन डॉक्टर को दोषी पाया गया है। इन्हें आरोप-पत्र देकर उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही किये जाने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को दिये गये हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग के आचार्य एवं विभागाध्यक्ष डॉ. डीसी श्रीवास्तव पर ओपीडी का समय पर संचालन न करने के गंभीर आरोप लगे हैं। उनसे स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
एक्सरे मशीन लगेगी
मेरठ के किठौर स्थित 50 बेड संयुक्त चिकित्सालय व आजमगढ़ स्थित लालगंज के 100 बेड हॉस्पिटल में मरीजों की सुविधाओं के लिए एक्सरे मशीन लगाने का फैसला किया गया है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बताया कि दोनों जनपदों में स्थित उक्त अस्पतालों के लिए 27-27 लाख रुपए अवमुक्त किए गए हैं।